बहराइच : महिलाओं ने वनकर्मियों पर लगाया गंभीर आरोप, कहा - धमकी देकर वसूलते हैं 10 किलो अनाज का अवैध लगान
बहराइच, अमृत विचार। कतर्निया घाट वन्य जीव प्रभाग से सटे गांव की सैकड़ो महिलाएं बुधवार को डीएम कार्यालय पहुंची। यहां पर सभी ने वन विभाग द्वारा की जा रही अवैध लगान की वसूली का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया। महिलाओं ने कहा कि लगान के रूप में अनाज न देने पर उन्हें फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जाती है।
देश को आजाद हुए 75 वर्ष बीत गए हैं, लेकिन अंग्रेजों के समय में चला आ रहा लगान वसूली का खेल आज भी जिले में चल रहा है। यह हम नहीं बल्कि जंगल से सटे गांव की महिलाओं ने बुधवार को जिला मुख्यालय पहुंचकर अधिकारियों से बताई। कतर्निया घाट वन्य जीव प्रभाग के फकीरपुरी, बर्दिया विशुनापुर, चहलवा, बाजपुर बनकटी, कारीकोट गांव की महिलाएं महिला किसान एवं ग्राम सभा सदस्य की अगुआई में जिला मुख्यालय पहुंची। गांव निवासी महिला मुन्नी देवी, कैलाश, गौरी देवी, पूजा देवी की अगुवाई में महिलाओं ने डीएम कार्यालय के सामने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।

महिलाओं का कहना है कि इन ग्राम पंचायत में कार्यरत वन विभाग के मुंशी द्वारा प्रति तीन माह पर सभी 10/10 किलो गेहूं और धान लगान के रूप में दी जाती है। जब सभी खाद्यान्न देने का विरोध करते हैं तो उन्हें फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी देते हैं। महिलाओं का कहना है कि जंगल में लकड़ी, बांस और पत्ती उठाने के नाम पर अनाज के रूप में लगान ली जा रही है। गांव निवासी युवा वर्ग की प्रियंका और कविता ने कहा कि वन विभाग के कर्मचारी लकड़ी के लिए जंगल में जाने पर वसूली की जाती है। ऐसे में सभी काफी परेशान हैं। सभी ने संलिप्त लोगों के विरुद्ध जांच कर कार्यवाई करने और अवैध लगान वसूली को बंद किए जाने की मांग की है। महिलाओं की समस्या सुनते हुए नगर मजिस्ट्रेट शालिनी प्रभाकर, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट पूजा चौधरी और एनआरएलएम के उपायुक्त रामेंद्र कुशवाहा ने सुना। नगर मजिस्ट्रेट ने शिकायत की जांच के बाद कार्यवाई करने का निर्देश दिया है।
जंगल में जाना है मना
जंगल से सटे लोग जंगल में जाते हैं। उस क्षेत्र में बाघ और तेंदुए का हमला होने पर जान चली जाती है। ऐसे में सरकार ने खुद नियम बनाया है कि कोई जंगल के अंदर नहीं जा सकता है। अगर इसके इतर किसी के द्वारा अनाज या अन्य की वसूली की जा रही है तो उसके विरुद्ध जांच कर कार्रवाई की जायेगी।
आकाशदीप वधावन, डीएफओ
