बरेली: चिड़ियाघरों में शाकाहारी वन्य जीवों की सेहत सुधारेगा आईवीआरआई का डाइट प्लान
पशु पोषण विभाग के वैज्ञानिकों ने तैयार किया डाइट प्लान, आईवीआरआई ने संस्तुति कर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भेजा
शिवांग पांडेय, बरेली, अमृत विचार : भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिकों ने पोषण को पूर्ण करने के उद्देश्य से चिड़ियाघरों में शाकाहारी वन्यजीवों के लिए डाइट प्लान तैयार किया है। वर्तमान में शाकाहारी पशुओं को हरा चारा खिलाने को ही प्राथमिकता दी जा रही है, मगर अब उन्हें हरे चारे के साथ पोषण युक्त अनाज भी उपलब्ध कराया जाएगा।
आईवीआरआई ने संस्तुति करते हुए यह डाइट प्लान वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भेजा है।आईवीआरआई के पशु पोषण विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ. असित दास ने बताया कि मांसाहारी पशुओं के मुकाबले शाकाहारी पशुओं में पोषण के लिए विशेष डाइट प्लान की आवश्यकता होती है।
कई वर्षों तक आईवीआरआई में इस प्रोजेक्ट पर काम किया गया, जिसके आधार पर शाकाहारी पशुओं के डाइट प्लान को तैयार किया गया है। आईवीआरआई के वन्य जीव संरक्षण, प्रबंधन और रोग निगरानी केंद्र ने इस काम के लिए देश के 34 चिड़ियाघरों में शोध किया। यह वाइल्ड लाइफ सेक्शन भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और सेंट्रल जू अथारिटी के लिए बतौर रेफरल सेंटर काम करता है।
शोध में चार वर्षों के दौरान वन्य जीवों को खाने में दी जा रही चीजों, उससे सेहत पर असर से लेकर यूरीन और कई अन्य टेस्ट किए गए। इनमें कैलोरी, पोषण, प्रोटीन और अन्य जरूरतों का विश्लेषण किया गया। बाकी देशों में चिड़ियाघरों में दिए जा रहे भोजन की भी तुलना की गई।
उन्होंने बताया कि जैसे अनियमित खानपान से इंसान मोटापा समेत कई बीमारियां से घिर जाता है। वैसा ही वन्यजीवों के साथ है। वे बंदी दशाओं में रखे जाते हैं, इसलिए अपनी नैसर्गिक आदतों के अनुसार खुद भोजन जुटाना उनके लिए संभव नहीं होता।
मनुष्य अपनी समझ अनुभव के अनुसार जो तय करता, इन्हें खिलाता है, जिससे ये वन्यजीव मोटापा, विटामिन की कमी समेत अन्य बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। इसके लिए नियमित डाइट की आवश्यकता को प्राथमिकता दी गई।
दो भागों में विभाजित होते हैं शाकाहारी पशु: वैज्ञानिक पद्धति के आधार पर शाकाहारी पशुओं को दो भागों में फॉरगाट और हाइंड में बांटा गया है। फॉरगाट पशुओं में पाचन की प्रक्रिया आमाशय से पहले बैक्टीरिया द्वारा की जाती है। इनमें गाय, भैंस, हिरन, जिराफ आदि पशु आते हैं। हाइंड पशुओं में पाचन प्रक्रिया आमाशय के बाद बैक्टीरिया द्वारा की जाती है।
इनमें घोड़ा, हाथी, गेंडा, हिप्पो आदि पशु आते हैं। प्रधान वैज्ञानिक डाॅ. असित दास ने बताया कि किसी भी रीढ़ वाले पशु के शरीर में सेलुलोस को पचाने के लिए कोई एनजाइम नहीं पाया जाता है। घास और हरे चारे में अधिक संख्या में सेलुलोस पाया जाता है। ऐसी स्थिति में पशुओं के शरीर में विभिन्न बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो खाने को पचाने में मदद करते हैं।
शाकाहारी पशुओं के लिए प्रतिदिन का डाइट प्लान: हाथी के लिए 200-250 किलो घास, हरा चारा, 3 किलो अनाज (चावल, दाल, खिचड़ी, रोटी), हफ्ते में एक दिन गन्ना, केले के पेड़े, एक सींग वाले भारतीय गेंडा के लिए 3 किलो अनाज, 150 किलो हरा चारा, पांडा के लिए डेढ़ किलो बंबू के पत्ते प्रतिदिन, फल, अनाज, मिनिरल, विटामिन, बारहसिंगा के लिए एक किलो अनाज, 10-12 किलो हरा चारा, चीतल के लिए आधा किलो अनाज, 3 किलो हरा चारा, ब्लैक बक के लिए 250 ग्राम अनाज, 3 किलो हरा चारा, जंगली खच्चर के लिए एक किलो अनाज, 15 किलो हरा चारा डाइट प्लान में शामिल किया गया है।
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