लखनऊ : ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन से बढ़ता है कैंसर पीड़ित महिलाओं का आत्मविश्वास
लखनऊ, अमृत विचार। ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन उन महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है, जो ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हैं। इससे उनके आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी होती है। उनका मानसिक स्वास्थ्य अच्छा होता है, लेकिन अभी भी बहुत से लोगों में ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन को लेकर जागरुकता की कमी है, विशेषकर महिलाओं में। ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन को लेकर लोगों में जागरुकता आये, इसके लिए संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में तीन दिवसीय कांफ्रेस ब्रेसकॉन-2023 का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें करीब 500 डॉक्टर हिस्सा लेंगे और ब्रेस्ट कैंसर को लेकर लोगों में जागरुकता लाने का काम करेंगे। साथ ही ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन से संबंधित इलाज की नई तकनीक और सर्जरी पर जानकारी भी साझा होगी। तीन दिवसीय इस कांफ्रेंस में फिल्म अभिनेत्री महिमा चौधरी भी हिस्सा लेंगी। इस बात की जानकारी एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो.आरके धीमन ने गुरुवार को प्रेसवार्ता कर दी। उन्होंने बताया कि ब्रेसकॉन की शुरूआत 17 नवंबर से होगी।
दरअसल, भारत में ब्रेस्ट कैंसर को लेकर इधर कुछ सालों में जागरुकता बढ़ी है। पहले की अपेक्षा अब ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित बहुत से मरीज शुरूआती दौर में ही इलाज के लिए आ रहे हैं। समय रहते कैंसर की पहचान और उसके इलाज से 60 से 65 प्रतिशत मरीज ठीक भी हो रहे हैं, लेकिन ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिलाओं में ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन को लेकर अभी जागरुकता की कमी है। उन्होंने बताया कि यदि किसी महिला की एक ब्रेस्ट रिमूव हो जाती है तो मन में कुंठा आ जाती है, उनको हमेशा यह महसूस होता है कि शरीर का एक अंग अब नहीं है। जिसका सीधा असर उनके आत्मविश्वास पर पड़ता है। इसी को लेकर तीन दिवसीय कांफ्रेंस आयोजित की जा रही है। वहीं कांफ्रेंस के आर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. विनय कांत शंखधर ने बताया कि ब्रेस्ट रिकंस्ट्रकशन, कैंसर के उपचार का ही एक हिस्सा है, जब ब्रेस्ट की सर्जरी की जा रही होती है, उस दौरान ही ब्रेस्ट का रिकंस्ट्रकशन भी किया जाता है।
एसजीपीजीआई स्थित एंडोक्राइन और ब्रेस्ट सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो.गौरव अग्रवाल ने बताया कि ब्रेस्ट कैंसर अधिकतर महिलाओं में होता है। समय पर इस बीमारी की जानकारी हो जाये तो इसका इलाज भी संभव है। उन्होंने बताया कि ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन,ब्रेस्ट कैंसर के इलाज का ही हिस्सा है। जिस प्रकार कैंसर सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी व अन्य इलाज है ठीक उसी प्रकार ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन भी इलाज का ही एक हिस्सा है। यह समग्र इलाज के तहत आता है। यह जरूरी इसलिए भी है कि यह पुनर्वास का भी हिस्सा है। इलाज तभी पूरा माना जायेगा,जब ब्रेस्ट का रिकंस्ट्रक्शन भी किया जाये।
महिलाओं के इलाज में क्यों आती है दिक्कत, जानिये
एसजीपीजीआई स्थित प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रो. अंकुर भटनागर ने बताया कि महिलाओं में गर्भाशय और स्तन का कैंसर अधिक होता है, लेकिन आज भी उनके इलाज पर समाज और परिवार की तरफ से इतना ध्यान नहीं दिया जाता है,जबकि पुरूषों को बीमारी हो तो उनके इलाज पर हरकोई ध्यान देता है। उन्होंने उदाहरण देते हुये बताया कि पुरुषों में सबसे अधिक मुंह का कैंसर होता है। जब पुरुषों के इलाज की बात आती है तो सर्जरी से लेकर प्लास्टिक सर्जरी तक हर प्रकार का इलाज होता है, लेकिन वहीं जब महिलाओं की बात आती है कि प्लास्टिक सर्जरी कर नया ब्रेस्ट बनाया जाये तो उस पर ध्यान कम दिया जाता है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह जागरुकता की कमी है। हमें महिलाओं के बीच जागरुकता लानी है, जिससे बीमारी होने पर वह भी अपने इलाज को लेकर अपनी बात कह सकें।
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