'अस्थायी' शब्द का उल्लेख होने से अनुकंपा नियुक्ति की प्रकृति अस्थायी नहीं मानी जाएगी : हाईकोर्ट

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Edited By Amrit Vichar
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प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृतक आश्रित कोटे में होने वाली नियुक्ति के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गवर्नमेंट सर्वेंट डाईंग इन हार्नेस रूल्स, 1974 के तहत की गई नियुक्ति प्रकृति में स्थायी है। वैधानिक नियमों के अनुसार कहीं भी यह प्रावधान नहीं मिलता है कि अनुकंपा नियुक्ति प्रकृति में अस्थायी होती है। उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की एकलपीठ ने मैनपुरी निवासी मनोज कुमार की याचिका को स्वीकार करते हुए की। 

दरअसल याची के पिता की मृत्यु होने के बाद विभाग द्वारा एक अतिरिक्त पद सृजित किया गया, जिस पर याची की नियुक्ति की गई। 3 वर्षों तक कार्य करने के बाद याची की सेवाएं उत्तर प्रदेश अस्थायी सरकारी सेवक (सेवा समाप्ति) नियमावली, 1975 के तहत समाप्त कर दी गईं। इसी समाप्ति आदेश को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई। याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि याची की नियुक्ति अनुकंपा के आधार पर की गई थी, इसलिए इसे अस्थायी रोजगार नहीं माना जा सकता है। याचिका का विरोध करते हुए सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि याची के नियुक्ति पत्र में स्पष्ट रूप से यह लिखा था कि नियुक्ति प्रकृति में अस्थायी रहेगी और बिना किसी पूर्व सूचना के समाप्त की जा सकती है। इसी के साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि चूंकि याची का निधन हो गया है, इसलिए वर्तमान याचिका निरर्थक हो गई है। 

हालांकि कोर्ट को यह भी बताया गया कि 2001 में याचिका दाखिल की गई तो कोर्ट ने सेवा समाप्ति आदेश पर रोक लगा दिया था। उसकी मृत्यु के बाद उसकी पत्नी मंजूलता ने जब अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, तब रिट याचिका लंबित होने के कारण उसके आवेदन पर निर्णय नहीं लिया जा सका। अंत में कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि मृतक के नियुक्ति पत्र पर अस्थायी शब्द लिखा होने से नियुक्ति अस्थायी नहीं मानी जाएगी, क्योंकि 1974 के नियमों में अनुकंपा नियुक्ति प्रकृति में अस्थायी नहीं है। इसके अलावा कोर्ट ने इसी कोर्ट के पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए ऐसी नियुक्ति की प्रकृति स्थायी मानी और मृतक के परिवार की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए संबंधित अधिकारियों को अनुकंपा नियुक्ति के लिए मृतक की पत्नी के दावे पर शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

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