अश्लील वीडियो संग्रहित और प्रसारित करने की घटनाओं को बढ़ावा दे रही खराब जांच प्रक्रिया :हाईकोर्ट
प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महिलाओं के अश्लील वीडियो संग्रहित और प्रसारित करने के बढ़ते मुद्दों पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि आईटी से संबंधित अपराधों और साइबर अपराधों की जांच की खराब गुणवत्ता ऐसे अपराधों को बढ़ावा दे रही है। उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति अजय भनोट की एकल पीठ ने आईपीसी और पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामले में मांगे उर्फ रविंद्र को जमानत देने से इनकार करते हुए की। याची पर दुष्कर्म और पीड़िता का अश्लील वीडियो बनाने का आरोप है।
अपराध की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने याची को जमानत का हकदार नहीं माना है, साथ ही ट्रायल कोर्ट को एक वर्ष के भीतर मुकदमे को समाप्त करने का निर्देश भी दिया है। कोर्ट ने निचली अदालत को यह भी निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सभी तुरंत आवश्यक और बलपूर्वक उपाय अपनाए जाने चाहिए। अगर पुलिस अधिकारी वारंट या अन्य बलपूर्वक उपायों को निष्पादित करने में विफल रहते हैं तो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बुलंदशहर हलफनामे में इसका कारण बताएं और वारंट निष्पादित करने के लिए उठाए गए कदमों को बताएं। कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि वारंट निष्पादित करने में देरी और परिणामस्वरुप गवाहों की अनुपस्थिति आपराधिक मुकदमों में देरी के प्रमुख कारणों में से एक है।
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