Bareilly News: विश्वास की नींव पर खड़ी रिश्तों की इमारत...खोखला कर रहा शक का कीड़ा
बड़े विवाद का रूप ले रहीं छोटी बातें, काउंसिलिंग से जोड़े जा रहे रिश्ते
अनुपम सिंह/बरेली, अमृत विचार। समय के साथ रिश्तों में भी बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पति-पत्नी के रिश्ते जीवन भर एक-दूसरे के सुख में साथ देने की गारंटी हैं, लेकिन छोटी-छोटी बातें बड़े विवाद का रूप ले रही हैं, इससे रिश्तों की डोर कमजोर होती जा रही है। विश्वास की नींव पर खड़ी होने वाली पति-पत्नी के रिश्तों की इमारत को मोबाइल ताे कहीं प्रेम प्रसंग का शक खोखला कर रहा है। ऐसे मामले कोर्ट और थानों में पहुंच रहे हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के आंकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे हैं।
जनवरी से अब तक करीब 500 से अधिक दंपतियों की काउंसिलिंग हुई है, इसमें कुछ तो एक साथ रहने को राजी हो गए हैं, लेकिन जो अलगाव की जिद पर अड़े हैं, उनकी प्रक्रिया चल रही है। औसतन 20 से 25 मामलों की रोजाना काउंसिलिंग की जा रही है। इसमें पारिवारिक न्यायालयों से लेकर कोतवाली और थानों पर आने वाले मामले भी हैं।
पिछले वर्ष 324 मामलों का निस्तारण
वर्ष 2023 में चार लोक अदालतें लगाई गईं, इसमें 11 फरवरी को 109 में से 78, 21 मई को 165 पारिवारिक मामलों में से 113, 9 दिसंबर को 121 में से 70, 9 सितंबर को 97 में से 63 मामलों का निस्तारण कराया जा चुका है। आंकड़ों के अनुसार एक वर्ष में 492 में से 324 मामलों का निस्तारण कराया गया। इसमें एक साथ रहने को भी दंपती राजी हुए तो कुछ अलग भी हुए। इस वर्ष नौ मार्च को लोक अदालत होनी है।
पीएलवी दिखाती हैं उम्मीद की किरण
घरेलू हिंसा के मामलों में सुनवाई से पहले रिश्तों को टूटने से बचाने के लिए काउंसिलिंग होती है। न्यायालयों से काउंसलर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय आते हैं। काउंसिलिंग के लिए आने वाले पत्नी-पत्नी या अन्य संबंधित लोगाें को विधिक परामर्श देने के लिए पीएलवी (पैरालीगल वालंटियर) साधना कुमारी, प्रभा गंगवार हैं। दोनों महिलाएं विधिक सलाह देकर रास्ता दिखाती हैं।
केस-1
एक महिला फोन पर मायके बात करती थी। इसपर पति को आपत्ति थी। दोनों में विवाद होने लगा। मामला थाना पहुंच गया। सुलह के लिए मामला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में काउंसलर के पास पहुंचा, जहां पर काउंसिलिंग के बाद दोनों एक साथ रहने को राजी हो गए।
केस-2
नौ साल की एक बालिका ने पिता से भरण पोषण के लिए वाद दायर किया। उसकी मां की मौत हो चुकी है। दोनों बहनें ननिहाल में रहती हैं। वहां की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इस वजह भरण पोषण, पढ़ाई लिखाई के लिए बालिका ने कानून का सहारा लिया है। वह पिता के साथ जाने को राजी नहीं है।
केस-3
एक महिला पति को तलाक देकर प्रेमी के साथ रह रही है। उसकी बेटी इंटर की छात्रा है। महिला चाहती है कि बेटी उसके साथ रहे, लेकिन लड़की पिता को छोड़कर नहीं जाना चाह रही है। मामले में काउंसिलिंग शुरू हुई है। उसने काउंसिलिंग टीम को बताया कि मां मारती-पीटती हैं।
केस-4
नवाबगंज क्षेत्र की एक महिला की शादी को छह साल हो गए हैं। उसकी कोई संतान नहीं है। पति, सास परेशान करते हैं। ताने मारते हैं। घरेलू हिंसा से परेशान होकर महिला ने मदद के लिए कानून का सहारा लिया है। काउंसिलिंग में महिला ने कहा कि अगर उसे बच्चे नहीं हो रहे हैं तो उसमें मेरा क्या दोष है।
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