Unnao News: सावन में भी नहीं बरसे मेघ, सूख गया कभी न सूखने वाला ‘सूरजकुंड’

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द्वापर युग से जुड़ा है इस सूरजकुंड का रहस्य

उन्नाव, अमृत विचार। सावन के महीने में भी आसमान में बादलों की अठखेलियां तो दिख रहीं हैं लेकिन रोजाना घुमड़ने के अलावा मेघ दो-चार घंटे तक जमकर नहीं बरस रहे। ग्रामीणों के अनुसार ऐसा पहली बार देखा गया है कि कभी न सूखने वाला क्षेत्र का मशहूर सूरजकुंड सूखा पड़ा है। 

बांगरमऊ क्षेत्र के बिल्हौर मार्ग किनारे गांव पंचू पुरवा व मदार नगर के बीच स्थित प्राचीन सूरजकुंड तालाब का इतिहास द्वापर युग से जुड़ा है। बताते हैं कि अज्ञात वास को जाते समय पांडवों ने यहां विश्राम किया था। अर्जुन ने अपने वाण से यहां पानी निकाला और प्रवास के दौरान वे इसी कुंड का पानी इस्तेमाल करते रहे थे। 

बाद में इसे सूरजकुंड कहा जाने लगा। इसी सूरजकुंड के पास पंचपीर बाबा की मजार है। बुजुर्ग बताते हैं कि वस्तुत: पांच पांडव के नाम से ही इस स्थान का नाम पंचवीर भी पड़ा। जो समय बीतने के बाद पंचपीर कहा जाने लगा। सूरजकुंड के पास स्थित गांव मदारनगर, पंचूपुरवा, पुरहनियां, कारपुरवा व मिसिरखेड़ा सहित आधा दर्जन गांव के बुजुर्गों ने बताया कि उनकी याद में सूरजकुंड का पानी मई-जून के महीनों में भी कभी नहीं सूखा था।

बल्कि यह इतना गहरा रहा कि लोग गर्मियों में भी इस कुंड में स्नान करने से डरते थे। किंतु इस वर्ष बारिश के मौसम में सावन माह के दौरान भी सूरजकुंड में एक बूंद पानी नहीं दिख रहा है। जिससे आसपास के ग्रामीण आश्चर्य चकित हैं।

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