गोंडा: रामकाज में गंवा दिया पैर, नहीं मिला प्राण प्रतिष्ठा का आमंत्रण, परिजन बोले- जिस परिवार के मुखिया ने रामकाज...

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मौजीराम यादव, नवाबगंज, गोंडा। नवाबगंज थाना क्षेत्र के लोलपुर गांव के रहने वाले राम शंकर गुप्ता को वर्ष 1990 में कारसेवा के दौरान पैर में गोली लगी थी। अस्पताल में भर्ती हुए तो डाक्टरों ने उनका पैर काट दिया लेकिन राम के प्रति उनका अनुराग कम नहीं हुआ। जब तक जिए राम काज के प्रति समर्पित रहे। वर्ष 2021 में जब राममंदिर निर्माण के लिए शिलान्यास हुआ तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था।

उम्मीद थी कि वह जीते जी राममंदिर निर्माण पूरा होते देखेंगे लेकिन राम जी ने उन्हें जुलाई 2023 में अपने पास बुला लिया। रामकाज के लिए अपने पैर गंवाने वाले स्व राम शंकर गुप्ता के परिवार को प्राण प्रतिष्ठा का आमंत्रण नहीं मिला। आमंत्रण न मिलने से उनके परिजनों में नाराजगी है। स्व. राम शंकर गुप्ता के बेटे दिनेश व महेश ने अमृत विचार से बातचीत में अपनी इस टीस को साझा किया। 

नवाबगंज थाना क्षेत्र के लोलपुर गांव गांव के रहने वाले स्व राम शंकर गुप्ता ने वर्ष 1990 में कारसेवा के दौरान अग्रणी भूमिका निभाई थी। बेटे दिनेश को मुताबिक 30 अक्टूबर 1990 को पंचकोसी परिक्रमा थी। परिक्रमा के बहाने उनके पिता स्व रामशंकर गुप्ता अपने गांव से पचासों लोगों के साथ कारसेवा के लिए रवाना हुए थे। दिनेश बताते हैं कि सुबह लगभग साढ़े नौ बजे जब वह लोग सरयू नदी के किनारे पहुंचे और वहां करीब 10 हजार कारसेवक मौजूद थे।‌ वहां पुलिस फोर्स लोगों को आगे नहीं बढ़ने दे रही थी।

इस पर स्व राम शंकर गुप्ता ने पुलिस वालों से कहा कि सरकार ने पंचकोसी परिक्रमा की इजाजत दे दी है। इसके बाद उन्हे क्यों रोका जा रहा है। इस पर पुलिस वाले भड़क गए और उन्होने कार सेवकों पर लाठी चार्ज कर दिया। जवाब में कारसेवकों ने भी पथराव किया। इस पर पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी। बताया जाता है कि पुलिस ने स्व राम शंकर को पकड लिया और उन्हे बैठाने के बाद उनके पैर में गोली मार दी। किसी तरह दूसरे कार सेवक साथियों ने उन्हे फैजाबाद स्थित अस्पताल पहुंचाया। तीन दिन तक इलाज हुआ लेकिन पैर ठीक नहीं हुआ।

डाक्टरों ने कहा कि पैर काटना पड़ेगा। इस पर परिजन परेशान हो गए। दिनेश बताते हैं कि इसकी जानकारी जब पिता यानि स्व राम शंकर गुप्ता को दी गयी तो उन्होने कहा कि प्रभु श्रीराम के लिए आया था। इसलिए मुझे दुःख कैसा। अगर मैं दुःख करता तो मेरा भगवान के काम में जाना व्यर्थ हो जाता यदि फिर रामलला का मंदिर बनाने का आवाहन होगा तो मैं फिर मंदिर निर्माण कार्य के लिए जाऊंगा। यही मेरा लक्ष्य है। इस कठिन समय में उनका पूरा परिवार उनके पास मौजूद था। वह सॉभी की हिम्मत बंधाते हुए बोले गांव में राशन की दुकान है। मैं वहीं पर बैठूंगा और अपने बच्चों का भरण-पोषण करते रहूंगा। इसके बाद उनका पैर काट दिया गया और रामकाज की खातिर वह दिव्यांग हो गए।

दिनेश ने बताया कि वर्ष 2020 में जब पीएम मोदी ने राम मंदिर निर्माण की आधार शिला रखी तो उनके पिता जीवित थे। चेहरे पर मंदिर बनने की अपार खुशी थी। वह अपने जीते जी भगवान को मंदिर में स्थापित होते देखना चाहते थे लेकिन शायद ईश्वर को यह मंजूर नहीं था। जुलाई 2023 में उनका निधन हो गया, लेकिन उनके घर पर आज भी श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का छपा हुआ झंडा लहरा रहा है।

अब जब 22 जनवरी को भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है और देश विदेश के मेहमान इस रामोत्सव का हिस्सा बनने जा रहे हैं लेकिन स्व राम शंकर गुप्ता के परिवार को इस महोत्सव के लिए निमंत्रण नहीं दिया गया है। इसको लेकर उनके बेटों में नाराजगी है। उनके बेटे दिनेश और महेश का कहना है कि जिस परिवार के मुखिया ने रामकाज के लिए अपना पैर गंवा दिया उसी के परिवार को निमंत्रण न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। निमंत्रण पत्र तो दूर उनके घर तक पूजित अक्षत अभी तक नहीं पहुंचा है। हालांकि वह कहते हैं कि इतने वर्षों बाद यह शुभ घड़ी आई है‌। वह अपने घर पर ही दीपोत्सव मनायेंगे और श्रीराम जी की पूजा अर्चना करेंगे।

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...जब मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह के सहयोग को ठुकराया

कारसेवा में अपने पैर गंवाने के बाद स्व रामशंकर गुप्ता को परिवार चलाने के लिये काफी संघर्ष करना पड़ा। उनके बेटे महेश ने बताया कि एक बार जब राजनाथ सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तो वह नवाबगंज के नंदिनी नगर महाविद्यालय में आए थे। उनके पिता ने राज नाथ सिंह से मुलाकात की और कुछ आर्थिक सहायता दिलाने का निवेदन किया तो राजनाथ सिंह ने कहा कि आप गुप्ता हैं। दो चार हजार रुपए ले लीजिए और चाय पानी की दुकान खोल लीजिए।

इस पर स्व रामशंकर गुप्ता ने उनका सहयोग ठुकरा दिया और वापस अपने घर लौट गए। एक बार उनके पिता बच्चों के साथ तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिलने दिल्ली पहुंचे लेकिन वहां भी उन्हे निराशा हाथ लगी और अपने बच्चों संग लंगड़ाते हुए वापस घर लौट आए।

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