लखनऊ : नर्सें झेल रही अव्यवस्था का दंश, नर्सिंग संवर्ग को नहीं मिल रहा प्रमोशन
लखनऊ, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश में चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग में तैनात नर्सों का प्रमोशन नहीं हो रहा है। जिसके काई कारण बताये जा रहा है,लेकिन इन सबके बीच जो सबसे बड़ी वजह निकलकर सामने आ रही है। वह अधिकारियों की अनदेखी बताई जा रही है। इसके अलावा 40 से अधिक जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज बना दिया गया है। जिससे इन मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के नर्सों के पद ही समाप्त होते जा रहे हैं। यह भी एक कारण है जिससे नर्सिंग संवर्ग के प्रमोशन पर असर पड़ रहा है। इस बात की जानकारी उत्तर प्रदेश राजकीय नर्सेज संघ के महामंत्री अशोक कुमार ने दी है।
नर्सिंग संवर्ग और मरीजों की समस्याओं को देखते हुये उत्तर प्रदेश राजकीय नर्सेज संघ के महामंत्री अशोक कुमार ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र लिखा है।
उत्तर प्रदेश राजकीय नर्सेज संघ के महामंत्री अशोक कुमार की तरफ से लिखे पत्र में कहा गया है कि सिस्टर से सहायक नर्सिंग अधीक्षक के मात्र 18 पदो पर पदोन्नति की गई,जबकि इससे कहीं ज्यादा पद रिक्त है। जिनकी संख्या लगभग 70 होगी। इसी तरह स्टाफ नर्स से सिस्टर के लगभग 1718 पद स्वीकृत है जबकि लगभग 200 पद रिक्त है। जिसके सापेक्ष मात्र 59 पदों पर पदोन्नति की गई, नर्सिंग सुपरीटेंडेंट व चीफ नर्सिंग सुपरीटेंडेंट के लगभग सभी पद खाली है। इसके अलावा उप नर्सिंग अधीक्षक के भी लगभग सभी पद रिक्त है।
पत्र में आगे लिखा गया है कि चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग की नर्सेज किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय,मेडिकल कॉलेज गोरखपुर, कानपुर, झांसी, आगरा, प्रयागराज, एवं मेरठ में पूर्व की भांति कार्यरत है। जहां पर सभी अपने-अपने कार्य एवं दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। जबकि जिला चिकित्सालय को उचीकृत कर मेडिकल कॉलेज बनाए जाने पर चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के नर्सिंग संवर्ग के पदों पर पदोन्नति नहीं की जा रही है। इस पर महामंत्री अशोक कुमार ने सवाल भी उठाया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि नये बने मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के नर्सिंग संवर्ग के उच्च पदों पर पदोन्नति के लगभग पद समाप्त होते जा रहे हैं या कम हो रहे हैं । इस पर उन्होंने महानिदेशक से अपील की है कि चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग में सभी उच्च रिक्त पदों को पदोन्नति कर तत्काल भरा जाए।
महामंत्री अशोक कुमार ने अमृत विचार के साथ हुई बातचीत में कहा है कि नर्सिंग संवर्ग के प्रमोशन न होने से जहां एक तरफ नर्सेज को आर्थिक और मानसिक परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं दूसरी तरफ इसका नुकसान मरीजों को भी हो रहा है। जिन जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज बनाया गया है। वहां पर जब पद ही समाप्त हो जायेंगे, तो मरीजों की देखभाल करने के लिए ठेके पर नर्सों को रखा जायेगा। जिससे इलाज की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा और इसका सीधा नुकसान मरीजों को भी उठाना पड़ेगा। शासन से लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस तरफ ध्यान ही नहीं दे रहे हैं।
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