बरेली: टीएसी जांच में पास हो गया बरेली-बदायूं हाईवे
बरेली,अमृत विचार। राष्ट्रपति भवन के दखल के बाद राजमार्ग संख्या-33 बरेली-बदायूं फोरलेन के चौड़ीकरण के कार्य में करोड़ों के घोटाले के आरोप की टीएसी जांच में सड़क निर्माण कार्य ठीक मिला है। शिकायतकर्ता के आरोप को तथ्यों के आधार पर जांच कमेटी ने गलत बताया है। सड़क के बारे में हाईकोर्ट में भी वाद दाखिल …
बरेली,अमृत विचार। राष्ट्रपति भवन के दखल के बाद राजमार्ग संख्या-33 बरेली-बदायूं फोरलेन के चौड़ीकरण के कार्य में करोड़ों के घोटाले के आरोप की टीएसी जांच में सड़क निर्माण कार्य ठीक मिला है। शिकायतकर्ता के आरोप को तथ्यों के आधार पर जांच कमेटी ने गलत बताया है। सड़क के बारे में हाईकोर्ट में भी वाद दाखिल किया गया था कि करीब 44 किलोमीटर लंबी सड़क को सपा के शासन काल में पुराना मलबा डालकर बना दिया गया।
वर्ष 2014-17 में बनाए गए राजमार्ग संख्या-33 बरेली-बदायूं फोरलेन के चौड़ीकरण का कार्य 244 करोड़ की लागत से किया गया था। 2017 में कार्य पूरा हुआ तो खर्च बढ़कर 281 करोड़ कर दिया गया। सड़क निर्माण के लिए पीएनसी इंफ्रा टेक को जिम्मेदारी दी गई थी। फोरलेन प्रोजेक्ट का आगणन 244 करोड़ रुपये था लेकिन कंपनी को बाद में 280 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
शिकायतकर्ता गौरव गुप्ता ने शिकायत किया था कि कंपनी ने पुरानी टू लेन सड़क की खुदाई से निकले काले पत्थर के मलबे और तारकोल को भी नई फोरलेन सड़क बनाने में उपयोग किया। इस पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस पर हाईकोर्ट ने 23 अप्रैल 2019 को मामले में टीएसी से जांच कराकर शासन को 15 दिन में शपथ पत्र देने के निर्देश दिए थे।
टीएसी ने शिकायतकर्ता के पते को फर्जी करार दिया कि संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसको देखते उन्होंने जून 2020 में राष्ट्रपति भवन को पत्र भेजकर जांच पूरी कराने की गुहार लगाई। इसके बाद लोक निर्माण के प्रमुख सचिव नितिन गोकर्ण ने उप सचिव ने मुख्य प्राविधिक परीक्षक को जांच का आदेश दिया था। जांच पूरी होने के बाद लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता परिवाद जेपी तिवारी ने मुख्य अभियंता बरेली डीके मिश्र को जांख रिपोर्ट भेजी है।
इसमें बिंदुवार जांख रिपोर्ट में बताया गया है कि शिकायतकर्ता का आधार विहीन आरोप है। पुराने मैटेरियल्स सड़क में नहीं लगाए गए हैं। इसके बाद जो साक्ष्य दिया गया है, वह आधार विहीन है। जबकि दूसरी तरफ जांच रिपोर्ट मिलने के बाद शिकायतकर्ता ने प्रमुख सचिव लोक निर्माण से जांच से संतुष्ट न होने की शिकायत की है।
