लंबित सेवानिवृत्ति लाभों के मामले न्यायिक संवेदनशीलता के ह्रास का परिणाम: हाईकोर्ट

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Edited By Amrit Vichar
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृत्यु-सह- सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इस तरह के मामलों की संवेदनशीलता को समझने का उत्तरदायित्व राज्य के पदाधिकारियों का है जो अपने कर्तव्य के निर्वहन में घोर लापरवाही बरत रहे हैं। सेवानिवृत्ति परिलाभों से जुड़े मामलों का 9-10 वर्ष या उससे अधिक देरी तक लंबित रहना कोई आश्चर्यजनक तथ्य नहीं है। भविष्य में न्यायालय द्वारा इस संबंध में डाटा संकलन का निर्देश भी दिया जा सकता है।

ऐसे मामलों के लंबित रहने के कारण न्याय के वितरण में देरी को लेकर संपूर्ण न्याय व्यवस्था और उससे जुड़े अधिकारियों को आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है। मामलों को सुव्यवस्थित करने के लिए मुख्य सचिव जैसे पदाधिकारियों को संज्ञान लेने का निर्देश दिया जाता है, लेकिन आमतौर पर दिन ढलने के साथ ही उनके द्वारा ऐसे निर्देश भुला दिए जाते हैं। ऐसे मामले दर्जनों या सैकड़ों की संख्या में नहीं बल्कि इनकी एक बहुत लंबी अंतहीन श्रृंखला-सी बन गई है।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी वादी को न्यायालय में मामले के लंबित रहने मात्र से कोई लाभ नहीं मिल सकता, क्योंकि अंतरिम आदेश हमेशा मामले में पारित किए जाने वाले अंतिम आदेश में विलीन हो जाता है और अगर रिट याचिका अंततः खारिज हो जाती है तो अंतरिम आदेश स्वत: ही निरस्त हो जाता है। उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति जे जे मुनीर की एकलपीठ ने हितेश कुमार और एक अन्य की याचिका को स्वीकार कर जिला विद्यालय निरीक्षक, बुलंदशहर द्वारा पारित आक्षेपित आदेश को निरस्त करते हुए की, साथ ही संबंधित विभाग एवं अधिकारियों को याची की प्रार्थना के अनुसार उसके पिता के मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभों की गणना को क्रमशः संशोधित और पुनर्निर्धारित करने का निर्देश दिया।

दरअसल डीआईओएस, बुलंदशहर ने याची के पिता को मार्च 2004 से जुलाई 2008 तक की अवधि के लिए राजा महेंद्र प्रताप इंटर कॉलेज,जसनावली खुर्द, बुलंदशहर के प्रधानाचार्य के पद का वेतन देने से इनकार कर दिया था, जिसके कारण याची ने विपक्षियों के लिए एक परमादेश जारी करने का अनुरोध किया, जिससे उसके पिता के कुल वेतन की गणना और वितरण किया जा सके। अंत में कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर याचियों को सभी सेवानिवृत्ति परिलाभों की देयता सुनिश्चित की।

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