बिजली दरों में न हो सके 16 फीसदी की कमी, न्यायालय पहुंचा यूपीपीसीएल
लखनऊ, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश पॉवर कार्पोरेशन ने उपभोक्ताओं के बिजली दरों में 16 फीसदी की कमी नहीं हो सके, इसके लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। वहीं कार्पोरेशन के इस गतिविधि की जानकारी होने के बाद परिषद ने मुख्यमंत्री और ऊर्जामंत्री से गुहार लगाई है। बता दें कि जब उपभोक्ताओं को आयोग ने वर्ष …
लखनऊ, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश पॉवर कार्पोरेशन ने उपभोक्ताओं के बिजली दरों में 16 फीसदी की कमी नहीं हो सके, इसके लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। वहीं कार्पोरेशन के इस गतिविधि की जानकारी होने के बाद परिषद ने मुख्यमंत्री और ऊर्जामंत्री से गुहार लगाई है।
बता दें कि जब उपभोक्ताओं को आयोग ने वर्ष 2019 -20 मे फैसला सुनाया था। इस फैसले का फायदा प्रदेश के तीन लाख उपभोक्ताओं को 2020 और 21 मे मिलना था। लेकिन पॉवर कार्पोरेशन ऐसा नहीं होने देना चाह रहा है। बिजली दरों में कमी न हो सके, कार्पोरेशन ने अपटेल न्यायालय दिल्ली में याचिका दायर कर दी।
गौरतलब है कि पावर कार्पोरेशन और प्रदेश की बिजली कंपनियों द्वारा बिजली दरों में कमी किए जाने के प्रस्ताव पर जो जवाब विद्युत नियामक आयोग को भेजा गया है, उसमे कहा गया है है कि उपभोक्ताओं का जो पैसा बिजली कंपनियों पर 13,337 करोड़ निकाला है, जो अभी विचाराधीन है इसलिए अभी कोई कार्यवाही न की जाए।
बता दें कि उपभोक्ता परिषद् ने अपने जनता प्रस्ताव मे बिजली दरो में कमी का जो आधार बताया है जिसमे यह कहा गया था ‘वर्ष 2019 -20 के टैरिफ आर्डर में बिजली उपभोक्ताओं का उदय व ट्रूअप में वर्ष 2017-18 तक कुल लगभग रुपया 13,337 करोड़ बिजली कंपनियों पर निकल रहा है।
जो अब कैरिंग कॉस्ट 13 प्रतिशत जोड़ कर लगभग रुपया 14,782 करोड़ हो गया है। यदि आयोग पास आन करे तो लगभग 25 प्रतिशत बिजली दरों में कमी होगी। इसके साथ ही बिजली कंपनियों के 4500 करोड़ के गैप को घटा दिया जाए, फिर भी बिजली दरों में 16 प्रतिशत की कमी हो सकी है।
उपभोक्ता परिषद ने भी दाखिल की याचिका
पॉवर कार्पोरेशन के न्यायालय में जाने पर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने भी विद्युत नियामक आयोग में एक याचिका दाखिल कर दी है। इस याचिका में कहा गया है कि बिजली कंपनियों की दलील को खारिज किया जाए। इस पर तर्क दिया गया है कि सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के अनेकों ऐसे आदेश हैं जोक कि किसी सक्षम न्यायालय में केवल याचिका दाखिल कर देने से जब तक उस पर कोई आदेश या रोक न हो। कार्यवाही रोकी नहीं जा सकती। जनहित में उपभोक्ता परिषद आयोग से मांग करता है कि बिजली कम्पनियों द्वारा उपभोक्ता हित के खिलाफ गुमराह करने की जो साजिश की जा रही है उसे आयोग खारिज कर उपभोक्ताओ की बिजली दरों में 16 प्रतिशत की कमी करे।
