Kanpur: बड़े काम की अलसी, कम सिंचाई में भरपूर कमाई, CSA में विकसित सू्र्या प्रजाति में ओमेगा-3 की मिलती सबसे ज्यादा मात्रा
कानपुर में सीएसए में विकसित सू्र्या प्रजाति में ओमेगा-3 की मिलती सबसे ज्यादा मात्रा।
कानपुर में सीएसए में विकसित सू्र्या प्रजाति में ओमेगा-3 की सबसे ज्यादा मात्रा मिलती। बुंदेलखंड में अक्टूबर का पहला पखवाड़ा और बाकी प्रदेश में दूसरा पखवाड़ा बुवाई का सही समय है।
कानपुर, अमृत विचार। अलसी की बुवाई का समय बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए अक्टूबर का प्रथम पखवारा और बाकी प्रदेश में अक्टूबर का दूसरा पखवाड़ा है। अलसी की खेती में सिंचाई की जरूरत कम पड़ती है।
सीएसए कृषि एवं प्रोद्यौगिकी विश्वविद्यालय ने प्रदेश में अलसी की बुवाई के लिए गरिमा, शुभरा, श्वेता, नीलम, पद्मिनी, शेखर, गौरव, शिखा, रश्मि, पार्वती और रुचि नामक प्रजातियां विकिसित की हैं, जबकि सूर्या एवं अन्नू प्रजाति की पूरे देश में कहीं भी बुवाई की जा सकती है। आमतौर पर अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड 50 से 62 प्रतिशत पाया जाता है, लेकिन सीएसए विश्वविद्यालय की सूर्या प्रजाति में ओमेगा 3 फैटी एसिड 62.7 प्रतिशत मिलता है।
सीएसए कृषि एवं प्रद्यौगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आनन्द कुमार सिंह ने बताया कि किसानों के लिए अलसी की खेती फायदे का सौदा है। इसमें ओमेगा-3 की प्रचुर मात्रा के साथ विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसकी वैज्ञानिक विधि से खेती करने पर किसानों को कम लागत में अधिक लाभ होगा। अलसी के तेल से ओमेगा-3 निकालकर दवाइयों में प्रयोग किया जाता है।
अर्थराइटिस, मधुमेह और कैंसर बचाव में लाभकारी
दिलीप नगर कृषि विज्ञान केंद्र के प्रसार वैज्ञानिक डॉ. राजेश राय के अनुसार ओमेगा-3 कोलेस्ट्रॉल घटाने के साथ अर्थराइटिस की समस्या दूर करता है। इसमें 20 से 22 प्रतिशत फाइबर होता है, जो मधुमेह कम करता है। अलसी में पाया जाने वाला लिग्निन कैंसर को नियंत्रित करने में लाभकारी है। अलसी में ओमेगा 3 फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में मिलने के साथ विटामिन तथा मिनरल्स के साथ एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं।
