बरेली: आठ वरिष्ठ अफसरों को आदेश, सांसद-विधायकों के नंबर मोबाइल में संरक्षित कर रिपोर्ट दें
15 अक्टूबर तक अफसरों को रिपोर्ट भी प्रभारी अधिकारी वीआईपी कार्यालय भेजनी है
बरेली, अमृत विचार। भाजपा सरकार में उन्हीं के सांसद और विधायकों की अफसर नहीं सुन रहे हैं। जनप्रतिनिधियों की स्थिति कितनी खराब है यह मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव के उस आदेश से मालूम होता है कि जिसमें प्रशासनिक समेत अन्य विभागों के सीनियर अफसरों को सांसद, विधायकों और उनके करीबी लोगों के मोबाइल नंबर अपने फोन में संरक्षित करने के लिए कहा गया है। अफसरों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि यदि सांसद-विधायक और उनके करीबी कॉल करते हैं और किसी कारण कॉल रिसीव न हुई तो बैक कॉल जरूर करें।
जब 6 अक्टूबर को प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह जिले की समीक्षा करने कलेक्ट्रेट सभागार पहुंचे तब जनप्रतिनिधियों ने जोरशोर से यह मुद्दा उठाया कि अधिकारी न तो उनके कॉल रिसीव करते हैं और न ही बैक कॉल करते हैं। इस पर प्रभारी मंत्री ने कहा कि सभी अधिकारी जनप्रतिनिधियों से सामंजस्य बनाकर कार्य करें। अधिकारी सांसद, विधायक और उनके करीबियों के फोन नंबर अपने मोबाइल में सेव करें। वहीं 6 अक्टूबर को ही प्रभारी अधिकारी वीआईपी रेनू सिंह की ओर से सीडीओ, नगर आयुक्त, बीडीए वीसी, संभागीय खाद्य नियंत्रक, सीएमओ, मुख्य अभियंता लोनिवि, मुख्य अभियंता सिंचाई और मुख्य अभियंता वितरण पावर काॅरपोरेशन को अनुपालन आख्या भेजने को चिट्ठी जारी की गई। जिसमें मुख्य सचिव की ओर से 3 अक्टूबर काे दोबारा जारी पत्र का उल्लेख करते हुए अफसरों से कहा गया है कि सभी अधिकारी सांसद, विधायक के सीयूजी नंबर या उनके द्वारा नोट कराए गए अन्य मोबाइल नंबर को अनिवार्य रूप से अपने मोबाइल में संरक्षित करने और कॉल रिसीव न कर पाने की स्थिति में उनको तत्काल बैक कॉल करेंगे।
बैठक में उपस्थित होने या अनुपलब्ध होने पर काल की जानकारी होने के बाद प्राथमिकता के आधार पर जनप्रतिनिधियों को मेसेज के साथ यथाशीघ्र कॉल बैक करेंगे। विधायकों के फोन कॉल पर प्राप्त प्रकरणों को निस्तारित करते हुए उन्हें प्राथमिकता के आधार पर अवगत कराएंगे। यह भी निर्देश दिए हैं कि आदेश का अनुपालन न होने की दशा में नियंत्रक प्राधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अफसरों से कहा गया है कि मुख्य सचिव के आदेश के अनुपालन में 15 अक्टूबर तक हर हाल में आख्या कार्यालय को उपलब्ध करा दें ताकि अनुपालन आख्या शासन को भी भेजी जा सके।
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