बदायूं: 2.40 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं दे पाए प्रधान और सचिव, विशेष ऑडिट में हुआ खुलासा 

अनियमितताएं मिलने पर तत्कालीन प्रधान और सचिवों को डीएम ने भेजा नोटिस 

बदायूं: 2.40 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं दे पाए प्रधान और सचिव, विशेष ऑडिट में हुआ खुलासा 

बदायूं, अमृत विचार। जिले के 26 ग्राम प्रधानों व पंचायत सचिवों ने करीब 2.40 करोड़ से अधिक धनराशि का  वारा न्यारा कर डाला। ग्राम पंचायतों के हुए विशेष ऑडिट में इसका खुलासा हुआ है। विशेष टीम को तत्कालीन प्रधान व पंचायत सचिव भुगतान के रिकॉर्ड नहीं दिखा सके। इस पर डीएम व डीपीआरओ ने आरोपी तत्कालीन प्रधानों व पंचायत सचिवों को नोटिस जारी किया है।

विशेष ऑडिट की टीम ने वित्तीय वर्ष 2020-2021 में सरकारी धनराशि से कराए गए कार्यों के भुगतान की जांच में जिले की 26 दो ग्राम पंचायतों में घोटाला होना पाया गया है। बीते वित्तीय वर्ष में इन ग्राम पंचायतों के तत्कालीन प्रधानों व तत्कालीन पंचायत सचिवों की ओर से विभिन्न कार्यों के मद में करीब 2,4,089,166 रुपये मनमाना भुगतान किया गया।

विशेष ऑडिट में घोटाला का खुलासा होने पर डीएम मनोज कुमार ने इन सभी 26  ग्राम पंचायतों के तत्कालीन प्रधानों और डीपीआरओ ने तत्कालीन पंचायत सचिवों को नोटिस जारी करते हुए साक्ष्य समेत जवाब मांगा है। आरोपियों को 15 दिनों के भीतर साक्ष्यों समेत जवाब लेखा परीक्षक के सामने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से अधिकांश सचिवों को अन्य ग्राम पंचायतों पर स्थानांतरण हो चुका है। 

तत्कालीन डीपीआरओ ने नहीं दिया ध्यान 
नियम के मुताबिक ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों व पंचायत सचिवों की ओर से राज्य वित्त व केंद्रीय वित्त समेत विभागीय धनराशि से कराए जाने वाले कार्यों के भुगतान पर नजर रखने के निर्देश हैं। शासन की इस व्यवस्था को तत्कालीन डीपीआरओ नजरअंदाज करते रहे और भुगतान होता रहा। नतीजतन 26 ग्राम पंचायतों में करीब 2.40 करोड़  लाख रुपये का वारा-न्यारा कर दिया गया।

कहा जा रहा है कि उस समय विभागीय अधिकारियों की ओर से भुगतान की जांच की गई होती तो सरकारी राशि का इतने बड़े पैमाने पर दुरुपयोग न हुआ होता। अब डीएम ने तत्कालीन प्रधानों और सचिवों को नोटिस  जारी लेखा टीम के समक्ष अभिलेखों सहित प्रस्तुत होने के आदेश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर उनके द्वारा साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए गए तो न सिर्फ रिपोर्ट दर्ज करा दी जाएगी। बल्कि राजस्व बकाए की भांति वसूली की जाएगी। 

वित्तीय वर्ष 2020-2021 के दौरान खर्च की गई धनराशि का ब्योरा ग्राम पंचायतों से मांगा गया था।  ग्राम पंचायतें ऑडिट में भुगतान का केवल रिकॉर्ड नहीं दिखा सकी हैं। इसी वजह से टीम घोटाला मान रही है,  ग्राम पंचायतों की ओर से कार्य कराया गया है। इसका रिकॉर्ड  लेखा टीम  को ग्राम पंचायतों के लिए दिखाना है। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई होगी- श्रेया मिश्रा, जिला पंचायत राज अधिकारी।

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