पश्चिमी यूपी का सबसे प्रदूषित शहर रहा मुरादाबाद

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Edited By Amrit Vichar
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मुरादाबाद,अमृत विचार। मौसम विभाग से प्रदूषण संबंधित जारी होने वाले आंकडे़ पश्चिमी यूपी के लिए चौंकाने वाले हैं। खासतौर पर मुरादाबाद को प्रदूषण लगातार अपनी गिरफ्त में ले रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार 387 एक्यूआई के साथ मुरादाबाद पश्चिमी यूपी का सबसे प्रदूषित शहर घोषित किया गया है, जबकि प्रदूषण के मामले में हमेशा …

मुरादाबाद,अमृत विचार। मौसम विभाग से प्रदूषण संबंधित जारी होने वाले आंकडे़ पश्चिमी यूपी के लिए चौंकाने वाले हैं। खासतौर पर मुरादाबाद को प्रदूषण लगातार अपनी गिरफ्त में ले रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार 387 एक्यूआई के साथ मुरादाबाद पश्चिमी यूपी का सबसे प्रदूषित शहर घोषित किया गया है, जबकि प्रदूषण के मामले में हमेशा निशाने पर रहने वाले कानपुर का एक्यूआई सोमवार को 267 दर्ज किया गया है।

वहीं पश्चिमी यूपी में दूसरे व तीसरे नंबर पर आने वाले ग्रेटर नोयडा व गाजियाबाद भी लगातार प्रदूषण की चपेट में आ रहे हैं। जारी आंकड़ों ने मौसम विभाग के अफसरों की परेशानी बढ़ा दी है। जिसकी वजह है कि सर्दियों में कोहरे के कारण प्रदूषण का एक्यूआई लगातार बढ़ने की आशंका है।

ऐसे में एक्सपर्ट अब रिसर्च के बाद आईआईटी कानपुर द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट पर काम करने की तैयारी में जुट गए हैं। जिसके तहत पानी का छिड़काव कर कोहरे के कारण सड़कों पर जमी धूल को साफ करना है। वहीं अफसर लगातार मुरादाबाद में बढ़ रहे वायु प्रदूषण की वजह की वजह शहर में ई-कचरा गलाने के लिए चल रही भट्टियों को बता रहे हैं।

कुछ ऐसे चपेट में आ रहा महानगर 
मौसम विभाग के अफसरों की मानें तो उत्तराखंड के समीप होने के कारण मुरादबाद तराई हिस्से में आता है। यहां पर ठंड का अन्य शहरों की बजाए अधिक होता है। जिस कारण सर्दियों में हर साल कोहरे का कहर देखने को मिलता है। बढ़ रहे प्रदूषण के कारण साल दर साल बढ़ रहा कोहरा हमारे वायुमंडल के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। भीषण कोहरे के कारण तेज धूप न होने के आसमान पर धुएं की एक चादर छा जाती है, जिससे एक्यूआई के स्तर में अचानक इजाफा हो जाता है। इसके अलावा वाहनों से निकलने वाला धुआं और धूल-मिट्टी भी सड़कों पर जम जाती है। जिससे लोगों के अंदर सांस की बीमारी का सामना करना पड़ता है।

ये है एक्यूआई का मानक
0-50——- अच्छी
51-100——संतोषजनक
101-200—–मध्यम
201-300—-खराब
301-400—-बहुत खराब
401-500—–गंभीर
———
महानगर का एक्यूआई की स्थिति –
तारीख———–एक्यूआई
19अक्टूबर——377
20अक्टूबर ——355
21अक्टूबर——-365
22अक्टूबर——345
23अक्टूबर——355
24 अक्टूबर——359
25अक्टूबर——367
26अक्टूबर——387
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पश्चिमी यूपी के पांच सबसे प्रदूषित शहर
शहर——– एक्यूआई
मुरादाबाद——-387
ग्रेटर नोयडा—–384
गाजियाबाद——365
मेरठ———331
आगरा——–285

अनामिक त्रिपाठी, नैम्प कोर्डिनेटर, हिन्दू कालेज ने बताया कि पिछले दिनों मौसम विभाग के अफसरों के साथ हुई बैठक में सदियों में सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव कराने पर सहमति बनी थी। इसके लिए नगर-निगम को भी पत्र भेजा जा चुका है। कुछ इलाकों में छिड़काव होने की जानकारी भी मिल रही है। तराई वाला हिस्सा होने के कारण यहां पर वायू प्रदूषण अधिक हो रहा है। जिसकी मुख्य वजह ईकचरा गलाने के लिए धधकने वाली भट्टियां हैं।

डा. अंकुर गोयल, विशेषज्ञ ने बताया कि लगातार प्रदूषण बढ़ना वाकई चिंताजनक है। ऐसे में लोगों को खुद सजग रहने की जरूरत है। सांस लेने में समस्या के साथ ही आंखों संबंधी बीमारियां बढ़ जाती है। मौसम विभाग के साथ ही अन्य जिम्मेदार अफसरों को एक्यूआई कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

अफसरों की लापरवाही से बढ़ रहा प्रदूषण
मुरादाबाद। प्रदूषण की स्थिति भयावह होने के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर सुधार लाने के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। यही वजह है कि प्रदूषण की मुख्य वजह बन रही भट्टियों का संचालन पूरी तरह से बंद नहीं हो सका है। यह आलम तब है जब प्रदूषण विभाग लगातार इन भट्टियों के संचालन पर रोक लगाने की मांग कर रहा है। दावे तो तमाम किए जाते हैं लेकिन हकीकत में अभी भी रामगंगा नदी के किनारे बसे गांवों में चोरी-छुपे यह भट्टियां धधक रही है। कई दफा इस अवैध कारोबार पर पुलिस कर्मियों की संलिप्तता भी सामने आ चुकी है।

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