बरेली: जन औषधि केन्द्रों पर दवाओं के लाले, 5 पर लटके ताले

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बरेली, अमृत विचार। मरीजों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए जिले में खोले गए 24 जन औषधि केन्द्रों पर वर्तमान में दवाओं का टोटा है। ऐसे में लोगों ने भी आना कम कर दिया है। लोगों के न आने के कारण दुकान संचालकों ने शासन से दवाइयां मंगाना भी कम कर दिया है। जन …

बरेली, अमृत विचार। मरीजों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए जिले में खोले गए 24 जन औषधि केन्द्रों पर वर्तमान में दवाओं का टोटा है। ऐसे में लोगों ने भी आना कम कर दिया है। लोगों के न आने के कारण दुकान संचालकों ने शासन से दवाइयां मंगाना भी कम कर दिया है।

जन औषधि केंद्रों पर स्टाक में आवश्यक दवाइयों की सूची में 40-50 प्रतिशत की कमी है। बीपी, खांसी, बुखार, सर्दी समेत एंटीबायोटिक दवाइयों का भी टोटा है। बुधवार को दवाओं की उपलब्धता जानने के लिए दैनिक ‘अमृत विचार’ ने शहर के विभिन्न जन औषधि केंद्रों पर पड़ताल की तो दावों की पोल खुल गई। पेश है जमीनी हकीकत बयां करती रिपोर्ट…

1- ईसाइयों की पुलिया
शहर के व्यस्ततम इलाकों में शामिल ईसाइयों की पुलिया पर स्थित जन औषधि केन्द्र पर सिर्फ 300 दवाएं ही उपलब्ध मिलीं। दवाओं के अभाव में केन्द्र पर एक-दो लोग ही दिखे। केन्द्र के संचालक अमूल्य गुप्ता ने बताया कि प्रतिदिन ब्रिकी होने वाली दवाओं का ही आर्डर देते हैं परंतु कोरोना काल में आर्डर देने के बाद भी दवाएं समय पर नहीं आ पातीं। इसके कारण लोगों को निराश होना पड़ता है। केन्द्र पर सर्जिकल आइटम भी न के बराबर ही थे।

2- एजाज नगर गौटिया
एजाज नगर गौटिया स्थित जन औषधि केन्द्र पर भी दवाओं की अनुपलब्धता देखने को मिली। केन्द्र संचालक ने बताया कि ग्राहक न आने से खर्च निकलना भी मुश्किल हो गया है। व्यापार में घाटे से बचने के लिए वह इमारत की दूसरी मंजिल पर सामान्य दवाओं का व्यापार भी करते हैं। केन्द्र पर मौजूद सूची में आधी दवाइयां भी मौजूद नहीं थीं। उनका कहना था कि केन्द्र पर ब्रिकी न होने के चलते सर्जिकल आइटम नहीं मंगाते हैं।

3- रामपुर गार्डन
शहर के पॉश इलाके में स्थित केन्द्र पर भी स्थिति बाकी केन्द्रों जैसे ही मिली। रामपुर गार्डन में बड़ी संख्या में अस्पताल होने के बाद भी दवाओं की ब्रिकी न के बराबर होती है। केंद्र संचालक एसएन चौबे ने बताया कि ब्रिकी न होने से वह कम दवाइयां मंगाते हैं। संचालक की मानें तो गरीबों के लिए खोले गए जन औषधि केन्द्रों पर गरीब ही नहीं आते हैं। केंद्र पर आने वाले 95 प्रतिशत लोग संपन्न तबके के होते हैं।

4- कालीबाड़ी
कालीबाड़ी में होली चौराहे के पास मौजूद केंद्र भी दवाइयों की कमी से जूझ रहे हैं। मुख्य मार्ग से 200 मीटर अंदर होने के कारण यहां आने वाले ग्राहकों की संख्या बहुत कम रहती है। ब्रिकी न होने से संचालक ने लिस्ट में मौजूद आधी से ज्यादा दवाओं को मंगाना ही बंद कर दिया है। वर्तमान में यहां 200 दवाइयां ही मौजूद हैं।

केंद्रों पर अनुपलब्ध प्रमुख दवाएं
रेबीप्राजोल, रेनीटिडिन, एजिथ्रोमाइसिन, हाइड्रोक्सीक्वोरोक्वीन, निफीडिपाइना, वाल्सार्टेन टैबलेट, ग्निमिप्राइड, ओलपेटाइडिन, नेवीविवोल टेबलेट

क्या बोले लोग
“जेनेरिक दवाइयां सस्ती होने के बाद भी केंद्रों पर नहीं बिक रही हैं। दवा में मौजूद साल्ट एक होने के बावजूद लोग महंगी दवाओं को प्राथमिकता देते हैं।” -प्रीति, निवासी रामपुर गार्डन

“एक बार दवा लेने के बाद जब दोबारा लेने जाओ तो वह स्टाक में न होने के कारण नहीं मिलती है। मजबूरी में बाहर से महंगी दवा लेनी पड़ती है।” -अक्षय सक्सेना, निवासी पीलीभीत बाईपास

“जन औषधि केंद्रों पर दवाइयां मिलना पक्का नहीं होता। यही वजह है कि हम बाहर से ही दवा ले लेते हैं।” -अनिल, निवासी कालीबाड़ी

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