बरेली: एक बटन दबाने पर तय होती है रेल यात्रियों की सुरक्षा की गारंटी, अब रिकॉर्डिंग से तय होगी जिम्मेदारी

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Edited By Amrit Vichar
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मोनिस खान, बरेली। फर्ज कीजिए कि आप ट्रेन में सफर कर रहे हैं। अचानक ट्रेन को रोक दिया जाता है। लोग शिकायतें कर रेलवे को कोसने लगते हैं, लेकिन अधिकतर मामलों में इस तरह के फैसले रेलवे ट्रैक संरक्षित करने और रेल यात्रियों को सुरक्षित करने के लिए ही होते हैं। रेल पथ और टीआरडी (ट्रैक डिस्ट्रीब्यूशन) विभाग पर भी रेल संचालन से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारियां होती हैं।

इसी को समझाने के लिए इज्जतनगर रेल मंडल प्रशासन की तरफ से मीडिया को सेफ्टी विजिट कराने के साथ ही रेल पथ व टीआरडी से जुड़ी कार्यप्रणाली बताई गई। इस दौरान बताया गया कि किस तरह सिर्फ एक बटन दबाने पर यात्रियों की सुरक्षा की गारंटी रेलवे तय करता है।

एसएसई (सीनियर सेक्शन इंजीनियर) रेलपथ जेपी भारद्वाज ने बताया कि उनके 65 किलोमीटर के सेक्शन में 170 रेल पथ कर्मचारी काम करते हैं। ट्रैक की निगरानी, फिटिंग, रेल चेंज, रिपेयर, स्लीपर बदलने जैसे काम हर मिनट, हर घंटे चलते हैं। तब जाकर रेलवे ट्रैक को पूरी तरह संरक्षित रखा जाता है। हर दो किलोमीटर पर तैनात गैंगमैन इस बात की निगरानी करते हैं कि कहीं रेलवे ट्रैक में कोई गड़बड़ी तो नहीं।

इन गैंगमैन को एक जीपीएस कॉलिंग डिवाइस दी जाती है, जिसमें मौजूद तीन बटन सेक्शन जेई, एसएसई रेलपथ और इंजीनियरिंग कंट्रोल रूम के लिए होते हैं। जरा सी भी गड़बड़ी मिलने पर पेट्रोलिंगकर्मी (गैंग मैन) प्रक्रिया के अनुसार ट्रैक को संरक्षित कर बटन दबाकर संबंधित विभाग और अधिकारियों को सूचित करता है।

एसएसई रेलपथ ने बताया कि ट्रैक की पेट्रोलिंग मौसम के हिसाब से अलग-अलग है। सर्दी में जहां दो पेट्रोलिंग स्टाफ रात 11 से सुबह छह बजे तक निगरानी करते हैं वहीं गर्मियों में एक स्टाफ की ड्यूटी लगाई जाती है। बरसात में संभावित मिट्टी कटान वाले क्षेत्रों में पेट्रोलिंग अनिवार्य है। पेट्रोलिंग के अलावा मरम्मत आदि कार्यों के लिए एक दिन पहले संबंधित सेक्शन में ब्लॉक लेना पड़ता है।

इसके अलावा एक महीने के अंदर पूरे ट्रैक की ट्रॉलिंग ( ट्रॉली से निरीक्षण) करनी होती है। विजिट के दौरान सीनियर डीसीएम इज्जतनगर रेल मंडल संजीव शर्मा, पीआरओ इज्जतनगर मंडल राजेंद्र सिंह, सहायक मंडल इंजीनियर देशराज सिंह आदि उपस्थित रहे।

टॉवर वैगन की भी दी जानकारी
भोजीपुरा रेलवे स्टेशन के पास मौजूद टॉवर वैगन शेड का विजिट भी कराया गया। यहां मौजूद एसएसई टीआरडी सुशील कुमार ने ट्रैक डिस्ट्रीब्यूशन विभाग की कार्यप्रणाली और टॉवर वैगन का उपयोग बताया। उन्होंने बताया कि टॉवर वैगन का उपयोग उस परिस्थिति में किया जाता है, जब किसी सेक्शन में ओएचई ब्रेकडाउन की सूचना मिलती है। लिहाजा पॉवर ब्लॉक होने के कारण डीजल से चलने वाले टॉवर वैगन के जरिए मरम्मत आदि की जाती है। स्केडर प्रणाली कहीं पर भी होने वाले ब्रेकडाउन की सूचना टीआरडी कंट्रोल रूम को देती है। उन्होंने बताया कि ओएचई के प्रत्येक खंभे का साल में एक बार निरीक्षण और हर 15 दिन में फुट पेट्रोलिंग की जाती है।

अब रिकॉर्डिंग से तय होगी जिम्मेदारी
इज्जतनगर रेल मंडल के सीनियर डीसीएम संजीव शर्मा ने बताया कि अब सभी रेलवे क्रॉसिंगों पर वॉइस लॉगर लगाया जा चुका है। इसके बाद गेटमैन किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं कर पाएंगे। स्टेशन मास्टर और गेटमैन के बीच की बातचीत इस वॉइस लॉगर के अंदर रिकॉर्ड हो जाती है। लिहाजा किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आने पर वॉइस रिकॉर्डिंग सुनकर जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

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