लखनऊ : योगी सरकार ने कसी नकेल, दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन के मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर होगी कार्रवाई
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 6 वर्ष के भीतर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिलाओं और बच्चियों से जुड़े अपराधों को कम करने के जो प्रयास किये हैं। उसका असर प्रदेश के विभिन्न जिलों में दिखने लगा है। जिन जिलों में दुष्कर्म के मामलों में बड़ी कार्रवाई हुई है। उनमें बदायूं, मुरादाबाद, बिजनौर, अमरोहा और संभल शामिल हैं जबकि प्रयागराज, शाहजहांपुर, बलरामपुर, कौशाम्बी और फतेहपुर का प्रदर्शन काफी खराब है। हालांकि यह सरकारी आंकड़े हैं।
दरअसल, उत्तर प्रदेश में आरोपियों को सख्त सजा दिलाने का प्रयास सरकार कर रही है। यही कारण है कि हैवानों को सजा दिलाने के लिए पीड़िता भी आगे आ रही हैं। जिसके चलते आरोपियों के खिलाफ शिकायत हो रही है। बताया जा रहा है कि जहां प्रदेश के कुछ जिलों में महिला और बच्चियों से जुड़े वृद्धि दर्ज की गयी है, वहीं मामलों के निस्तारण में तेजी के चलते प्रदेश भर में कुल मामलों में गिरावट भी सामने आई है।
बता दें कि हाल ही में सीएम योगी आदित्यनाथ ने दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट, लव जिहाद, धर्म परिवर्तन को लेकर समीक्षा बैठक की जिसमें हैवानों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिये हैं। साथ ही इन मामलों के मुकदमों को दर्ज करने में हीलाहवाली करने वालों पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई के आदेश भी जारी किये हैं।
समीक्षा बैठक में सीएम योगी आदित्यनाथ को पुलिस विभाग की तरफ से जानकारी दी गई है कि प्रदेश में जनवरी से अगस्त के बीच में दुष्कर्म के 1869 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 1359 मामलों में आरोप पत्र दाखिल किये गये हैं, जबकि 220 में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गयी है। इसके अलावा अभी 290 मामलों की विवेचना की जा रही है। यह भी बताया गया है कि इससे भले ही प्रदेश के कुछ जिलों में दुष्कर्म के दर्ज मामलों में वृद्धि हुई हो, लेकिन पूरे प्रदेश में रेप के मामलों में कमी दर्ज की गई है।
जागरूकता के चलते दुष्कर्म के मामलों में आठ माह के भीतर फतेहगढ़, सीतापुर, खीरी, कौशांबी और हमीरपुर में ज्यादा दर्ज हुये हैं। दुष्कर्म के मामलों में बड़ी कार्रवाई करने वाले जिलों में बदायूं, मुरादाबाद, बिजनौर, अमरोहा और संभल शामिल हैं जबकि प्रयागराज, शाहजहांपुर, बलरामपुर, कौशाम्बी और फतेहपुर का प्रदर्शन खराब बताया जा रहा है। इसी तरह पॉक्सो एक्ट के 5957 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 4860 में आरोप पत्र दाखिल कर दिये गये हैं जबकि 373 में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गयी है। वहीं 724 मामले विचाराधीन हैं।
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