लखीमपुर खीरी: हिस्ट्रीशीटर और पुलिस गठजोड़ को दबा रहे अफसर, क्षेत्र में खुलेआम घूम रहा था हिस्ट्रीशीटर

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Edited By Amrit Vichar
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लखीमपुर खीरी, अमृत विचार। पुलिस की पिटाई करने वाले हिस्ट्रीशीटर और स्थानीय पुलिस के बीच गठजोड़ सामने आने के बाद भी पुलिस अफसर जिम्मेदार पुलिस कर्मियो को बचाने के लिए मामले पर पर्दा डालने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

यही वजह है कि एक हफ्ते बीतने के बाद भी संरक्षण देने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कारवाई तो दूर जांच तक शुरू नहीं हो सकी है। कोतवाली तिकुनियां के गांव तकिया पुरवा निवासी सोनू शातिर अपराधी है। उस पर गैंगस्टर समेत छह से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं। शातिर अपराधी होने के कारण उसकी क्षेत्र में दहशत भी है।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि वह जिला बदर अपराधी है। आठ महीने पहले डीएम महेंद्र बहादुर सिंह ने उसे जिला बदर किया था। इसके बाद भी वह बेलरायां समेत समूचे क्षेत्र में खुले आम घूम रहा था। ग्रामीणों के मुताबिक अक्सर हिस्ट्रीशीटर पुलिसकर्मियों के साथ भी चाय के होटल आदि जगहों पर देखा जा रहा था।

शायद पुलिस का संरक्षण होने के कारण ही उसमें पुलिस और कानून का कोई खौफ नहीं था। वह लगातार आपराधिक वारदातों को भी अंजाम भी दे रहा था। करीब तीन महीने पहले कुछ बदमाश चीनी मिल परिसर में चोरी की नियत से घुसने का प्रयास कर रहे थे। मिल के सुरक्षा गार्डों के टोकने पर बदमाशों ने फायरिंग की थी और भाग निकले थे। इस घटना में भी हिस्ट्रीशीटर सोनू और उसके साथियों का नाम आया था।

मामले की तहरीर भी तिकुनियां पुलिस को दी गई थी, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करना तो दूर कोई कारवाई नहीं की थी। हफ्ते भर पहले हिस्ट्रीशीटर सोनू पुत्र शाकिर ने हरद्वाही बाजार चौराहा पर बेलरायां पुलिस चौकी के दो सिपाहियों संजीव कुमार और सोविंद्र कुमार को जमकर पीटा था।

करीब 20 मिनट तक हिस्ट्री शीटर और उसके दो अन्य साथियों के बवाल करने से लोगों में भगदड़ मच गई थी। खाकी के पिटने के बाद भी पुलिस संजीदा नहीं हुई। अपराधी पर कड़ी कारवाई करने के बजाय उसी की मदद में ढाल बनकर खड़ी होती दिखाई पड़ी। तिकुनियां इंस्पेक्टर मनोज कुमार से लेकर चौकी इंचार्ज बेलरायां अभिषेक कुमार तक ने सिपाहियों से किसी प्रकार की मारपीट  होने की घटना से साफ इंकार कर दिया था, जबकि चौराहा की वारदात थी।

बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने अपनी आंखो से घटना देखी। हद तो तब हो गई थी जब इंस्पेक्टर ने घटना की जानकारी होने से साफ मना कर दिया। भला हो सोशल मीडिया का। खबरों के प्रसारित होने पर सीओ निघासन यादवेंद्र सिंह ने संज्ञान लिया और जांच की तो घटना सही निकली। खासबात यह रही कि मीडिया से इंकार कर रही स्थानीय पुलिस ने अपने उच्च अफसरों को भी कोई जानकारी न देकर हिस्ट्रीशीटर का बचाव करती रही।

सीओ के हस्तक्षेप के बाद भी पुलिस ने खूब याराना निभाया और सिपाहियों की जगह बस चालक की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की। इतना ही उसकी गिरफ्तारी का ड्रामा कर अंदर खाने उसके कोर्ट में आत्म समर्पण का भी तानाबाना बुन डाला।

घटना के चौथे दिन हिस्ट्रीशीटर ने कोर्ट में आत्म समर्पण कर दिया और पुलिस इससे अनजान बनती रही। अब सवाल यह उठता है कि यदि स्थानीय पुलिस और शातिर अपराधी के बीच गठजोड़ नहीं था तो पुलिस घटना को क्यों छिपाती रही। उसकी गिरफ्तारी से लेकर आत्म समर्पण करने तक क्यों लापरवाह बनी रही।

ऐसे तमाम सवाल हैं जो स्थानीय पुलिस और हिस्ट्रीशीटर के बीच गठजोड़ होने का इशारा कर रहे है। इतना सब कुछ होने के बाद भी अफसर खामोश हैं। यही वजह है कारवाई तो दूर अभी तक जांच तक शुरू नहीं हो सकी है। 

सुलगते दस सवाल

  • पिटाई सिपाहियों की हुई तो बस चालक से तहरीर लेकर क्यों रिपोर्ट दर्ज की गई।
  • ऐसा क्या था कि तिकुनियां पुलिस ने पीड़ित सिपाहियों से तहरीर लेकर रिपोर्ट दर्ज करना जरूरी नहीं समझा। 
  • बस चालक और परिचालक के बीच हुआ विवाद जब बस मालिक के बेटे ने शांत करा दिया। उसके कुछ देर बाद सिपाहियों के पीटे जाने की घटना हुई तो घटना से चालक का क्या वास्ता रहा। 
  • इस बड़ी घटना को छुपाने की जरूरत आखिर पुलिस को क्यों पड़ी।  
  • अगर सिपाहियों की पिटाई नहीं हुई तो पुलिस ने चालक की तहरीर में हमला सिपाहियों पर हमला करने का जिक्र क्यों किया। 
  • पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर की गिरफ्तारी के समुचित प्रयास क्यों नहीं किए। 
  • कोर्ट में सरेंडर प्रार्थना पत्र दाखिल करने पर कोर्ट संबंधित थाने से रिपोर्ट तलब करती है तो पुलिस को उसके आत्म समर्पण करने की जानकारी कैसे नहीं हुई। 
  • यदि हुई तो उसे आत्मसमर्पण करने से पहले गिरफ्तार करने की कोशिश क्यों नहीं की गई। 
  • हिस्ट्रीशीटर की निगरानी क्यों नहीं की जा रही थी, जबकि डीजीपी और एसपी के निगरानी के सख्त आदेश हैं।  
  • हिस्ट्रीशीटर की निगरानी का जिम्मा बीट सिपाहियों पर है। निगरानी में लापरवाही पर आखिर जिम्मेदार क्यों कारवाई से कतरा रहे हैं। 

रिमांड के लिए पुलिस ने कोर्ट में दाखिल किया बी वारंट
लखीमपुर खीरी।
सिपाहियों की पिटाई मामले में हिस्ट्रीशीटर सोनू को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। इसको लेकर पुलिस पिटाई मामले के विवेचक ने कोर्ट में बी वारंट दाखिल किया है। बता दें कि सिपाहियो की पिटाई करने के बाद हिस्ट्रीशीटर सोनू ने किसी अन्य मामले में कोर्ट में आत्म समर्पण कर दिया था और तिकुनियां पुलिस उसे खोजती ही रह गई थी। 

तीसरे आरोपी को अभी तक खोज नहीं पाई पुलिस
लखीमपुर खीरी। सिपाहियों की पिटाई के मामले में कोतवाली तिकुनियां पुलिस ने ग्राम तकियापुरवा निवासी हिस्ट्रीशीटर सोनू, सलमान और तहबुद्दीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। हिस्ट्रीशीटर ने आत्म समर्पण कर दिया था। इसके अगले दिन पुलिस ने तहबुद्दीन को गिरफ्तार कर चालान भेजा था, लेकिन पुलिस तीसरे आरोपी सलमान को अभी तक गिरफ्तार नहीं कर सकी है। 

सिपाहियों की पिटाई मामले में आरोपी हिस्ट्रीशीटर को रिमांड पर लेने के लिए बी वारंट कोर्ट में दाखिल किया गया है। प्रकरण की जांच की जा रही है। अगर कहीं पर लापरवाही मिलती है तो लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कारवाई की जाएगी। पुलिस तीसरे आरोपी की तलाश में है। उसे भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। 
-यादवेंद्र सिंह, सीओ निघासन

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