लखनऊ: संस्कार अच्छे होंगे तो कूड़े में नहीं मिलेंगी बेटियां
विचारों के मंथन में एकजुट हुई ''आधी आबादी''
विचार मंथन में संस्कार पर जोर
लखनऊ, अमृत विचार। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर शुक्रवार को ''अमृत विचार'' कार्यालय में विचारों के मंथन में ''आधी आबादी'' जुटी तो सभी का जोर संस्कारों पर रहा। चूंकि घर और माता पहली गुरु है ऐसे में घर में बचपन से ही ''संस्कारों की पाठशाला'' शुरू हो तभी बात बनेंगी। संस्कार सीख समाज में उतरेंगे तो न केवल महिला आगे बढ़ेगी बल्कि समाज भी आगे बढ़ेगा। पुरुष और महिला में तु्लना न करें। महिला किसी से कमतर नहीं है। लेकिन माताओं को अपने घरों में बेटियों और बेटों दोनों को अच्छे संस्कार देने होंगे। एक नारी के उत्थान से पूरे परिवार और समाज का उत्थान होता है। किसी ने संस्कार तो किसी ने नवाचार पर बल दिया। शिक्षा और उद्यम के क्षेत्र में भी कुछ खास करने का संकल्प लेने पर अपनी राय दी। परिवार और समाज के मानसिक स्तर को बेहतर बनाने के लिए विचार मंथन में तमाम सुझाव भी आए।

बराबरी की नहीं खुद को पुरुषों से आगे लाने की करें कोशिश
स्वयं को विशेष बना आगे बढ़े तभी बदलाव दिखेगा। विरासत की अवधारणाओं पर बल दिया। कहा हमें पूर्वजों से प्रेरणा लेनी चाहिए। जिस तरह उन्होंने समाज में सक्रिय भूमिका निभाई, उसी तरह कुछ विशेष करना होगा, तभी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। मुझे समझ नहीं आता कि आखिर महिलाएं बार-बार बराबरी का सवाल क्यों खड़ा करती हैं। महिलाओं को तो खुद को पुरुषों से आगे खड़ा करने की कोशिश करनी चाहिए। महिलाओं के हालात में समय के साथ-साथ काफी बदलाव हुआ है. शिक्षा के बलबूते महिलायें अपनी स्थिति को और भी सुदृढ़ कर सकती हैं।-प्रो. मांडवी सिंह, कुलपति, भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय
आत्मबल को मजबूत किया जाना आवश्यक
महिलाओं का सशक्तीकरण उनके भीतर के स्व की गहराई से जोड़ने से शुरू होता है। अपने आपकी आंतरिक शक्ति और अद्वितीय पहचान को पहचानना हमारे खुद, परिवार और समाज की सकारात्मक प्रगति के लिए आवश्यक है।-डॉ. मानिनी श्रीवास्तव, प्रवक्ता मनोविज्ञान, लखनऊ विश्वविद्यालय

बेटियां बढ़ाती हैं समाज की शोभा
बेटियां कूड़े के ढेर और पॉलीथिन में रखकर फेंकने की चीज नहीं है। ये नव देवियों का रूप है। इसे हम आपको समझना होगा। तभी नई पीढ़ी इस सम्मान को बरकरार रखेगी। आज हर क्षेत्र में महिलाओं को प्रमुख सहभागिता करते हुए देखा जा सकता है।-डॉ. अंजू वार्ष्णेय
शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों पर भी रहे फोकस
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय की प्रवक्ता डॉ. रुचिता सुजय चौधरी का कहना है कि शहरों ही क्यों गांव - गांव महिला सशक्तीकरण को लेकर जागरूकता चलाई जानी चाहिए। अगर घरेलू हिंसा के आंकड़ों पर नजर डालें, तो एक बड़ा भाग शहर के आसपास और ग्रामीण क्षेत्रों से प्रभावित दिखाई देगा।
प्राइवेट सेक्टर में आगे आई हैं बेटियां
हाईटेक शिक्षा का असर व्यवस्था और प्रबंधों पर पड़ता है। आज प्राइवेट सेक्टर में भी तेजी से महिलाएं आगे आई हैं। चाहे वो बैंक सेक्टर हो या फिर कोई उद्यम, निरंतर आगे बढ़ रही हैं। घरों से सही संस्कार देकर उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता दिखाएं, कोई नहीं रोक पाएगा। - सैय्यद उजबा, संस्थापक यूएसए स्टॉक सिक्योरिटी
देश के प्रति भी हम जिम्मेदार बनें
अमूमन लोग परिवार, घर और करीबियों को सुधारने के लिए ही प्रयास करते हैं। समाज और देश के लिए लोग कम ही सोचते हैं। आज जरूरत है, समाज में बदलाव लाने की। ये तभी हो सकता है जब हम इस ओर कोई ठोस प्रयास करें। महिला को अहसास है वह अबला नहीं सबला है।
ऊषा विश्वकर्मा, संस्थापक रेड ब्रिगेड
संकल्प लें तभी होंगे बदलाव
तमाम स्थानों पर महिलाओं को पुरुषों के समान अवसर और सम्मान नहीं मिल पाता। ऐसे में हम सबको एकजुट होकर संकल्प लेने की जरूरत है। इसके सहारे ही इस भेदभाव को समाप्त कर सकते हैं। मौका है आइए संकल्प लें और बेटियों को आगे बढ़ाने के उत्तरोत्तर प्रयास करें। -वर्तिका शुक्ला, जिला समन्वयक
आर्थिक रूप से बनें सबल
आर्थिक रूप से सबल बनने के लिए आवश्यक है कि हम उस स्तर तक अपने बच्चों को शिक्षित करें। शिक्षा ही समाज में बड़ा बदलाव लाता रहा है। एक शिक्षित समाज ही सभ्य समाज की स्थापना करता है। इन दिनों तेजी से बढ़ी नई तकनीकियों ने युवाओं को नए नवाचार और उद्यम दिये हैं। -रेनू अग्रवाल, उद्यमी
शिक्षा के क्षेत्र का प्रोत्साहन बना संजीवनी
विद्यालय में ब्यूटीशियन, सिलाई, कढ़ाई, कंप्यूटर से जुड़े कोर्स निर्धन और निराश्रित छात्राओं को पढ़ाकर उन्हें रोजगार के लिए प्रेरित करने की कोशिशें मूर्तरूप ले चुकी हैं। नि:शुल्क कोर्स उन्हें आगे ले जा रहे हैं। बस हिम्मत दिखाएं और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़े। बड़ी संख्या में महिलाओं को रास्ता दिखाया जा रहा है।
डॉ. रचना श्रीवास्तव, प्राचार्य एपी सेन मेमोरियल गर्ल्स कालेज

एक साल के भीतर बना लिया समूह
आर्थिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए कुछ अलग करने के लिए सोचा। बच्चों की पढ़ाई का अतिरिक्त बोझ करीबियों के परिवारों पर भी दिखाई दिया। कहती हैं कि पहले अकेले घर के बाहर कदम रखकर म्युचुअल फंड से जुड़े कार्यों में प्रयास किये। फिर एलआई सहित अन्य क्षेत्रों में भी कदम रखे। एक वर्ष के भीतर लखनऊ और आसपास एक बड़ा समूह भी बना डाला। -आरती गुप्ता, एलआईसी
बेटियों के स्वास्थ्य को लेकर जागरूक होने की जरूरत
बेटियों के स्वास्थ्य को लेकर जागरूक होने की जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्रो में इसकी भारी कमी है। जन्म के बाद से ही इनके साथ दोहरा रवैया शुरू हो जाता है। खानपान को लेकर बेटों पर अधिक ध्यान दिया जाता है। इससे लड़कियां शारीरिक तौर पर कमजोर हो जाती हैं। आगे चलकर अर्थराइटिस जैसी कई बीमारियों की शिकार हो जाती हैं।-डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, चिकित्सक
रहे जागरूक, तभी होगी सुरक्षा
हमें अपने और आसपास लोगों के लिए जागरूक रहना होगा। कई बार अनभिज्ञता में बड़े हादसे हो जाते हैं और हम चाहकर भी मदद नहीं कर पाते। ऐसे में संबंधों को बनाए रखना आवश्यक है। इससे रिश्ते ही नहीं समाज में भी मजबूती आती है। सकारात्मक सोच ही हमें आगे ले जाती है लिहाजा इस ओर गंभीर ध्यान देना होगा।-नेहा, सिविल डिफेंस
मजबूत करनी होगी संस्कृति
बच्चियां फेंकने की नहीं सजाने की जरूरत है। अगर हम अपनी संस्कृत और संस्कृति को समझ लेंगे तो ये सारे विकार स्वत: ही समाप्त हो जाएंगे। इसके लिए जरूरी है कि परिवार, घर और समाज में धार्मिक व्यवस्थाओं को मजबूत किया जाए। जिससे स्वस्थ संस्कारों का आदान-प्रदान घर से ही शुरू हो जाए। -डॉ. संगीता शर्मा, सदस्य नेशनल आर्ट्स कालेज

प्रेरक प्रसंग महिलाओं को आगे बढ़ाने में सहायक
भाजपा की महिला सभा की महामंत्री वीनू मिश्रा ने बताया कि महिला ही महिला की दुश्मन है। ये कहावत सरासर झूठी है। समाज के हर क्षेत्र में देखें तो महिला एक दूसरे को आगे बढ़ा रही है। इस क्रम को मुख्य धारा में लाने की आवश्यकता है। समाज में दिख रहे बदलाव इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। -बीनू मिश्रा, महामंत्री महिला इकाई अभा उद्योग व्यापार मंडल
महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी मामलों में जागरुक रहने की जरूरत
एल्डा फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ पूजा शाहीन लंबे समय से महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं को लेकर जागरुक करने का काम कर रही हैं। इतना ही नहीं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को सशक्त व स्वालंबी बना रही हैं। इसके लिए उनका संगठन यूपी और उत्तराखंड में समय-समय पर कार्यक्रमों का आयोजन भी करता है। महिला दिवस के अवसर पर डॉ पूजा शाहीन ने बताया कि स्वस्थ्य महिला से ही स्वस्थ समाज का निर्माण हो सकता है। इसके लिए महिलाओं को अपनी सेहत को लेकर जागरुक रहना होगा। मौजूदा समय में सर्वाइकल कैंसर को लेकर महिलाओं को जागरुक करने की जरूरत है। इसकी रोकथाम के लिए टीकाकरण भी हो रहा है। हमारी संस्था लगातार इसके लिए काम कर रही है। यह ऐसी बीमारी है जिसकी रोकथाम की जा सकती है।
चेन बना किया जा रहा शिक्षित
वे रोज नई पीढ़ी के बीच काउंसलिंग करती हैं। इससे मानसिक स्तर में बढ़ोतरी होती है। इस दिशा की ओर सभी को मनन करने की आवश्यकता है। महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति उन्हें जागरूक करने के लिए निरंतर कोशिश रहती है कि वह समझें और आगे बढ़ें।-श्रुति शांडिल्य, सामाजिक कार्यकर्ता
महिला सुरक्षा और स्वास्थ्य पर काम करने की जरूरत
आज महिलाओं ने देश के हर पद पर अपना कदम बढ़ाने का प्रयास किया है। बस उन्हें समझने की जरूरत होती है। आज महिला सशक्तिकरण अभियान चलाकर सरकार ने सराहनीय कदम उठाया है। लेकिन अभी भी कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर काम करने की जरूरत है। इसमें महिला सुरक्षा, महिला स्वास्थ्य पर काम करने की आवश्यकता है।-वर्तिका प्रिया सिंह एमए, अंग्रेजी दिल्ली यूनिवर्सिटी
महिलायें किसी की मोहताज नहीं
आज शिक्षा के क्षेत्र में महिलाएं आगे हैं। सरकार बेटियों के लिए बेहतर कार्य कर रही है। लेकिन अभी और सुधार की जरूरत है। जब एक बेटी शिक्षित होती है तो वह अपने घर को भी शिक्षित करती है। उसी बेटी की जागरुकता समाज को आगे बढ़ाने का काम करती है। आज महिलायें किसी की मोहताज नहीं हैं। वह अपना रास्ता चुनने में समर्थ हैं। -नीलम मौर्या सहायक अध्यापक बेसिक शिक्षा विभाग
ग्रामीण क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था पर फोकस करने की जरूरत
जरूरत है ग्रामीण क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था पर तेजी से फोकस करने की। ग्रामीण क्षेत्र की बेटियां व महिलाएं अभी जागरुक होने की ओर हैं। इस ओर तेजी दिखानी होगी। समय-समय पर सरकार की ओर से अभियान चला महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है। लेकिन इस निंरतर काम करने की जरूरत है। -विमलेश मौखरी प्रधानाध्यापक व जिला उपाध्यक्ष पीएसपीएसए
बेटियों और महिलाओं को अपने निर्णय स्वयं लेने चाहिए
बेटियों और महिलाओं को अपने निर्णय स्वयं लेने की छूट देनी चाहिए। इसके लिए महिलाओं का शिक्षित होना जरूरी है। आज महिलायें हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं। देश की सुरक्षा से लेकर सेना के लड़ाकू विमान तक उड़ा रही हैं लेकिन जो सम्मान मिलना चाहिए उसमें अभी हम पीछे हैं। -श्रुति प्रिया सिंह एमए पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन
महिलायें हिम्मत न हारें
महिलाएं आज घर परिवार चलाने के साथ-साथ रोजगार के क्षेत्र में भी कदमताल कर रही हैं। हालांकि अभी भी महिलाओं को संघर्ष करना पड़ रहा है लेकिन हिम्मत न हारें और आगे बढ़ती रहें। नारी अब कमजोर नहीं रही। न हौसला कम है न आगे बढ़ने की ललक, फिर कौन रोक सकता है। -मीनाक्षी उपाध्याय समाज सेवी
नौकरी छोड़ समाज सेवा को अपनाया
सरकारी नौकरी को छोड़कर समाज सेवा को अपनाया। महानगर के सिविल अस्पताल के बाहर सीता रसोई शुरु की है जिसमें निशुल्क भोजन मिलता है। इसी में ही पौध वितरण भी किया जाता है। गौरेया संरक्षण सेवा में पक्षियों के संरक्षण की व्यवस्था की गई है। गरीब बेटियों को फीस, साइकिल, किताबें उपलब्ध कराना हमारा उद्देश्य है। कोरोना काल में निशुल्क एंबुलेंस सेवा और राशन वितरण कराया है। -ओम सिंह, मनोवैज्ञानिक, डाइट एक्सपर्ट, चैतन्य वेलफेयर फांउडेशन की संस्थापक
महिलाओं का सम्मान होना जरूरी
मुझे लगता है कि महिला दिवस के दिन ही नहीं बल्कि सभी दिवसों में महिलाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। आज महिलाएं सभी क्षेत्र में पूर्व की तुलना में अग्रिम पंक्तियों में हैं। आर्थिक सशक्तिकरण सभी के लिए बहुत जरुरी है। सेना, पत्रकारिता, समाज सेवा, राजनीति, शिक्षा, चिकित्सा समेत सभी सेवाओं में अग्रणी भूमिका में हैं। -डॉ. रुचिता चौधरी, प्रभारी पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, भाषा विश्वविद्यालय
महिला दिवस प्रत्येक दिन मनाया जाना चाहिए
महिला दिवस एक दिन नहीं इसे प्रत्येक दिन मनाया जाना चाहिए। हमें रोज महिलाओं को प्रेरित करते हुए उन्हें उनकी सशक्त भूमिका का अहसास कराना होगा। अबला की भूमिका से निकलकर उन्हें सबला के रूप में समाज में अपने पैर जमाने होंगे। इसके लिए उन्हें जिम्मेदारी का अहसास कराना होगा। -नीलम मौर्या
शिक्षा और संस्कार से होगा समाज में बदलाव
आज के समय में महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर समाज में एक अहम भूमिका निभा रही है और बदलाव की दिशा में कार्य कर रही हैं। तमाम जिम्मेदारियों एवं चुनौतियों का सामना करते हुए निरंतर कार्य कर रही हैं। शिक्षा एवं संस्कार के माध्यम से हम बदलाव का कार्य करते रहे और एक सुदृढ़ समाज की स्थापना करें।
-रीता सिंह सेक्रेटरी मुक्ति फाउंडेशन
ईमानदारी से करना होगा काम
महिलाओं के लिए एक दिवस की जरूरत नहीं हर दिन उनका होना चाहिए। परिस्थिति कोई भी हो संयमित रहकर अपना हर कार्य पूरी ईमानदारी से करना ही उसे आगे ले जाएगा। प्रलय सी प्रबल मैं, रक्षक सी सजग मैं, घर की बगिया की मैं रखवारी हूं, अबला नहीं आदिशक्ति हूं मैं’।
-डॉ. ममता शुक्ला, सह आचार्य, भाषा विश्वविद्यालय
महिलायें किसी से कम नहीं
अगर हम सभी मिलकर काम करें तो महिला किसी भी स्तर में कम नहीं है। हम लोगों को बेटी को आत्मनिर्भर बनाना होगा ताकि वह निर्भीक होकर समाज में आगे बढ़े और दिशा देनें का काम करें।
-अन्नू यादव, बाल मंच सेंटर
''महिला'' शब्द का अर्थ समझा कहा अपने आप में है ताकतवर
दरअसल महिला शब्द का मर्म ज्यादातर आधी आबादी नहीं जानती है। महिला शब्द अपने आप में ताकतवर हैं। व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि महिला यानी ''म'' मातृत्व व ममता, ''ह'' से हिम्मत और ''ल'' से लज्जा है। यह शब्द उन्हें संवैधानिक ताकत प्रदान करता है। बस उसे अहसास होना चाहिए। मातृत्व भाव से ही समृद्ध समाज की स्थापना होती है। हिम्मत उसे सेना और लड़ाकू विमानों की ओर ले जाती है और लज्जा उसका गहना होता है। भावार्थ यह है कि इन तीनों चीजों के एकत्र होने से ही महिला का सर्वांगीण निर्माण होता है। वह आगे बढ़ अपना और परिवार का विकास करती है। साथ ही समाज में आदर्श स्थापित करती है। अब जरूरत है तो नई पीढ़ी को इस ओर प्रेरित किये जाने की, तभी परिणाम सुखद और सफल होंगे।
-पूजा मिश्रा, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य महिला मोर्चा
परिवार में शिक्षा के स्तर में रखे समानता
कई परिवारों में देखा जाता है कि बेटों को तो पढ़ाई के लिए तमाम संसाधन और व्यवस्था करा दी जाती है लेकिन बेटियों के लिए हाथ तंग रहते हैं। उन्हें सीमित पढ़ाई और संसाधन ही उपलब्ध कराए जा पाते हैं। जबकि आज समाज के पास बेटियों के उच्चतम शिखर पर परचम फहराने के कई उदाहरण हैं। आज देश की बेटियां सेना और इसरो जैसे महत्वपूर्ण जगहों पर अपना मुकाम बना चुकी हैं। नाम रोशन कर रही इन बेटियों के प्रति सोच बदलने की जरूरत है। शहरों में तो अब धीरे-धीरे सुधार आ रहा है। लेकिन जागरूकता की कमी ग्रामीण क्षेत्रों में अभी देखने को मिलती है। लड़कियों के अधिकारों को लेकर एक जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। इसमें पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की बड़ी भूमिका हो सकती है। -सुषमा गर्ग, इनर व्हील क्लब
अभी तो इतिहास रचना बाकी है...
हमें महापुरुषों के प्रसंगों से प्रेरणा लेनी होगी। ये प्रेरक प्रसंग हमें अपने परिवार के बच्चों और करीबियों में साझा करने होंगे। आजादी के पूर्व जिस तरह महिलाओं ने पुरुषों के साथ कंधे से कंधा जोड़कर कार्य किया था कुछ इसी तरह की अनूठी पहल करनी होगी। कहती हैं कि बच्चों में भी बचपन से संस्कार डालने होंगे। बेटा हो या बेटी संस्कार शुरुआत से ही उनमें पिरोने होंगे। तभी वह आगे बढ़ेगा और निर्णायक हालातों में मजबूती से कदम रखेगा। खुले आसमान की तरह ही हर क्षेत्र महिलाओं के लिए खुला है। उन्हें आगे बढ़ना है और इतिहास रचना होगा। -ओम सिंह, वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक
घरों से मिलें अच्छे संस्कार
जहां-जहां महिलाओं का सम्मान होता है वहां लक्ष्मी निवास करती है। लेकिन हमें अपनी बेटियों को भी अच्छे संस्कार देने होंगे तभी एक अच्छे समाज की स्थापना की जा सकती है। माता पिता का फर्ज है कि वह बेटा-बेटी में कोई अंतर न रखें। बेटियों को भी पढ़ाये लिखायें और अच्छी शिक्षा प्रदान करें। एक अच्छे समाज की स्थापना में हम सबको मिलकर संयुक्त पहल करनी होगी। महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों को भी रोकना होगा। कोई भी महिला या बेटी हो उसकी सुरक्षा का दाायित्व पूरे समाज का होता है।
-रीना त्रिपाठी, अध्यक्ष सर्वजन हिताय संघर्ष समिति
दिव्यांग बेटियों को सड़क से रेस्क्यू करा सुरक्षित स्थान पहुंचाया
समाज के लिए हर इंसान का कर्तव्य तय है। बस इसी विचार को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करना चाहिए। 1987 में बनारस से लखनऊ आने पर पढ़ाई के साथ ठेले पर काम करने वाले पांच बच्चों के माता-पिता से बात कर उन्हें स्कूल में प्रवेश दिलाया। उन्हें पढ़ाने की छोटी सी शुरुआत की। आज लगभग 350 बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने तक पहुंच चुकी है। नागरिक सुरक्षा से जुड़ी तो सेवा कार्य की भावना और बलवती हो गई। चीफ वार्डन अमरनाथ मिश्र ने जोड़ा तो कोविड काल में कई लोगों की मददगार बनीं। इसके अलावा लगभग 20 लोगों की जान बचाने में सफलता पाई है। मानसिक दिव्यांग बच्चियों दिखीं तो सड़क से रेस्क्यू करवा प्रशासन से सहयोग लेकर उन्हें सुरक्षित जगह प्रदान कराई। लगभग 3 वर्षों से 50 बच्चियों के लिए राशन का सहयोग किया। कैंसर पीड़ित एक छोटी बच्ची को बचाने के लिए कोशिशें रंग लाईं और आज वह बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है। लड़कियों को स्कूल में नागरिक सुरक्षा की ट्रेनिंग दी जाती है। शहर में किसी भी आपदा के समय एसडीआरएफ की टीम को सहयोग प्रदान किया जाता है। अग्निकांड, बिल्डिंग का गिरना, सड़क दुर्घटना में घायलों को मौके पर प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल पहुंचाने का कार्य किया। स्लम के बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देती हूं। कोविड में कुलियों और ट्रांसजेंडरो को राशन का सहयोग प्रदान किया। -ज्योति खरे, सेक्टर वार्डन, सिविल डिफेंस
जमीं से लेकर आसमान तक दिख रहा महिलाओं का जलवा
एक भी ऐसा क्षेत्र नहीं हैं जहां पर महिलाओं का दखल नहीं है। पेट्रोल पंप कर्मी की जिम्मेदारी से लेकर पायलट बन आसमान का सीना चीर महिलाएं ऊंची उड़ान भर रही हैं। घर की बागडोर के साथ ही समाजिक मंच पर भी महिलाएं आगे आ रही है। अब वह दिन नहीं रहे जब इन्हें अबला कहा जाता था। उनकी आवाज को कुचल दिया जाता थ और सिर्फ घरों तक उनकी पहुंच सीमित थी। यह कहना था पूर्व अंतरराष्ट्रीय भारत्तोलक स्वाति सिंह का। प्रदेश के सर्वोच्च पुरस्कार रानी लक्ष्मी बाई अवार्ड से सम्मानित स्वाति सिंह ने कहा कि सरकारी संस्थानों के साथ ही आज कारपोरेट कार्यालय में महिलाएं छाई हुई है।
वर्ष 2014 में ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में भारत्तोलन में रजत पदक जीतने वाली अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी स्वाति सिंह ने बताया कि शहर ही नहीं, अब गांवों से भी महिलाएं लगातार प्रगति के पथ पर अग्रसर है। इंटरनेट के इस युग में महिलाएं हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने का तैयार हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू हमारे देश में महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है। सांसद और विधायक बन कर महिलाएं अपने क्षेत्र का तेजी से विकास कर रही हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में महिलाओं का बोलबाला है। अंतरिक्ष में छोड़े गए चंद्र यान में भी महिलाओं की विशेष भागीदारी रही। विश्वगुरु बनने के पद पर बढ़ते हुए भारत के कदमों में महिलाओं की हिस्सेदारी को नकारा नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि महिलाएं आज अपने अधिकारों और दायित्वों को लेकर सजग है। खेल में कामयाबी की उड़ान भरने वाली स्वाति ने कहा कि ओलंपिक में अभी चीन और जापान के खिलाड़ी छाए हैं, लेकिन भारतीय खिलाड़ी उन्हें बराबर टक्कर दे रही हैं। आने वाले दिनों में पदकों की अंक तालिका में भारत टॉप पर होगा।
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