Pilibhit: कासगंज हादसे के बाद भी नहीं सुधरे, सवारियों की जान की फ्रिक न कार्रवाई का डर...खुलकर डग्गामारी

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Edited By Amrit Vichar
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पीलीभीत, अमृत विचार। अभी तीन दिन पहले ही कासगंज में श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली अनियंत्रित होकर तालाब में पलट गई थी, जिसमें 23 लोगों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद परिवहन विभाग ने हर बार की तरह सड़कों पर उतरकर चेकिंग कर औपचारिकता निभाई थी। सवारियां लेकर जा रही तीन ट्रैक्टर ट्रॉलियों के चालान किए। मगर, गैर जनपद में हुए हादसे से कोई सबक नहीं लिया गया। 

पहले दिन किए गए तीन चालान कर कर्तव्यों से इतिश्री कर ली गई। नतीजतन सड़कों पर नियतन से अधिक सवारी भरकर मौत का सफर जारी है। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस के जिम्मेदार बेपरवाह बने हुए हैं। ट्रैक्टर ट्रॉली में नागरिक सफर कर रहे हैं। साथ ही ऑटो, टेंपो, मैजिक समेत अन्य सवारी वाहनों में खुलकर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। आलम ये है कि न इन्हें न तो किसी की जान की फिक्र है, न ही कार्रवाई का डर।

सड़क हादसों की बढ़ती संख्या को देखते हुए शासन गंभीर है। पुलिस का यातायात माह नवंबर अभियान हो या फिर परिवहन विभाग का सड़क सुरक्षा पखवाड़ा..। हादसों की रोकथाम के लिए लोगों को जागरुक करने के लिए चलाए जाने वाले इन विशेष अभियानों पर फोकस रहता है। शासन के निर्देश के बाद जिला स्तर पर भी पुलिस प्रशासनिक और परिवहन विभाग के अधिकारी तमाम आयोजन करते हैं। कार्रवाई की लकीर भी पीटी जाती है। 

डग्गामारी करने वाले वाहनों पर कार्रवाई को लेकर बड़े-बड़े दावे कर दिए जाते हैं। नियम है कि टेंपो में 06, मैजिक में 09 सवारियां ही बैठाई जा सकती है। लोडर वाहनों में सवारियां बैठाए जाने पर प्रतिबंध है। मगर ये सब नियम कागजों में ही पालन होते नजर आ रहे हैं।  बीसलपुर, पूरनपुर, माधोटांडा, घुंघचिहाई, बरखेड़ा, बरेली, जहानाबाद, अमरिया, मझोला -न्यूरिया आदि मार्गों पर दिन भर नियमों को धता बताते हुए वाहन दौड़ते रहते हैं। 

कासगंज में हुए में हादसे के बाद किए गए गंभीरता और सख्ती के दावे बेमानी साबित हो रहे हैं। वाहनों में नियतन से अधिक सवारियां ढोई जा रही हैं। सोमवार को भी सड़कों पर हकीकत जिम्मेदारों के दावों से इतर मिली। कहीं पायदान पर सफर होता रहा तो कहीं सवारियां ठूंसकर भर दी गई।  जोखिम भरा सफर करने को यात्री मजबूर दिखाई दिए।

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