National Statistics Day: सांख्यिकी के क्षेत्र में भी हैं बन सकता है भविष्य, पर युवा हैं इससे बेखबर
बरेली, अमृत विचार। सांख्यिकी ऐसा विषय है, जिसका उपयोग आज के समय में लगभग हर क्षेत्र में किया जा रहा है। आज के समय में यह सरकारी क्षेत्रों से लेकर प्राइवेट सेक्टर तक युवाओं के लिए रोजगार के तमाम रास्ते खोल रहा है। सबसे अधिक जॉब इस क्षेत्र में ही उत्पन्न किये जा रहे हैं। लेबर स्टेटिस्टिक्स के अनुसार 2026 तक 33 प्रतिशत नौकरियां सांख्यिकी के क्षेत्र में ही निकलेंगी।
बरेली कॉलेज की सांख्यिकी विभाग की डॉ. शुभ्रा ने बताया कि इकलौता बरेली कॉलेज ऐसा है, जहां सांख्यिकी विषय में परास्नातक की सुविधा है। हालांकि सीटें केवल 15 हैं, जिनमें से लगभग 12 ही भर पाती हैं। रुहेलखंड विश्विविद्यालय के हिंदू कॉलेज, वर्धमान कॉलेज और बरेली कॉलेज ही इस विषय में स्नातक करवाते हैं। बरेली कॉलेज में स्नातक में लगभग 50 से 60 सीटें रहती हैं।
इनमें अधिकांश छात्र इस विषय को आखिरी वर्ष में छोड़ देते हैं। कॉलेज में 50 सालों से पीजी सांख्यिकी और 62 सालों से यूजी कोर्स संचालित है। जानकारी न होने की वजह से छात्र इस विषय को जरूरी नहीं समझते हैं। डॉ. शुभ्रा के अनुसार इस कोर्स को करने के बाद स्वास्थ्य, कृषि, पुरातात्विक विभाग, केमिकल इंडस्ट्री, शिक्षा, साइकोलॉजी, डेटा अनालिस्ट, रिसर्च के क्षेत्र में तमाम मौके हैं। उन्होंने बताया कि बरेली कॉलेज से पीजी करने वाले कई छात्र सरकारी पदों पर कार्यरत हुए हैं साथ ही रिसर्च के क्षेत्र में भी स्थापित हुए हैं।
सांख्यिकी दिवस की पृष्ठभूमि
देश के पहले प्लानिंग कमीशन के अध्यक्ष रहे प्रख्यात सांख्यिकीविद् पीसी महालनोबिस का जन्म दिवस राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के रूप में मनाया जाता है। वह पंचवर्षीय योजनाओं के जन्मदाता भी रहे। पहला राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस 2007 में मनाया गया था। उस आयोजन के बाद 5 जून 2007 को भारतीय राजपत्र में एक घोषणा जारी की गई थी। तब से राष्ट्रव्यापी प्रगति में आधिकारिक सांख्यिकी की भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए इस दिन सेमिनार, सम्मेलन, चर्चाएं और प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं।
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस का महत्व
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस पर युवाओं को सांख्यिकी सीखने और दैनिक आधार पर विभिन्न मामलों में इसका उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाता है। यह दिन व्यक्तियों को यह सीखने और समझने के लिए प्रोत्साहित करता है कि देश की नीतियों को विकसित करने और रूपरेखा बनाने में सहायता के लिए सांख्यिकी का उपयोग कैसे किया जा सकता है।
इन्होंने सांख्यिकी से ही बनाया कॅरियर
मैं इस समय डिपार्टमेंट ऑफ प्लानिंग में कार्यरत हूं। अब सरकार के हर विभाग में एक स्टेटिस्टिक्स विंग बनाई जा रही है।योजनाओं को बनाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।-संजीव कुमार बघेल, पूर्व छात्र
मैं इस समय एक एनजीओ में हेल्थ डेटा रिसर्च एनालिस्ट के रूप में काम कर रहा हूं। ऐसा कोई फील्ड नहीं, जहां सांख्यिकी विषय के ज्ञाताओं की डिमांड न हो। समाज में होने वाले हर छोटे-बड़े बदलावों को भी स्टेटिस्टिक्स से ही दर्शाया जाता है।-प्रदीप राठौर, पूर्व छात्र
मैं शहर में ही सहायक सांख्यिकी अधिकारी के रूप में कार्यरत हूं। पहले नहीं सोचा था कि यह विषय जीवन में इतना सहायक रहेगा, लेकिन आज के समय में इस क्षेत्र में सरकारी के साथ प्राइवेट सेक्टर में भी अपार संभावनाएं सामने आ रही हैं।-अनुपम पाराशरी, पूर्व छात्र
-मैं इस समय बांदा कृषि विश्वविद्यालय में स्टेटिस्टिकल असिस्टेंट प्रोफेसर हूं। कृषि में सबसे अधिक सांख्यिकी का इस्तेमाल किया जाता है। जो भी नई नौकरियां शुरू हो रही हैं, उनमें से अधिकांश में सांख्यिकी के विद्यार्थियों की मांग बनी हुई है।-गौरव शुक्ला,पूर्व छात्र
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