बरेली: रामा पंसारी दुकान के मालिक व दो कर्मचारियों को जेल भेजा

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बरेली,अमृत विचार। प्रतिबंधित जड़ी-बूटी के साथ दुर्लभ वन्यजीवों के अंगों को बेचने और अंगों के बरामद होने के मामले में पकड़े गए श्यामगंज स्थित रामा पंसारी दुकान के मालिक श्याम अग्रवाल और उनके दो कर्मचारी विशाल गुप्ता व मनीष को मंगलवार की दोपहर वन विभाग ने कोर्ट में पेश किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने …

बरेली,अमृत विचार। प्रतिबंधित जड़ी-बूटी के साथ दुर्लभ वन्यजीवों के अंगों को बेचने और अंगों के बरामद होने के मामले में पकड़े गए श्यामगंज स्थित रामा पंसारी दुकान के मालिक श्याम अग्रवाल और उनके दो कर्मचारी विशाल गुप्ता व मनीष को मंगलवार की दोपहर वन विभाग ने कोर्ट में पेश किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने तीनों को जेल भेजने के आदेश दिए। इसके बाद उन्हें जिला जेल भेज दिया गया। कोर्ट में अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी।

दिल्ली से आई वाइल्ड लाइफ इंडिया की एंटी कोचिंग संस्था के अधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि रामा पंसारी दुकान के मालिक समेत दोनों नौकरों के खिलाफ वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम 1972 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। श्याम अग्रवाल और उनके दोनों कर्मचारियों ने जमानत कराने की पूरी कोशिश की लेकिन वाइल्ड लाइफ टीम और वन विभाग की ओर से पेश किए गए सबूतों के सामने उनकी दलील फेल हो गई। कोर्ट ने सुनवाई कर तीनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

वहीं, कोर्ट में पेश करने से पहले तीनों की जिला अस्पताल में कोविड जांच कराई गई। एंटीजेन टेस्ट में तीनों की रिपोर्ट निगेटिव आई। प्रभागीय वनाधिकारी बरेली भरत लाल ने बताया कि प्रकरण की जांच करने के लिए उप प्रभागीय अधिकारी को जांच अधिकारी नामित किया जाएगा।

बता दें कि सोमवार की शाम वन विभाग की टीम ने रामा पंसारी की दुकान में छापा मारकर तीन हत्था जोड़ी, पटरा गोह, 11 सियार सिंघी, कुटकी औषधीय पौधे की लकड़ी आदि प्रतिबंधित सामग्री बरामद की थी।

वन्यजीवों के अंगों के सप्लायर का नाम बताने को तीन बार बदले बयान
गिरफ्तारी के बाद रामा पंसारी दुकान के मालिक श्याम अग्रवाल ने वन विभाग के अधिकारियों को पहले अपने बयानों में उलझाया। तीन बार बयान बदले। श्याम अग्रवाल ने पहले दिल्ली से वन्यजीव अंगों को खरीदने की बात कही। बाद में दुकान में कुछ लोगों के आने और अंग बेचने की बात बताई। कुछ देर बाद हरिद्वार से अंग खरीदने की बात कही। इससे अधिकारी भी उलझ गए। एक भी बयान पर न टिके रहने से वन्यजीव अंग कहां से रामा पंसारी के यहां पहुंचे, इसके बारे में ठोस सबूत हाथ नहीं लगा।

अधिकारी बताते हैं कि आखिरी में हरिद्वार से अंग खरीदने की बात कही लेकिन उस पर यकीन नहीं किया जा सकता है। अधिकारी बयानों के तार जोड़ने के प्रयास में हैं। आशंका जताई जा री है कि वन्यजीव अंगों की तस्करी दिल्ली और उत्तराखंड हो सकती है। वन्यजीव अंगों की तस्करी दिल्ली में बड़े स्तर पर होती है। बरेली जनपद से उत्तराखंड की कई सीमाएं लगी हैं। तस्करी ऊधमसिंह नगर से भी की जा सकती है। इस बिंदु को अधिकारी नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं। सभी तारों को जोड़कर वन्यजीवों के अंगों के सप्लायर तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

मीरा की पेठ पर वन्यजीव अंगों की तस्करी की चर्चा
प्रतिबंधित वन्य जीवों के अंगों की तस्करी मीरा की पेठ में भी होने की चर्चा चल रही है। वन विभाग को सूचना मिली। टीम ने कई क्षेत्रों में तस्करों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया लेकिन हाथ कुछ भी नहीं लगा। डीएफओ भरत लाल ने बताया कि सूचना मिली कि 11 कछुओं की तस्करी होने वाली है। इसके लिए टीम ने जब अलग-अलग इलाकों में छापेमारी की थी।

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