Fatehpur: बंगाल में तहलका मचा रहा दोआबा का शिमला मिर्च, किसानों को मालामाल कर रही खेती, कम आय में मिल रहा अधिक मुनाफा

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बंगाल में तहलका मचा रहा दोआबा का शिमला मिर्च।

बंगाल में तहलका मचा रहा फतेहपुर का दोआबा का शिमला मिर्च। कम आय में अधिक मुनाफा से आकर्षित हो रहे क्षेत्र के अन्य किसान।

फतेहपुर, अमृत विचार। पारम्परिक खेती को छोड़ क्षेत्र के किसान शिमला मिर्च की खेती में भाग्य अजमा रहे हैं। कम लागत में अच्छा मुनाफा देने वाली सब्जियों की खेती कर कृषि को फायदे का सौदा बना लिया है। इन फसलों से क्षेत्र के अन्य किसानों को भी प्रेरणा मिल रही है। 

मलवां विकास खंड के जलाला, मवईया, शाहजहांपुर, पहुर के कुछ किसान शिमला मिर्च का उत्पादन कर अच्छी आमदनी कर रहे हैं। किसान शिमला मिर्च की अपनी फसल को बिंदकी सहित कानपुर, प्रयागराज मंडी ले जाते हैं और वहां से शिमला मिर्च अन्य राज्यों में भी भेजी जाती है।

उत्कर्ष फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (एफपीओ) के सीईओ हरीकृष्ण अवस्थी ने बताया कि क्षेत्र में सब्जियों के उत्पादन के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। हरी पत्तेदार सब्जियों की खेती भी किसान कर रहे हैं। शिमला मिर्च की मांग भी है और बाजार भी उपलब्ध है, इसलिए किसानों का इस ओर रुझान भी बढ़ रहा है। 

फास्ट फूड ने बढ़ाई मांग

शिमला मिर्च एक ऐसी सब्जी है। जिसका प्रयोग आज के समय में फास्ट फूड में अधिक हो रहा है। यहां के किसानों ने शिमला मिर्च की बढ़ती मांग को देखकर इसका उत्पादन शुरू किया और आज शिमला मिर्च को न केवल आसपास बल्कि बंगाल सहित अन्य राज्यों में भी भेजा जा रहा है। शिमला मिर्च का उत्पादन करने वाले किसान अब इस फसल से मुनाफा कमा कर दूसरे किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं। 

दो से ढाई माह में ही तैयार होती फसल

कुछ समय पूर्व तक यहां के किसान फूल गोभी, बंद गोभी, बैगन, लौकी, खीरा, भिंडी, टमाटर, मटर आदि सब्जियों का उत्पादन करते थे। जिसका अधिक उत्पादन होने के कारण किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। कुछ किसानों ने शिमला मिर्च का उत्पादन शुरू किया और इसकी फसल को अन्य राज्यों में भेजकर इस फसल को फायदे का सौदा बनाया। शिमला मिर्च की फसल तैयार होने में दो से ढाई महीने का समय लगता है और उत्पादन भी अच्छा होता है। इससे प्रेरित होकर आधा दर्जन गांवों में किसानों ने इसकी पैदावार शुरू कर दी है।

कम लागत में मुनाफा अधिक

किसान बताते हैं कि एक एकड़ में लगभग 40 हजार रुपये की लागत आती है। फसल तैयार होने के बाद एक एकड़ में करीब 1.20 लाख रुपये खड़े होते हैं। ऐसे में 40 हजार रुपये लागत निकालने के बाद करीब 80 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा होता है। जो पारम्परिक खेती धान-गेहूं से नहीं पाया जा सकता है। वहीं करीब तीन माह में ही खेत खाली हो जाता है। 

ये भी पढ़ें- IGRS की रैकिंग में बांदा को प्रदेश स्तर पर मिला प्रथम स्थान, टोटल इतने मिले अंक

संबंधित समाचार