UP Politics: SP से दूरियां तो बसपा से कांग्रेस की बढ़ रहीं नजदीकियां, कानपुर से अमिताभ को लड़ा सकती सपा….

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Edited By Amrit Vichar
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सपा से दूरियां तो बसपा से कांग्रेस की नजदीकियां बढ़ रहीं है।

सपा से दूरियां तो बसपा से कांग्रेस की नजदीकियां बढ़ रहीं है। कानपुर से समाजवार्दी पार्टी विधायक अमिताभ बाजपेई को चुनाव लड़ा सकती है।

कानपुर, [महेश शर्मा]। सपा और कांग्रेस के बीच छिड़ी बयानबाजी की जंग में बसपा को सूबे में अपने लिए मौका नजर आ रहा है। कांग्रेस का स्टैंड भांपकर इस माहौल का राजनीतिक लाभ उठाने के लिए बसपा ने चाल बदलनी शुरू कर दी है।

इसके चलते जहां कांग्रेस और सपा में दूरियां बढ़ रही हैं तो वहीं बसपा और कांग्रेस में नजदीकी के संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक सूत्र बताते हैं कि बसपा सुप्रीमो मायावती और सोनिया गांधी तथा सतीश मिश्रा और जयराम रमेश के बीच बातचीत की चर्चा के कारण यूपी में चुनावी समीकरण बदलने के आसार बन सकते हैं। इसका असर कानपुर संसदीय सीट पर भी पड़ सकता है। 

सपा और कांग्रेस के बीच बैर की बयार के बीच ‘इंडिया’ गठबंधन पर बसपा सुप्रीमो मायावती के भतीजे आकाश आनंद का एक्स पर ट्वीट चर्चा में है। रविवार को पोस्ट में उन्होंने लिखा कि पिछले दो दिनों से सपा और कांग्रेस में खूब बयानबाजी हो रही है। साफ है कि दोनों के पास लड़ने का वैचारिक आधार नहीं है। सत्ता पाने के लिए गठजोड़ के जुगाड़ में लगे हैं।

आकाश आनंद ने यह भी कहा कि सपा का आधार अब खत्म हो चुका है। मुस्लिम भी सपा को वोट देकर अपनी गलती मान रहा है। उनका यह बयान बसपा के विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’में आने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि बसपा अकेले चुनाव लड़ने की बात कहती रही है, पर राजनीति के बदलते रंग में कुछ भी संभव है।

कांग्रेस की ही तरह बसपा भी लोकसभा चुनाव में दलित मुस्लिम और ओबीसी पर दांव लगाने के लिए होमवर्क कर रही है। कांग्रेस मानती है कि यूपी में सपा और बसपा ही भाजपा को टक्कर देने की स्थिति में हैं, लेकिन राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा, जातीय जनगणना का मुद्दा और इजरायल तथा फिलीस्तीन पर स्पष्ट राय का असर लोकसभा चुनाव पर पड़ने को लेकर आशान्वित भी है।  

2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन ने 38 और 37 सीटों पर लड़ा था, लेकिन बसपा ने दस और सपा ने पांच सीटें ही जीती थीं। बसपा भले ही अकेले लड़ने का दम भर रही हो पर 2012 से उसका लगातार गिरता ग्राफ भविष्य पर सवालिया निशान लगा रहा है। ऐसे में किसी नये गठबंधन की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। 

कानपुर से अमिताभ को लड़ा सकती सपा

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पार्टी पदाधिकारियों को स्पष्ट संकेत दे चुके हैं कि लोकसभा चुनाव में कानपुर से अपनी तैयारी पूरी रखें। इसके साथ ही उन्होंने सुरेंद्र मोहन अग्रवाल, नसीरुद्दीन एडवोकेट, अपर्णा जैन और नीलम रोमिला सिंह को बड़े पद भी दिए हैं। सपा नेता साफ कहते हैं कि कानपुर लोकसभा क्षेत्र की पांच में तीन विधान सभा सीटों पर सपा जीती है।

किदवई नगर से कांग्रेस के अजय कपूर को छोड़ बाकी सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई थी। मेयर चुनाव में भी सपा प्रत्याशी वंदना वाजपेयी भले ही हारीं पर खासे वोट पाए थे। ऐसे में सपा कानपुर से दावा मजबूत मानती है। दूसरी तरफ कांग्रेस का बैकवर्ड और मुस्लिम कार्ड के साथ ही यदि बसपा से गठजोड़ हो जाता है तो यह गठबंधन कानपुर में सपा के लिए बेचैनी बढ़ा सकता है।

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