एसजीपीजीआई 2023 : उपलब्धियों भरा रहा साल, लेकिन इन अव्यवस्थाओं ने उठाये सवाल
लखनऊ, अमृत विचार। राजधानी ही नहीं पूरे भारत में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान की अपनी अलग पहचान है। शोध,शिक्षण और इलाज के लिए एसजीपीजीआई ने जो मानक तय किये वह चिकित्सा क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। आपातकालीन चिकित्सा और गुर्दा प्रत्यारोपण केंद्र, संस्थान में भर्ती और शुरू हुये नये कोर्स से बहुत से लोगों को लाभ मिल रहा है, वहीं आने वाले समय में एडवांस डायबिटिक सेंटर, एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर और टेली-आईसीयू परियोजना प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का काम करेगा, लेकिन इन सबके बीच ओटी में लगी आग से बच्ची समेत दो लोगों की मौत, इमरजेंसी में भर्ती न मिलने से पूर्व भाजपा सांसद के बेटे की मौत और संस्थान में फिजियोथेरेपिस्ट की भर्ती पर कर्मचारी संगठन की तरफ से हुई शिकायत ढेरों व्यवस्थाओं पर अव्यवस्था के सवाल भी उठा रही है।
एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो.आरके धीमन की कोशिशे रंग ला रही हैं। उन्होंने कहा है कि जब से मैं संस्थान परिवार में शामिल हुआ हूं, हमारा मकसद स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को इस हद तक बेहतर बनाना है कि किसी भी मरीज को इलाज के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़े। इसके लिए हमारे संस्थान के पास बेहतर जनशक्ति के साथ गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचा जरूरी है।
साल 2023 में एसजीपीजीआई प्रशासन ने मरीज हित में कई सुविधायें जोड़ी हैं। जिसमें आपातकालीन चिकित्सा और गुर्दा प्रत्यारोपण केंद्र (ईएमआरटीसी) प्रमुख है। इसमें आपातकालीन मेडिसिन, नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी विभाग इस केंद्र का प्रमुख हिस्सा हैं। मौजूदा समय में यहां पर आपातकालीन सेवाएं, डायलिसिस और गुर्दे का प्रत्यारोपण शामिल हैं। ईएमआरटीसी के यूरोलॉजी विभाग में 117 सामान्य बेड और 33 किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट बेड और 6 ऑपरेशन थिएटर हैं। नेफ्रोलॉजी विभाग में 97 सामान्य बेड, 111 डायलिसिस स्टेशन और 11 आईसीयू बेड्स हैं। नेफ्रोलॉजी विभाग 'इंटरवेंशनल नेफ्रोलॉजी' सेवाएं प्रदान करने वाला देश में पहला विभाग है और इंटरवेंशनल नेफ्रोलॉजी में पोस्ट-डॉक्टरल फैलोशिप भी प्रदान कर रहा है। इसकी क्षमता प्रति सप्ताह 10-20 किडनी प्रत्यारोपण करने की है। आपातकालीन चिकित्सा में 90 बिस्तर क्रियाशील हैं और जल्द ही इसे 210 बिस्तरों तक बढ़ाया जाएगा। क्रिटिकल केयर मेडिसिन और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में बेड की संख्या बढ़ाई जा रही है। सर्जिकल एंडोक्रिनोलॉजी विभाग में बिस्तरों की संख्या 30 से बढ़ाकर 60 कर दी गई है।
एसजीपीजीआई में लंबे समय बाद हुई भर्ती
एसजीपीजीआई में गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की भर्ती लंबे समय के बाद की गई है और इसमें कार्यकारी रजिस्ट्रार, प्रिंसिपल, नर्सिंग कॉलेज के लेक्चरार, ट्यूटर, मेडिकल सोशल सर्विस ऑफिसर, स्टेनोग्राफर, मेडिकल फिजिसिस्ट, नर्सिंग ऑफिसर, तकनीशियन, परफ्यूजनिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, ओटी असिस्टेंट वरिष्ठ प्रशासनिक सहायक, रिसेप्शनिस्ट आदि शामिल हैं । 1849 रिक्तियों का विज्ञापन दिया गया था और भर्ती की प्रक्रिया पूरी हो गई है।
नए पाठ्यक्रम
1-कॉलेज ऑफ मेडिकल टेक्नोलॉजी एसजीपीजीआई द्वारा "न्यूक्लियर मेडिसिन" में एमएससी
2- पैथोलॉजी विभाग में "हेपेटिक पैथोलॉजी" में पीडीसीसी
3- एनेस्थीसिया विभाग में "ऑर्गन ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया एंड क्रिटिकल केयर" में डीएम और "पेन मेडिसिन" में डीएम
4- सीसीएम विभाग में "पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर मेडिसिन" में पीडीसीसी
5- नेफ्रोलॉजी विभाग में "रीनल न्यूट्रीशन में एडवांस सर्टीफिकेट कोर्स"
6- मेडिकल टेक्नोलॉजी कॉलेज के तहत "डिप्लोमा इन डायलिसिस थेरेपी टेक्नोलॉजी (डीडीटीटी)"
7- ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन में "मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी" में स्नातक कोर्स
8- एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में "ट्रॉमा एनेस्थीसिया और इन्टेनसिव केयर" में पीडीसीसी
एडवांस डायबिटिक और एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर होगा शुरू
एक ही छत के नीचे मधुमेह से पीड़ित मरीजों को इलाज मिले इसके लिए एडवांस डायबिटिक सेंटर की शुरूआत साल 2024 में होनी हैं। वहीं नवजात से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चे और किशोरों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा देने के लिए पीडियाट्रिक सेंटर शुरू किया जाना है। साल 2024 वित्तीय वर्ष में एसजीपीजीआई में मेडिकल और सर्जिकल बाल चिकित्सा सुपर-स्पेशलिटी के साथ 22 विभागों और 4 इकाइयों से युक्त 573 बिस्तरों वाला 'उन्नत बाल चिकित्सा केंद्र' शुरू होने की संभावना है। इसके अलावा एसजीपीजीआई, सलोनी हार्ट फाउंडेशन, यूएसए के सहयोग से जन्मजात हृदय रोग (सीएचडी) के साथ पैदा हुए बच्चों को सर्वोत्तम हृदय स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने के लिए एक विश्व स्तरीय उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) का निर्माण करेगा। इस सेंटर को बनाने में सलोनी हार्ट फाउंडेशन, यूएसए 60 मिलियन डॉलर (500 करोड़ रुपये) खर्च करेगा। यह हर साल 5000 congenital heart disease से ग्रस्त बच्चों का शल्य चिकित्सा उपचार करेगा और 10,000 बच्चों का चिकित्सकीय प्रबंधन करेगा। इस केंद्र का प्रथम चरण पहले ही शुरू हो चुका है।
चार नए विभाग होंगे शुरू
1. मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग
2. संक्रामक रोग विभाग
3. हेड एन्ड नैक सर्जरी विभाग
4. पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजी विभाग
पूर्व सांसद के बेटे की मौत
साल 2023 के अक्टूबर में पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा के बेटे प्रकाश मिश्रा (40) की मौत हो गई थी। आरोप था कि पूर्व सांसद के बेटे को एसजीपीजीआई की इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सक ने भर्ती करने से मना कर दिया था। इतना ही नहीं डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आदेश की भी अनदेखी की गई थी। जिस पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने ट्वीट कर कहा था कि पीजीआई, लखनऊ में पूर्व सांसद मा० भैरों प्रसाद मिश्र जी के सुपुत्र के दु:खद निधन के संबंध में @upgovt ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। प्रथम दृष्टया जांच में दोषी पाए गए संबंधित चिकित्सक को संस्थान से कार्य मुक्त किया जा रहा है। भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति ना हो इस संबंध में निदेशक, पीजीआई को चेतावनी भी दी गई है।
फिजियोथेरेपिस्ट के भर्ती का हुआ विरोध
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद और प्रोवेंशियल फिजियोथेरेपिस्ट एसोसियेशन ने एसजीपीजीआई में फिजियोथेरेपिस्ट के पद पर साल 2023 में जारी हुये परिणाम और चयन प्रक्रिया को गलत ठहराते हुये न्यायालय जाने की बात कही थी। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की तरफ से कहा गया था कि इस मामले में एसजीपीजीआई प्रशासन ने नियमों का खुला उल्लंघन किया है। आरोप तो यहां तक लगे थे कि शासन के निर्देश का भी एसजीपीजीआई प्रशासन अनदेखी कर रहा है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने एसजीपीजीआई में फिजियोथेरेपिस्ट के पद पर सेवा नियमावली के विपरीत नियुक्ति के लिए परास्नातक अर्हता निर्धारित कर गलत तरीके से चयन करने प्रक्रिया करने का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं अभ्यर्थियों का शासन के निर्णय के विपरीत वेरिफिकेशन कराने पर रोष व्यक्त किया था।
ओटी में लगी आग से बच्ची समेत दो लोगों की मौत
साल 2023 के दिसंबर महीने में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के OT 1 में अपराह्न 12.40 पर monitor में spark होने के कारण आग लग गई थी। आग पहले work station पर और फिर OT मे फैल गयी थी। जिसकी वजह से एक 30 दिन के बच्चे और 24 वर्षीय युवती की जान चली गई थी। जिसके बाद से कई सवाल उठने लगे और प्रदेश के सभी अस्पतालों में फायर सेफ्टी की जांच होने लगी।
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