बाराबंकी: आलू किसानों को इस बार भी मंदी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं, कमजोर दिख रही फसल, बाजार भाव भी गिर रहा
देवा, बाराबंकी। बीते वर्ष मंदी से परेशान आलू के किसानों को इस वर्ष भी राहत के आसार नहीं दिख रहे। आलू की फसल के मुताबिक तापमान अधिक होने से जहां फसल कमजोर दिख रही है तो वहीं आलू में झुलसा रोग ने भी दस्तक दे दी है। जिससे किसानों की मुसीबत और बढ़ गई है। झुलसा रोग से बचाव के लिए किसान दवाओं का छिड़काव करने में जुटा हुआ है किसानो की माने तो यदि रोग तेजी से बढ़ा तो पूरी फसल चौपट हो जायेगी।

जनपद बाराबंकी का देवा व फतेहपुर क्षेत्र पोटैटो बेल्ट के रूप में जाना जाता है यहां पर राजेंद्र वन (लाल ) किस्म के आलू की खेती प्रमुख रूप से की जाती है। पिछले वर्ष आलू काफी सस्ता बिका था जिसके चलते किसान अभी भी कर्ज में डूबा हुआ है । इस बार भी आलू की फसल काफी कमजोर चल रही थी अब आलू की फसल में झुलसा रोग ने अपनी दस्तक दे दी है जानकारों की माने तो आलू की फसल के लिए तापमान 15 डिग्री से नीचे काफी मुफीद रहता है।
लेकिन इस बार तापमान इससे ज्यादा चल रहा है ।तापमान कम होने पर पौधे की लम्बाई कम होगी और कंद का आकर बढ़ेगा। विकासखंड देवा के पौध रक्षा अधिकारी सत्य प्रकाश प्रभात बताते हैं कि फसल के लिए मौसम अनुकूल और प्रतिकूल तो लगा ही रहता है इसमें किसानों को आलू में इंट्राकॉल दवा 500 एम एल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। जिससे पौध का तना और कंद दोनों मजबूत होंगे। किसानों को जैविक खाद के उपयोग को प्राथमिकता देनी होगी और रासायनिक खादो के उपयोग से बचना होगा।
उन्होंने बताया कि आलू में झुलसा रोग के लक्षण दिखाई देने पर इंडोफिल एम 45 का छिड़काव करना चाहिये जो झुलसा रोग में काफी उपयोगी है देवा क्षेत्र के छोटी छेरिया निवासी शिवराज बहादुर बताते है कि तीन हेक्टेयर में राजेंद्र वन किस्म के लाल आलू की बुवाई की है शुरुआत में गर्मी के चलते पौध का विकास धीमी गति से हो रहा था।
झुलसा रोग से बचाव के लिए नियमित दवाओ का छिड़काव कर रहा हूं क्षेत्र के सलारपुर गांव निवासी नीरज कुमार सिंह बताते है कि बेलहरा क्षेत्र में 2 हेक्टेयर में आलू की बुवाई की आलू की फसल ठीक चल रही है दावों का नियमित छिड़काव भी कर रहे हैं लेकिन एक आद पौधों में झूलसे का प्रकोप दिख रहा है l
इस वर्ष तापमान ज्यादा होने के चलते आलू की फसल काफी कमजोर दिख रही थी लेकिन अब जहां तापमान फसल के अनुकूल होने लगा है तो झुलसा रोग लगने से फसलों को काफी नुकसान होने की आशंका है यदि फसल झुलसा रोग की चपेट में आ गई तो आलू का आकार काफी छोटा होगा जिससे नुकसान होने की संभावना ज्यादा है
दीपक सिंह, आलू व्यवसायी, देवा, बाराबंकी
पिछले वर्ष किसान व ब्यापारी दोनों काफी घाटे में रहे जिससे चलते इस बार कुछ किसानों ने आलू की खेती से मुंह मोड़ लिया है जिसके चलते आलू का रकबा कम हुआ है इस बार किसानों को अच्छे दाम मिलने की उम्मीद तो लग रही है इसलिए किसानों को झुलसा रोग से अपनी फसल को बचाने के लिए नियमित दवाओ का छिड़काव करना जरुरी है जब फसल बचेगी तभी तो दाम मिलेंगे l
कल्याण मौर्या, आलू व्यवसायी
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