खास खबर: 'नाइपर' बनने से रायबरेली की बढ़ेगी शान, फार्मा उद्योग में आएगी रफ्तार
रायबरेली। कोरोनाकाल के बाद से देश में फार्मास्युटिकल उद्योग को बढ़ावा देने के साथ नए अनवेषण किए जा रहे हैं। इसी के चलते रायबरेली में प्रस्तावित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नाइपर) के बनने का रास्ता साफ हो गया है। यूपीए सरकार के दौरान यह सांसद सोनिया गांधी का ड्रीम प्रोजेक्ट था लेकिन सरकार जाने के बाद नाइपर को भुला दिया और उसे लखनऊ के सरोजनीनगर में शिफ्ट कर दिया गया।
अब सरकार ने रायबरेली के नाइपर को विकसित करने के साथ उसे स्थान देना का फैसला किया है। जिसके चलते महराजगंज तहसील के सेंहगो (विनायकपुर) में 100 एकड़ में नाइपर बनेगा। इसके लिए 100 किसानों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी। अभी तक 55 किसानों की जमीन को अधिग्रहित किया जा चुका है। सन 2025 में नाइपर का भवन बनकर तैयार हो जाएगा उसके बाद उसे लखनऊ से रायबरेली शिफ्ट कर दिया जाएगा।
केंद्रीय उर्वरक व रसायन मंत्रालय द्वारा रायबरेली में स्थापित होने वाले नाइपर को लेकर वर्ष 2012 में दिशा निर्देश दिए गए थे। सांसद सोनिया गांधी के लिए उनका यह ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है। उस दौरान इसे बछरावां में स्थापित करने की योजना बनी थी लेकिन जमीन के चिन्हांकन में समय लग गया और इसी बीच वर्ष 2014 में केंद्र की यूपीएस सरकार दिल्ली की सत्ता से बाहर हो गई जिसके चलते नाइपर रायबरेली के लिए सपना बनकर रह गया।
अब नाइपर की आधारशिला रखी जा चुकी थी और यूपीए सरकार ने इस पर फाइल आगे बढ़ा दी थी तो वर्ष 2020 में कोरोकाल के दौरान रायबरेली के नाम का नाइपर लखनऊ के सरोजनीनगर में एक इंजीनियरिंग कॉलेज में स्थापित कर दिया गया। खास बात यह है कि कोरोनाकाल ही नाइपर के लिए वरदान बन गया।
रायबरेली के जिस नाइपर का भवन कागज पर कहीं दबा पड़ा था वह बाहर आ गया और केंद्रीय उर्वरक व रसायन मंत्रालय ने नाइपर को रायबरेली स्थापित करने की निर्णय लिया। इसके बाद रायबरेली में नाइपर के भवन के निर्माण को लेकर प्रक्रिया शुरू हुई।
कोरोना के चलते शुरूआत में रफ्तार धीमी रही लेकिन वर्ष 2021 में महराजगंज के सेंगहो के पास भवन निर्माण के लिए जमीन चिन्हांकन की प्रक्रिया शुरू की गई। तय किया गया कि 100 एकड़ में नाइपर बनकर तैयार होगा। जिसके तहत पहले चरण में 49 एकड़ जमीन को चिन्हित किया गया लेकिन फिर 52 एकड़ जमीन के चिन्हांकन को लेकर महराजगंज तहसील प्रशासन को खासा पसीना बहाना पड़ा। यह जमीन किसानों से अधिग्रहित की जानी थी।
इसमें करीब 2 साल का समय लगा और फिर जाकर 52 एकड़ जमीन के अधिग्रहण का रास्ता साफ हुआ। करीब 100 किसानों से 52 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। इसमें 55 किसानों की जमीन अधिग्रहित हो चुकी है अन्य की जमीन के अधिग्रहित करने का काम चल रहा है।
नई दवाओं की होगी खोज
नाइपर के भवन निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। मंत्रालय द्वारा इसे 2025 तक हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि रायबरेली के नाम से लखनऊ के सरोजनी नगर में संस्था चल रही है जिसमें पिछले वर्ष 108 विद्यार्थियों ने नाइपर जेई की परीक्षा पास की थी। नाइपर विशेष अनुसंधान के लिए 5 अलग-अलग कोर्स कराता है।
सेंट्रल पवार संस्था भवन निर्माण की कार्यदाई संस्था है। नाइपर में नई दवाओं पर खोज की जाएगी। साथ ही सरकार की मंशा के अनुरूप जन औषधि की दवा भी बनाई जाएंगी। इसमें छात्र-छात्रा औषधि रसायन विज्ञान, औषधीय विज्ञान , औषधि विज्ञान और विष विज्ञान एवं नियामक विष विज्ञान एमएस (फार्मा) के साथ पीएचडी करेंगे।
कश्मीर से लेकर बिहार तक के फार्मा स्टूडेंटों की खुलेगी राह
रायबरेली में नाइपर खुलने से कश्मीर से लेकर यूपी तक के फार्मा स्टूडेंट के भविष्य की राह खुल जाएगी। देश में रायबरेली के अतिरिक्त अहमदाबाद, हैदराबाद, कोलकाता, हाजीपुर, गुवाहाटी में नाइपर खुले हैं। रायबरेली का नाइपर सातवें स्थान पर होगा। इस खुल जाने से यूपी के साथ जम्मू, हिमांचल, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश तक के फार्मा स्टूडेंट के साथ फार्मास्युटिकल उद्योग को नई दिशा मिलेगी। वहीं रायबरेली के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।
एनटीपीसी, एम्स, रेल कोच फैक्ट्री के बाद नाइपर खुलने से रायबरेली की देश में अलग पहचान स्थापित होगी। रायबरेली हमेशा से राजनीति के गढ़ रहा है। ऐसे में चाहे कांग्रेस हो या भाजपा यहां पर योजनाओं को लाने में पहले फोकस करती है। सांसद सोनिया गांधी नाइपर को लेकर आईं लेकिन कई साल तक नाइपर जमीन के चिन्हांकन के पेंच में फंसा रहा लेकिन प्रदेश सरकार ने इस पर कदम उठाए और उसका नतीजा यह रहा कि नाइपर के रायबरेली में रास्ता साफ हो गया।
सेंहगो (विनायकपुर) में नाइपर की भवन निर्माण किया जाएगा। इसके लिए 52 एकड़ जमीन की जरूरत और थी जिसे पूरा करा दिया गया है। किसानों की सहमति से 46 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। वहीं 6 एकड़ जमीन राजस्व की है। अब तक 55 किसानों का जमीन अधिग्रहित हो चुकी है तथा सर्किल रेट के मुताबिक अधिग्रहित जमीन का भुगतान किया जा रहा है। नाइपर प्रशासन ने जिस तरह जमीन की मांग की थी उसे उपलब्ध करा दिया गया है।
राजित राम, एसडीएम, महराजगंज, रायबरेली
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