Bareilly News: अनाथालय प्रबंध समिति नियमों के विरूद्ध चलाना चाहती है गुरूकुल
अनाथालय बंद करने के पीछे गुरुकुल बनाने का तर्क दे रही है प्रबंध समिति
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बरेली, अमृत विचार। शहर के बीच करीब 360 करोड़ कीमत की 42 बीघा जमीन पर स्थापित 140 साल पुराना आर्य समाज अनाथालय को बंद करने की तैयारी गुपचुप ढंग से कई साल पहली ही शुरू कर दी गई थी।
प्रमाण यह है कि प्रबंध समिति ने अनाथालय बंद कर उसकी जगह गुरुकुल बनाने की घोषणा से पहले ही बाल एवं महिला कल्याण बोर्ड में उसके रजिस्ट्रेशन का रिन्युवल नहीं कराया गया। नियमावली के तहत अनाथालय के मूल नियमों में भी बदलाव नहीं किया जा सकता लेकिन इसके बावजूद अनाथालय को बंद करने जैसा सनसनीखेज फैसला लेकर उस पर काम भी शुरू कर दिया गया।
सबसे अहम बात यह है कि प्रबंध समिति ने अनाथालय को बंद करने का फैसला तो ले लिया है लेकिन गुरुकुल बनाने के लिए उसके पास फिलहाल न कोई बजट है, न ही कोई विस्तृत योजना। इसी वजह से अचानक अनाथालय बंद किए जाने का फैसला सार्वजनिक होने के बाद कयास लगाए जाने शुरू हो गए हैं कि असल माजरा क्या है और पर्दे के पीछे कोई और तो नहीं है।
अनाथालय के पूर्व कर्मचारियों के मुताबिक 2022 में ही काफी बच्चों को अनाथालय से निकाल दिया गया था। अब तीन लड़कियां रह गई हैं, उन्हें भी 30 जून तक अनाथालय छोड़ने का अल्टीमेटम दे दिया गया है। हर हालत में 30 जून तक अनाथालय खाली हो जाए, इसे सुनिश्चित करने के लिए प्रबंधन ने उनसे इस संबंध में एग्रीमेंट भी करा लिया है। वह भी तब, जब उसके पास गुरुकुल बनाने के लिए बजट तक नहीं है।
अनाथालय के प्रधान ओमकार आर्या ने रविवार को भी दोहराया कि अनाथालय बंद कर बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए गुरुकुल के निर्माण का फैसला लिया गया है। गुरुकुल में उन्हें परंपरागत शिक्षा के साथ धार्मिक ज्ञान भी दिया जाएगा। गुरुकुल की मान्यता लेने जैसी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
नियमावली: नाम और दायित्वों में नहीं किया जा सकता परिवर्तन
अनाथालय से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर संबद्ध लोगों के मुताबिक अनाथालय की स्थापना के साथ ही प्रबंध समिति के गठन के लिए नियमावली तैयार की थी। इसके मुताबिक अनाथालय के नाम और दायित्वों में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता। न ही अनाथालय को दान में प्राप्त संपत्तियों का उपभोग किसी और काम के लिए किया जा सकता है।
18 साल से कम के बच्चों को रखने के लिए परिषद की अनुमति भी नियमावली में अति आवश्यक बताई गई है।अनाथालय के बच्चों के हित में उसके साथ किसी संस्थान को चलाए जाने की बात जरूर नियमावली में कही गई है लेकिन मौजूदा प्रबंध समिति अनाथालय को स्थाई रूप से बंद कराने का फैसला ले चुकी है। इसी वजह से पहले ही बाल एवं महिला कल्याण परिषद में पंजीकरण का नवीनीकरण कराना बंद कर दिया गया।
प्रशासन ने भी अनाथ लड़कियों की शिकायतों को नहीं सुना कई महीनों से अफसरों और सामाजिक संगठनों के लोगों का आना भी बंद
अनाथालय में रहने वाली लड़कियों की ओर से यहां उनके प्रतिकूल माहौल बनाए जाने के संबंध में कई शिकायतें प्रशासन के अधिकारियों से की जा चुकी हैं। हालांकि इन शिकायतों पर अब न कोई जांच हुई न ही कोई कार्रवाई।
जानकारी के मुताबिक पहले इस अनाथालय में अधिकारियों, राजनेताओं और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों का यहां बच्चों का हालचाल लेने पहुंचने का सिलसिला बना रहता था लेकिन फरवरी के बाद बंद हो गया। काफी समय से यहां कोई बच्चों की जरूरत और खाने-पीने के सामान या आर्थिक मदद करने भी नहीं पहुंचा। काफी समय पहले यहां निरीक्षण करने पहुंचे प्रशासन के अफसरों से लड़कियों ने खुद बात करने के साथ लिखित शिकायतें भी कीं लेकिन उसका भी कोई नतीजा नहीं निकला।
समिति का यह फैसला अनाथ बच्चों के साथ समाज के लिए भी उचित नहीं
आर्य समाज अनाथालय में लंबे समय तक जीवनयापन करने के बाद नोएडा में अपनी फैक्ट्री चला रहे आरके चौहान ने अनाथालय को बंद करने के फैसले पर गहरा अफसोस जताया। उन्होंने कहा कि अनाथालय में रह रहे बच्चों को जबरन निकाला जाना बेहद दुखद है।
समिति का यह फैसला बच्चों के साथ समाज के लिए उचित नहीं है। आरके चौहान ने कहा कि वह अनाथालय को बचाने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे। अनाथालय में गुजरे अपने जीवन और यहां रहने वाले बच्चों से जुड़ाव की वजह से आरके चौहान नियमित रूप से उनके लिए राशन भेजते रहते हैं। लाखों रुपये की आर्थिक मदद भी कर चुके हैं।
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