बरेली : भारत के मुसलमान शर्मिंदा, बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमला इस्लाम के खिलाफ -शहाबुद्दीन

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Edited By Pradeep Kumar
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बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर भड़के मौलाना शहाबुद्दीन

बरेली, अमृत विचार। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा है कि बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट किया जाना राजनीतिक इच्छाओं का प्रर्दशन और कट्टरपंथी विचारधारा वालों को सत्ता हासिल करने का जरिया है। ये बेहद अफसोसनाक बात है। बांग्लादेश में छात्र और जनता ने मिलकर तख्तापलट को अंजाम दिया। इस तरह की राजनीतिक घटनाएं विदेशों में होती रही हैं। मगर सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि बंगलादेश में हिन्दू अल्पसंख्यकों के घरों में आग लगा दी गई। बांग्लादेश के आंदोलनकारियों की हरकत से भारत का मुसलमान शर्मिंदा हो रहा है। 

मौलना ने कहा कि कई लोगों को मारा गया, साथ ही मंदिरों में भी तोड़फोड़ की गई। अब अल्पसंख्यको के हालात ये हैं कि वो अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। भारत की सरहद पर हजारों की तादाद में अल्पसंख्यक जमा हो चुके हैं, वो भारत के अंदर दाखिल होना चाहते हैं। मौलाना अल्पसंख्यको की स्थिति देखते हुए बांग्लादेश के आंदोलनकारियों पर जम कर बरसे और उनको नसीहत दी कि इस्लाम और पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षा ये नहीं है कि इस्लाम के मानने वाले गैर मुस्लिमों पर ज़ुल्म करें और मंदिरों को निशाना बनाएं। इस्लाम सभी को सम्मान देने की बात करता है, इस्लाम मानवतावादी धर्म है, इस्लाम किसी दूसरे धर्म को मानने वाले की इबादतगाहों को तोड़फोड़ करने और आग लगाने की इजाजत नहीं देता है। बल्कि ऐसी परिस्थितियों में उनको सुरक्षा प्रदान करने की बात करता है। ये आंदोलनकारी कैसे हैं ? और किस तरह इन्होंने इस्लाम को पढ़ा हैं, जो इस्लाम की शिक्षा के खिलाफ काम कर रहे हैं।

मौलाना ने कहा कि बंगलादेश में हो रहे हिंदुओं पर हमले की वजह से भारत के मुसलमानो को शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है। मौलाना ने मीडिया के माध्यम से बंगलादेश के आंदोलनकारीयो को नसीहत देते हुए कहा कि सत्ता हासिल करने का जो भी मकसद हो उस सिलसिले में जो चाहें करें , मगर अल्पसंख्यकों के मकानों में आगजनी और मंदिरों में तोड़फोड़ न करें। बंगलादेश में प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने वाले मोहम्मद युनूस और आंदोलन के कन्वीनर नवेद इस्लाम के ऊपर सबसे बड़ी जिम्मेदारी बनती है कि वो अल्पसंख्यको की सुरक्षा के पुख्ता इंतेजामात करें।

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