इलाहाबाद हाईकोर्ट से विज्ञान परिषद को लगा बड़ा झटका, खाली करना होगा परिसर

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Edited By Amrit Vichar
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में स्थित विज्ञान परिषद को बड़ा झटका देते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी है। अब परिषद को विश्वविद्यालय परिसर खाली करना होगा। उक्त आदेश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने विज्ञान परिषद के महासचिव द्वारा दाखिल याचिका को खारिज करते हुए पारित किया। वर्ष 1956 से विश्वविद्यालय ने विज्ञान परिषद को उक्त परिसर विज्ञान शिक्षण के प्रचार-प्रसार के लिए दिया था, लेकिन कोविड के दौरान पदाधिकारियों ने परिषद की इमारत के एक हिस्से को वाणिज्यिक गतिविधियों के क्रियान्वयन के लिए किराए पर दे दिया।

विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी समिति का आरोप है कि पदाधिकारियों को इसकी अनुमति नहीं दी गई थी और भविष्य में वे अन्य हिस्सों को भी किराए पर देने की मंशा बना रहे थे। विश्वविद्यालय की ओर से याची संस्था को नोटिस देने पर संस्था ने स्वीकार किया कि उनके द्वारा विवादित परिसर का व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया गया था, इसलिए विश्वविद्यालय ने परिषद को परिसर खाली करने का नोटिस जारी किया, जिसे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन दोनों जगह से परिषद की याचिका खारिज कर दी गई।

परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि वर्तमान समय में लगभग 20 लाख का सामान अभी भी परिसर में मौजूद है और 20 हजार की पुस्तकें विज्ञान परिषद की लाइब्रेरी में पड़ी हैं। पिछले 2 महीने से विवाद चलने के कारण परिसर बंद है, जिसकी वजह से विज्ञान परिषद की 'विज्ञान' पत्रिका के दिसंबर और जनवरी अंक का प्रकाशन भी नहीं हो पाया है। इसके साथ ही जो छात्र लाइब्रेरी में पढ़ने आते थे, उनका भी नुकसान हो रहा है। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि परिषद की मांग पर संस्था का सामान दे दिया जाएगा।

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