गोंडा: 15 बुजुर्गों को मृत दिखाकर रोकी पेंशन, जांच शुरू, जानें पूरा मामला
करनैलगंज ग्रामीण गांव में 15 बुजुर्गों को मृत दिखाकर रोकी गयी है पेंशन
गोंडा, अमृत विचार। करनैलगंज तहसील के ग्राम पंचायत करनैलगंज ग्रामीण के रहने वाले 15 बुजुर्गों को मृत दिखाकर उनकी पेंशन रोके जाने के मामले की जांच शुरू हो गयी है। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने संबंधित पटल लिपिक से पत्रावली तलब की है तथा करनैलगंज के एडीओ समाज कल्याण से रिपोर्ट मांगी गयी है।
ग्राम पंचायत करनैलगंज ग्रामीण के रहने वाले 15 से अधिक बुजुर्ग महिला पुरुषों ने तहसील दिवस में जिलाधिकारी के सामने उपस्थित होकर शिकायत की थी कि उन्हे मृतक दिखाकर उनकी पेंशन रोक दी गयी है। डीएम ने मामले की जांच कराने का निर्देश दिया था। अमृत विचार ने बुजुर्गों की समस्या को अपने बृहस्पतिवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

खबर का संज्ञान लेते हुए जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश चौधरी ने इसकी जांच शुरू कर दी है। उन्होने करनैलगंज के एडीओ समाज कल्याण से सत्यापन रिपोर्ट की आख्या तलब की है। वहीं पेंशन का पटल देख रहे लिपिक से भी संबंध में पत्रावली मांगी गयी है। उन्होने बताया कि जिन लोगों ने शिकायत की है उनका नाम मृतकों की सूची में नहीं है। पेंशन कैसे रोकी गयी है इसकी जांच की जा रही है।
तहसील दिवस में इन बुजुर्गों ने की थी शिकायत
करनैलगंज ग्रामीण के रहने वाले रामकुमार मौर्य ने तहसील गिवस में शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि उनके गांव के जिन बुजुर्ग लाभार्थियों को वृद्धावस्था पेंशन मिल रहा था, उन्हे एक साल पहले मृतक दिखाकर उनकी पेंशन रोक दी गयी।
जिन लोगों की पेंशन रोकी गयी है उनमें करनैलगंज ग्रामीण निवासी चंद्रकली, जुगरा, छबिलाल, जन्नतुल निशा, कैलाश सिंह, आशिया, गंगाराम, हृदयराम, सरोज देवी, बसंती देवी, सुषमा देवी, भानमती, प्रेम कुमार, नसीम और ननकऊ शामिल हैं। लाभार्थियों ने भी बताया कि वह जीवित हैं और उन्हे मृत दिखा दिया गया।
आरोप है कि सत्यापन कर रहे सचिव ने गांव में आने के बजाय बाहर ही बैठकर सत्यापन रिपोर्ट तैयार कर ली। इस लापरवाही से 15 बुजुर्गों को अपनी पेंशन से हाथ धोना पड़ा। खंड विकास अधिकारी जेएन राव ने मामले की जानकारी से इंकार किया था।
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