लखीमपुर खीरी : किसान नेताओं ने खत्म किया चक्का जाम, शारदा बैराज के खुलेंगे दस गेट

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Edited By Pradeep Kumar
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भाकपा माले व किसान संगठनों ने मांगों को लेकर किया चक्का जाम

लखीमपुर खीरी, अमृत विचार। शारदा बैराज के गेटों को 15 सितंबर तक खुला रखने की मांग को लेकर भाकपा माले एवं किसान संगठनों ने गुरुवार को लखीमपुर ढखेरवा मार्ग जाम कर दिया। रास्ता बंद होने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंचे एसडीएम निघासन व सदर ने समझा बुझाकर जाम खुलवाने का प्रयास किया। लेकिन किसान संगठन के पदाधिकारी टस से मस नहीं हुए। आखिरकार बैराज के दस गेट खुला रखने की बात पर सहमत बनने पर चक्का जमा खत्म हुआ। तब जाकर रास्ते पर आवागमन बहाल हुआ।

अखिल भारतीय किसान महासभा, भाकपा माले सहित संयुक्त किसान मोर्चा आदि के पदाधिकारी और किसान ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत गुरुवार को शारदा बैराज मार्ग पर बैठ गए। सैकड़ों की तादाद में किसानों के बैठने से लखीमपुर ढखेरवा मार्ग पर दोपहर 01:30 से शाम 04 बजे तक आवागमन पूरी तरह से बंद रहा। इससे बैराज के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई। चक्का जाम की सूचना पर पुहंचे एसडीएम निघासन व सदर ने लोगों को समझा बुझाकर जाम खुलवाने का प्रयास किया। लेकिन इसमें असफल रहे। कामरेड कृष्णा अधिकारी के नेतृत्व में रामदरस, किसान यूनियन टिकैत गुट व अन्य किसान पदाधिकारियों ने छः सूत्रीय मांगों में 15 सितंबर तक बैराज के 10 गेट खुला रखने पर सहमति बनी, जिसकी जिम्मेदारी एसडीएम सदर व निघासन ने ली, तब जाकर किसान संगठनों ने वाहनों के लिए रास्ता खोला। कामरेड कृष्णा अधिकारी एवं अन्य किसान नेताओं ने शारदा सहायक परियोजना के स्थानीय अधिशाषी अभियंता पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार करने की मांग की है। किसान यूनियन टिकैत गुट दिलबाग सिंह, जसपाल सिंह पल्ला, डॉ. बेनजीर उमर, राम सिंह, सिख संगठन के शीतल सिंह, गुरुप्रीत सिंह रंधावा आदि मौजूद रहे।

खनन माफिया के हवाले पूरी परियोजना
बैराज के गेट खुले रखने की बात पर सहमति बनने पर अनशन पर बैठे लोगों को चाय पिलाकर अनशन समाप्त हुआ। रामदरस ने आरोप लगाया कि पूरी परियोजना खनन माफियाओं के हवाले कर दी गई। बैराज पर पानी रोकने से नहर और नदी में बालू भर गई है। एक तरफ सिल्ट सफाई के नाम पर बजट हड़पा जा रहा है और दूसरी तरफ नदी और नहर में बालू जमा कर खनन माफियाओं के हवाले कर दी जा रही है। उन्होंने कहा कि जमीन और परियोजना दोनों को बचाने के लिए हम सभी को संघर्ष करना है।

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