Uttarkashi tunnel rescue: मजदूरों के पास पहुंची जिंदगी की पाइपलाइन, टनल साइट से पहली एंबुलेंस निकली, 17 दिन बाद पूरा हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन

Uttarkashi tunnel rescue: मजदूरों के पास पहुंची जिंदगी की पाइपलाइन, टनल साइट से पहली एंबुलेंस निकली, 17 दिन बाद पूरा हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन

उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी में टनल में फंसे मजदूरों को बाहर निकाला जाना शुरू हो गया है। सुरंग में खुदाई पूरी हो गई है। 800 मिमी व्यास का पाइप भी डाला जा चुका है। जिसकी मदद से उन्हें बाहर निकाला जा रहा है। मजदूरों को एंबुलेंस में बैठाकर अस्पताल भेजने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। 

अब तक सुरंग से बाहर निकाले गए 9 मजदूर
उत्तरकाशी में सुरंग से मजदूरों को बाहर निकालने का सिलसिला लगातार जारी है। अब तक 9 मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया है। 

सुरंग से निकाले गए 5 मजदूर
41 मजदूरों को निकालने का काम शुरू हो गया है। 5 मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया है. बाकी के मजदूरों को भी एक-एक करके बाहर निकाला जा रहा है. सुरंग के अंदर NDRF की 3 टीमें मौजूद हैं। 

खुदाई का काम पूरा, अब बाहर निकलेंगे मजदूर, खुद मॉनीटर कर रहे CM धामी
सिलक्यारा टनल में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ी सफलता मिली है. पाइप पुशिंग का कार्य मलबे के आर-पार हो चुका है. अब श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

NDMA ने बताया कि 2 मीटर ड्रिलिंग अभी बाकी
NDMA के सदस्य, लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने कहा कि फंसे हुए श्रमिकों को बचाने के लिए उत्तरकाशी सुरंग ढहने वाली जगह पर 2 मीटर की ड्रिलिंग अभी भी बाकी है. हम 58 मीटर पर हैं, हम उम्मीद कर रहे हैं कि 2 मीटर के बाद, हम कह सकते हैं कि अब बाहर निकाल लिया जाएगा।

सुरंग से बाहर आए CM धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी टनल से बाहर आ गए हैं। वह कुछ देर पहले मेडिकल बैकअप का जायजा करने के लिए सुरंग के अंदर गए थे।

सीएम धामी ने किया ट्वीट
उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने ट्वीट कर जानकारी दी, 'सिलक्यारा टनल के अंदर ही अस्थाई मेडिकल कैंप लगाया गया है। फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने के बाद इसी जगह पर उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। स्वास्थ विभाग द्वारा बनाए गए अस्थाई मेडिकल कैंप में 8 बेड एवं डॉक्टरों तथा विशेषज्ञों की टीम तैनात हैं।

एनडीएमए के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने कहा, " चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी पर चिनूक हेलीकॉप्टर मौजूद है...चिनूक हेलीकॉप्टर के उड़ान भरने का आखिरी समय शाम 4:30 बजे है। हम इसे रात के वक्त नहीं उड़ाएंगे। देरी होने के कारण मजदूरों को अगली सुबह लाया जाएगा।... वहां पर जिला अस्पताल में 30 बेड की सुविधा तथा 10 बेड की सुविधा भी साइट पर तैयार है। चिनूक रात में उड़ान भर सकता है लेकिन मौसम इसके लिए अनुकूल नहीं है और ऐसी कोई तात्कालिकता नहीं है। यदि अत्यावश्यकता हो तो श्रमिकों को 1 या 2 एम्बुलेंस में ऋषिकेश लाया जा सकता है..." 

किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं- NDMA
एनडीएमए ने कहा, 'सभी सुरक्षा सावधानियां लागू की जाएंगी। समय से पहले कोई घोषणा नहीं की जानी चाहिए, यह सभी सिद्धांतों के खिलाफ होगा। हमें उन लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना है, जो श्रमिकों को बचा रहे हैं। हम किसी भी तरह की जल्दी में नहीं हैं।'

58 मीटर ड्रिलिंग पूरी, 2 मीटर बाकी
एनडीएमए के सदस्य अट्टा हसनैन ने बताया कि 58 मीटर की ड्रिलिंग हो चुकी है, लगभग 2 मीटर और खोदने की जरूरत है। साथ ही 45 मीटर वर्टिकल ड्रिलिंग पूरी कर ली है। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में NDRF की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण है। 

चिनूक हेलिकॉप्टर तैनात
उत्तरकाशी के चिनियालीसौड़ कस्बे में चिनूक हेलिकॉप्टर तैनात किए गए हैं। यह इस इमरजेंसी स्थिति के लिए है, कि अगर किसी मजदूर की तबीयत ज्यादा बिगड़ती है तो उन्हें जल्दी ही देहरादून और ऋषिकेश में बेहतर स्वास्थ्य व्यव्स्था के लिए ले जाया जा सके। 

इस पाइप से निकलेंगे मजदूर
सुरंग के भीतर से नई तस्वीर सामने आई है। इस में एक पाइप दिखाई दे रहा है। इसी पाइप के जरिए मजदूरों को बाहर लाया जाएगा।  

उत्तराखंड सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ड्रिलिंग पूरी हो गई है। संवाददाताओं के सवाल पर राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) के प्रबंध निदेशक महमूद अहमद ने तत्काल इस बारे में कोई पुष्टि नहीं की, लेकिन कहा कि बचाव पाइप के अंतिम हिस्से को ड्रिल किए गए रास्ते से डाला जा रहा है। सुरंग का एक हिस्सा 12 नवंबर को ढह गया था जिससे 41 मजदूर इसके अंदर फंस गए थे। 

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