मुरादाबाद : हमारी भी सुने सरकार, बुढ़ापे को बोझ बनने से बचाया जाए
पीड़ा : कई तरह की चुनौतियों से जूझ रहे वरिष्ठ नागरिक, परिवारों का भी बदल रहा बुजुर्गों के प्रति व्यवहार
मुरादाबाद, अमृत विचार। सरकार ही सबके विषय में सोच सकती है। बदलते दौर में कई सामाजिक थपेड़े अधिक उम्र झेल रही है। परिवारों के व्यवहार बदल रहे हैं। कुछ सालों तक रेलवे में वरिष्ठ नागरिक (सीनियर सिटीजन) के नाम से कुछ सुविधाएं मिलती थीं, वह अब बंद हो गयीं हैं। अधिक उम्र के वाहन, अधिक उम्र में बीमा न होने के नियम और सामाजिक सुरक्षा के घटते दायरे से अधिक उम्र के लोगों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। दैनिक अमृत विचार ने बदलते परिवेश में वरिष्ठ नागरिकों की सामाजिक स्थिति और सरकार के बदलते व्यवहार को केंद्रित कर विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से बातचीत की।
सरकार वरिष्ठ नागरिकों के प्रति असंवेदनशील
रेलवे के सेवानिवृत अधिकारी महेंद्र प्रताप चौबे कहते हैं कि सरकार वरिष्ठ नागरिकों के प्रति असंवेदनशील है। जिससे लोगों में गुस्सा भी है। कहते हैं हम नार्दन रेलवे मेंस यूनियन के केंद्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। हमारी संगठन की बैठकों में इस बात की हर बार चर्चा होती है कि सरकार सभी के हित की बात तो करती है, लेकिन अधिक उम्र के लोगों से हाथ खींचती जा रही है। कोरोना काल में रेलवे में वरिष्ठ नागरिकों को टिकट के लिए प्राथमिकता मिलनी बंद हुई, उसके बाद से शुरू नहीं हुई।
सामाजिक सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश रोडवेज इम्पलाइज यूनियन के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष और सेवानिवृत राज्यकर्मी जगवीर सिंह यादव कहते हैं कि यह बड़ी उपेक्षा है। 60 साल के बाद आदमी की जिंदगी में और असुरक्षा बढ़ जाती है। परिवार ने अगर साथ नहीं दिया तो जिंदगी खराब हो जा रही है। अधिक उम्र के लोगों को तो सरकार को और सुरक्षा देनी चाहिए। मेरा आरोप है कि सरकार सभी के साथ और विकास का ऐलान तो कर रही है लेकिन, कई जगह चूक भी जा रही है। ताजा उदाहरण अधिक उम्र के लोग ही हैं।
अधिक उम्र में नहीं दिया जा रहा बीमा का लाभ
खेती-किसानी करने वालों के लिए लंबे समय से संघर्ष करने वाले 68 वर्षीय का. कासिम अली कहते हैं कि सरकारों को केवल अपनी सूझती है। सच तो यह है कि अधिक उम्र का आदमी कतिपय लोगों और परिवारों को बोझ लगने लगता है। अनाथालय और वृद्धाश्रम इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। ऐसे में सरकार अगर चिंता नहीं करेगी तो कौन करेगा? अधिक उम्र में बीमा का लाभ नहीं दिया जाता है। सरकार को इस विषय पर गंभीरता से सोचना चाहिए। इस तरह की सुरक्षा सरकार की ही जिम्मेदारी होनी चाहिए।
बुजुर्गों के कल्याण की योजनाएं चलाए सरकार
कटघर क्षेत्र के इंद्रा कालोनी की कामकाजी उर्मिला कहती हैं कि उम्र अधिक होने के साथ शरीर की दिक्कतें भी बढ़ती जातीं हैं। सरकार में कामकाजी लोगों की परेशानी अधिक है। कम पढ़े लिखे और निरक्षरों का तो जीना ही दुश्वार हो जा रहा है। सरकार को चाहिए कि जिस तरह युवा और अन्य वर्ग के जीवन के लिए सोच रही है, उसी तरह से अधिक उम्र वालों को अधिक से अधिक सुविधा दे। सरकार से मांग है कि अधिक उम्र के लोगों के लिए योजनाएं चलाए।
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