सौभाग्यशाली हूं कि संघर्ष से सफलता तक का साक्षी बना : पूर्व सांसद
साइकिल चलाकर गांव-गांव में तैयार की राम भक्तों की टोलियां, बंगाल और बिहार के कारसेवकों के लिए कराया भोजन और विश्राम का प्रबंध
संतकबीरनगर, अमृत विचार। वर्ष 1989 में अयोध्या में भगवान श्रीराम जन्मभूमि पर हुए शिला पूजन और बाबरी ढांचा विध्वंस के लिए गांव गांव से कारसेवकों की टोलियां तैयार करने वाले पूर्व सांसद इंद्रजीत मिश्र भगवान श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की तिथि करीब आते देख खासे गदगद हैं। बुधवार को अमृत विचार से अपने संघर्षों को लेकर उन्होंने बातचीत की।
मिश्र ने बताया कि बात 1988-89 की है। विश्व हिन्दू परिषद ने शिला पूजन का कार्यक्रम तय किया तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयं सेवक होने के नाते गांव गांव से कारसेवकों की टीम तय करने की जिम्मेदारी मिली। विपरीत सरकार थी जिसके चलते हर पल गिरफ्तारी का भय बना रहता था। संगठन का निर्देश था कि आपको पुलिस के हाथ नहीं लगना है। संघ के जिला प्रचारक बृजभूषण जी और उस समय के साथी जगदीश पाण्डेय, विश्वनाथ भल्ला, त्रियुगी नारायण सिंह, रवीश चंद्र पाण्डेय साथ साइकिल चलाकर गांव गांव भ्रमण करते थे। भोजन और पानी तक का ठिकाना नहीं रहता था। शुरुआती दौर में कोई साथ खड़ा होने को भी तैयार नहीं होता था। लेकिन बाद में लोगों के भीतर श्रीराम मंदिर को लेकर ऐसा जुनून सवार हुआ कि लोग कुछ भी करने को आतुर हो गए।
पूर्व सांसद ने बताया कि उस समय संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर बस्ती जनपद का ही हिस्सा था। वर्ष 1992 में राम मंदिर आंदोलन अपने चरम पर पहुंच गया। कारसेवकों का जत्था पश्चिम बंगाल और बिहार से आता था। उनके ठहरने और भोजन का प्रबंध करने में लोग अपना सौभाग्य समझते थे। गांव की पगडंडियों को पकड़ कर कारसेवकों की टोलियां तामेश्वरनाथ और टुंगपार आदि गांवों में पहुंचती थीं। कुछ समय विश्राम के बाद उन्हें भोजन का पैकेट देकर अयोध्या के लिए विदा किया जाता था। उन्होंने बताया कि दो सौ कारसेवकों के साथ मैं खलीलाबाद से अयोध्या के लिए प्रस्थान किया। बाद में गिरफ्तारी के संकट को देखते हुए 10-10 लोगों की टोलियां बनाकर अलग-अलग रास्तों से भेजा गया। अपनी टोली के साथ गांव की पगडंडियों को पकड़ कर आनंद राय, प्रहलाद वर्मा, विश्वनाथ भल्ला और रवीश चंद्र पांडेय के साथ पैदल चलते हुए बस्ती जिले के लालगंज कस्बे में पहुंचे। यहां से बस्ती जा रही बस में सवार हो गए। बस्ती पहुंचने से पहले ही सभी साथी बस से उतर गए और सपा नेता सुखपाल पाण्डेय के आवास पर पहुंचे।
सपा नेता ने जलपान और भोजन कराने के बाद कहा कि मैं आप लोगों को अपनी गाड़ी से कुछ दूर तक पहुंचा सकता हूं। लेकिन आगे भारी फोर्स मौजूद है जिसके चलते आप लोग अयोध्या नहीं पहुंच पाएंगे। गिरफ्तारी से बचने के इरादे से हम सभी लोग खलीलाबाद वापस लौट आए। यहां कोतवाली खलीलाबाद परिसर में सैकड़ों कारसेवकों के साथ सत्याग्रह पर बैठ गया। कोतवाली प्रभारी कारसेवकों को गिरफ्तार करने को तैयार नहीं थे। इसी बीच बाबरी ढांचा ढ़हा दिये जाने की सूचना मिली तो सभी कारसेवकों ने एक दूसरे को मिठाइयां खिलाकर शुभकामनाएं दिया और अपने घरों को वापस लौट गए। उन्होंने बताया कि भगवान राम की कृपा से ही वर्ष 1998 में खलीलाबाद लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुआ। कोर्ट की लम्बी लड़ाई के बाद फैसला पक्ष में आया और आज भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनकर तैयार भी हो गया। 22 जनवरी को मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा भी सम्पन्न होना है। संघर्षों से लेकर सफलता तक का साक्षी बन रहा हूं। मेरे जीवन की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि यही है।
