बांदा: भागवत प्रसाद मेमोरियल स्कूल में दो दिवसीय राज्य स्तरीय आर्ट गैलरी का हुआ आयोजन

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बुंदेलखंड की लुप्त हो रही कला को आगे ले जाने की कवायद

बांदा, अमृत विचार। केदारनाथ न्यास समिति और भगवत प्रसाद मेमोरियल एकेडमी द्वारा महादेवी कुशवाहा की याद में बुंदेलखंड में पहली बार भागवत प्रसाद मेमोरियल एकेडमी स्कूल में दो दिवसीय राज्य स्तरीय आर्ट गैलरी का आयोजन किया गया। इसमें दिल्ली, मध्य प्रदेश के भोपाल और बिहार के पटना से कई बड़े कलाकार, चित्रकार व शिल्पकारों ने प्रतिभाग किया। इन सभी ने बच्चों को बुंदेलखंड की लुप्त हो रही कला को कैसे आगे ले जाया जाए प्रशिक्षण देकर तरीके से बच्चों को जानकारी दी। 

आर्ट प्रदर्शनी में कई विद्यालयों के बच्चों ने पेंटिंग कला में भाग लिया। बच्चों ने नन्हीं तूलिकाओं से तरह-तरह के रंगों का उपयोग कर खूबसुरत चित्र उकेरते हुए अपनी भीतर छिपी कला प्रतिभा को उजागर किया। दिल्ली, बिहार और मध्य प्रदेश से आये नामीगिरामी कलाकार, चित्रककार और शिल्पकार अखिलेश, निशि शर्मा, प्रियांका सिन्हा, सीरज सक्सेना, रफीक शाह और प्रतीक्षा ने अपने बेशुमार, सुन्दर और कीमती खुद की बनाई पेंटिंग का अवलोकन कराया। दो दिवसीय प्रदर्शनी के पहले दिन ललित कला केंद्र में भागवत प्रसाद मेमोरियल एकेडमी के मैनेजिंग डायरेक्टर अंकित कुशवाहा ने बताया कि बुंदेलखंड की कला लुप्त होती जा रही है, इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा था।

बुंदेलखंड के विकास और बच्चों के भविष्य व इनके स्मरण शक्ति के लिए ऐसे कार्यक्रम आगे भी आयोजित होते रहेंगे। आर्ट प्रदर्शनी के इस कार्यक्रम में आर्यावर्त के रीजनल मैनेजर मनोज गुप्ता का भरपूर सहयोग रहा। ग्रामोदय विश्वविद्यालय के जयशंकर मिश्रा, रामलखन कुशवाहा, प्रिंसपल वृंदा विजया, राजेंद्र सिंह, संध्या कुशवाहा, चेयरमेन शिवशरण कुशवाहा और विद्यालय की संस्थापक शिवकन्या कुशवाहा ने कार्यक्रम की अनुशासित व्यवस्था में अहम भूमिका निभाई।

कई राज्यों से आये प्रसिद्ध आर्ट कलाकारों ने भागवत प्रसाद मेमोरियल विद्यालय के छात्र छात्राओं की सराहना की। प्रदर्शनी में आये बच्चों के कलर आर्ट की पेंटिंग को तहे दिल से सराहा। विद्यालय के प्रबंधक, आयोजक और पूरे स्टाफ की मेहनत से इस दो दिवसीय प्रदर्शनी से देश और राज्य के विकसित होने के साथ-साथ मानव जीवन के मानसिक, आर्थिक और सामाजिक विकास मे सहायक होगी ।

बेहतर कला प्रदर्शनी में उपजता एक केंद्रीय विचार
दिल्ली, बिहार और मध्य प्रदेश से आये नामी गिरामी कलाकारों अखिलेश, निशि शर्मा, प्रियांका सिन्हा, अखिलेश, सीरज सक्सेना और प्रतीक्षा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बोध कराया कि कलाकार तेजी से खुद का प्रतिनिधित्व करने के लिए आर्ट का चुनाव करता है और कला दीर्घाओं द्वारा प्रतिनिधित्व मांगने के बजाय व्यक्तियों के रूप में अपने काम को बेचते हैं। एक अच्छी कला प्रदर्शनी में एक केंद्रीय विचार होता है, जो विभिन्न टुकड़ों को एक साथ जोड़ता है और उन्हें एक बड़े संपूर्ण का हिस्सा जैसा महसूस कराता है।

यह भी पढ़ें:-सुलतानपुर: थाने पहुंचा दियरा राज परिवार में कब्जेदारी का विवाद, एक दूसरे पर लगाया मारपीट का आरोप

संबंधित समाचार