दक्षिण एशिया बिरादरी के प्रतिभागियों को लुभा गया शहर, बोले- बोले स्वागत के लिए थैंक्स कानपुर
दक्षिण एशिया बिरादरी के प्रतिभागियों को लुभा गया शहर।
दक्षिण एशिया बिरादरी के प्रतिभागियों को शहर लुभा गया। प्रतिभागी बोले स्वागत के लिए थैंक्स कानपुर।
कानपुर, अमृत विचार। यह कानपुर और यहां के रहने वालों की खासियत है जो भी एक बार मिला उसी का हो गया। ऐसा ही नजारा दक्षिण एशिया बिरादरी के सम्मेलन में दिखायी दिया। दक्षिण एशिया बिरादरी के अध्यक्ष दिल्ली से आए डॉ.सत्यपॉल ने कहा कि कानपुर शहर उनके लिए नया नहीं है। इस शहर से उनका पुराना नाता है। पहले भी दक्षिण एशिया बिरादरी का एक सम्मेलन सीएसए में आयोजित किया गया था। यह शहर बहुत अच्छा है तभी तो बार-बार आने का जी करता है।
नेपाल से आए मदन भंडारी ने कहा कि करीब 17 साल पहले किन्हीं डाक्टर से वह मिलने कानपुर आए थे। एक ही दिन में वापस हो गए थे। दूसरी बार कानपुर आने पर शहर का मिजाज और यहां के लोगों को समझने का अवसर मिला।

मदन भंडारी
भंडारी का कहना है कि नेपाल-भारत के बीच मधुर संबंध हैं। पीएम नरेंद्र मोदी नेपाल आ चुके हैं। कानपुर और यहां के लोग बहुत अच्छे हैं। पूरा भारत ही भंडारी को लुभाता है फिर वह कहते हैं कि कानपुर भी तो भारत का ही हिस्सा है।
असम की पूजा डेका कहती हैं कि दक्षिण एशिया बिरादरी सम्मेलन में जाने का मौका मिलता है। पर जो बात कानपुर में दिखी वह कहीं नहीं दिखायी दी। पूजा कहती हैं कि यहां के लोग बहुत अच्छे हैं। शहर भी घूमने का अवसर मिला। थैंक्स कानपुर।

पूजा डेका
पुडुचेरी से आए श्री आधवन तो बात शुरू करते ही मारे खुशी के चिहुंक उठते हैं।

श्रीआध्वन
वह कहते हैं कि सम्मेलन की थीम अनेकता में एकता का बेहतर उदाहरण कानपुर है। उन्हें पता चला है इस शहर में सांस्कृतिक विविधता के दर्शन होते है। समय कैसे बीत गया पता ही नहीं चला। ओडिशा से आए हिमांशु शेखर परीड़ा सैंड आर्टिस्ट हैं।

हिमांशु शेखर परीड़ा
वह रेत पर दक्षिण एशिया बिरादरी का शुभंकर उकेरने के बाद बातचीत करते हुए कहा कि वह पहली बार आए हैं। उनकी कला के पारखी कानपुर में भी हैं, ऐसा आभास हो गया। मैं यहां आकर बहुत खुश हूं।
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