Allahabad High: “बांके बिहारी मंदिर के सिबायत के कामकाज में दखल नहीं देगी सरकार”
प्रयागराज। मथुरा के वृंदावन में स्थित बांके बिहारी मंदिर के लिए गलियारा निर्माण के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में कहा कि वह भक्तों के चढ़ावे के पैसे से इस गलियारा का निर्माण करना चाहती है लेकिन वह सिबायत (गोस्वामी परिवार) के कामकाज में दखल नहीं देने जा रही।
मुख्य न्यायाधीश प्रितिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की पीठ ने मथुरा के आनंद शर्मा और एक अन्य व्यक्ति की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले में अगली तारीख 30 अक्टूबर तय की। जनहित याचिका में बांके बिहारी मंदिर में भगदड़ की घटना की जांच कराने की मांग की गई है।
बुधवार को सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि सरकार इस गलियारा का निर्माण भगवान को चढ़ाए गए पैसों से करना चाहती है। सरकार के इस कथन का गोस्वामी परिवार द्वारा विरोध किया गया। तब सरकार की ओर से कहा गया कि वह सिबायत (गोस्वामी परिवार) के कामकाज में दखल देने नहीं जा रही है।
अदालत ने सिबायत द्वारा इस मामले में पक्षकार बनाए जाने के आवेदन पर अपना आदेश आज सुरक्षित रख लिया। इससे पूर्व, अदालत को बताया गया था कि राज्य सरकार बांके बिहारी मंदिर के पास पांच एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर एक गलियारे का निर्माण करने की योजना बना रही है जिससे श्रद्धालुओं को सुविधाएं दी जा सकें।
इस पर अदालत ने राज्य सरकार को मंदिर जाने वाले भक्तों के प्रबंधन के संबंध में अपना रुख स्पष्ट करने को कहा था। इसके बाद, गोस्वामी परिवार द्वारा पक्षकार बनने का एक आवेदन दाखिल कर इस योजना पर यह कहते हुए आपत्ति जताई गई थी कि यह एक निजी मंदिर है और सरकार द्वारा इसमें हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।
इससे पूर्व, प्रखर गर्ग नाम के एक व्यक्ति को पक्षकार बनने का आवेदन देते हुए उनके वकील ने कहा था कि यदि सरकार विकास के लिए आगे बढ़ती है तो उनके मुवक्किल एक महीने के भीतर 100 करोड़ रुपये जमा करने को तैयार हैं और आगे की राशि भी उपलब्ध कराई जाएगी।
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