Kanpur News: हिंदुत्व की अलख जगाएगा विश्वस्तरीय महानाट्य जाणता राजा, पुणे से लायी जा रही मंच साज-सज्जा सामग्री
हिंदुत्व की अलख विश्वस्तरीय महानाट्य ‘जाणता राजा’ जगाएगा।
हिंदुत्व की अलख विश्वस्तरीय महानाट्य ‘जाणता राजा’ जगाएगा। पुणे से मंच साज-सज्जा सामग्री लायी जा रही है। इसके साथ ही घोड़ा, बैलगाड़ी की व्यवस्था भी यहीं से है।
कानपुर, अमृत विचार। छत्रपति शिवाजी के जीवन पर आधारित एशिया का सबसे बड़ा महानाट्य ‘जाणता राजा’की तैयारियां लगभग पूरी होने को हैं। एक से सात अक्टूबर तक चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में इस महानाट्य का मंचन होगा। हालांकि इसका उद्देश्य रामलला आोग्यधाम हॉस्पिटल निर्माण है पर इसे हिंदुत्व की अलख जगाने की दृष्टि से भी देखा जा रहा है।
यह महानाट्य आपको एहसास करा देगा कि जैसे आप लगभग 300 वर्ष पीछे लौट गए हैं जब मुगलों ने सनातनी हिंदुओं का जीना मुहाल कर रखा था। ऐसे में छत्रपति शिवाजी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है और यही संदेश देने के लिए हिंदुओं की एकजुटता के साथ ही सनातन धर्म पर हालिया बयानी हमलों से भी सचेत रखना भी जाणता राजा महानाट्य मंचन का उद्देश्य बताया जाता है। इस महानाट्य में तीन सौ कलाकार भाग ले रहे हैं जिसमें 200 कलाकार कानपुर के होंगे जिन्हें बीएनएसडी शिक्षा निकेतन में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
लगभग तीन सौ वर्ष पुरानी कहानी पर आधारित जाणता राजा महाराष्ट्र के वीरगाथा काल की ओर ले जाती है जब पठानों का हमला होता है। मुगल जनता पर जुल्म ढाते हैं। चौतरफा अंधकार सा हो जाता है। मराठी में जाणता राजा का अर्थ बुद्धिमान शासक होता है।
शिवाजी के पिता शाहजी भोसले आदिलशाही सल्तनत के छोटे से मनसबदार होते हैं जिनके घर जीजाबाई ब्याह कर आती हैं। शिवाजी उन्हीं बेटे थे। अपनी माता जीजाबाई जिनकी आंखों में स्वराज का सपना बसा होता है, उन्हीं को पहला गुरु मानने वाले शिवाजी के रणनीतिक कौशल के आगे मुगल भी पानी मांगने लगते हैं। जनता में खुशी की लहर दौड़ जाती है कि उसका कोई तारनहार जन्मा है।
महानाट्य में एक-एक दृश्य नयनाभिराम होता है। मुगलों के अत्याचार हिंदू अस्तित्व के लिए सत्य, संघर्ष, समर्पण और सृजन का प्रण लिए शिवाजी न केवल मुगलों से अपना लोहा मनवाया बल्कि एक के बाद एक 300 गढ़ जीते जिन पर स्वराज की विजय पताका फहराई। छापामार युद्ध शैली, कूटनीति से लेकर वीरता तक के उदाहरणों से जाणता राजा का मंचन भरा पड़ा है।
औरंगजेब द्वारा धोखे से शिवाजी को कैद कर लेना और उनका सेना को परास्त करके भाग निकलना जैसे रोमांच दृश्य भी दिखेंगे। छत्रपति शिवाजीराजे भोसले भारत के एक महान राजा एवं रणनीतिकार थे जिन्होंने 1674 ई. में पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी। इसके लिए उन्होंने मुगल साम्राज्य के शासक औरंगज़ेब से संघर्ष किया। सन् 1674 में रायगढ़ में उनका राज्याभिषेक हुआ और वह छत्रपति बने।
तत्कालीन देशकाल का दृश्य उपस्थित कराने के लिए घोड़े, बैलगाड़ी जैसे संसाधन जुटाए जा रहे हैं। उनका युग, जन्म, मुकदमा चलाने की शैली, अफजल खान की हत्या, आगरा से भागना और राज्याभिषेक समारोह का सजीव दिखने वाला मंचन भी दर्शकों को दिखेगा। सन 1985 से अब तक 11 राज्यों में सैकड़ों मंचन हो चुके है।
चार मंजिला स्टेज, तीन सौ कलाकार
विहिप कानपुर प्रांत के कार्यवाहक अध्यक्ष जाणता राजा महानाट्य आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ.उमेश पालीवाल ने बताया कि कानपुर में दूसरी बार जाणताराजा महानाट्य का मंचन होगा जिसमें करीब 300 कलाकार होंगे। दो लाख वर्गफुट में चार मंजिला मंच होगा। दो सौ स्थानीय कलाकार बीएनएसडी शिक्षा निकेतन में रिहर्सल करते हैं। यह एशिया का सर्वश्रेष्ठ और विश्व का दूसरा बड़ा महानाट्य है। जन्म से लेकर छत्रपति बनने की शिवाजी की गौरवगाथा है इसमें। अब तक 70 लाख लोग देख चुके हैं।

डॉ उमेश पालीवाल
कलाकारों की भव्य पोशाकों के साथ ही हाथी घोड़ा, बैलगाड़ी में सुसज्जित दिखेंगी। डॉ.उमेश पालीवाल ने बताया कि जाणता राजा महानाट्य के मंचन का उद्देश्य रावतपुर में रामलला आरोग्य धाम हॉस्पिटल का निर्माण कराना है। इसमें ओपीडी चल रही है। महीना भीतर चिकित्सा की काफी कुछ सुविधाएं लोगों को मिलेंगी। डॉ पालीवाल का कहना है कि हिंदुत्व की अलख जगाना भी महानाट्य का उद्देश्य है। एक मां अपने बेटे को कैसे तैयार करती है। इसीलिए मां को पहली गुरु बताया जाता है।
