प्रयागराज : अप्राकृतिक यौन शोषण के आरोपी पुजारी को जमानत देने से किया इनकार
अमृत विचार, प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अप्राकृतिक दुष्कर्म के आरोपी एक पुजारी को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि कथित अपराध सामाजिक ताने-बाने को आघात पहुंचाता है, साथ ही न्याय की अंतरात्मा को झकझोरने वाला है। 12 वर्षीय नाबालिग पीड़ित के बयान से अपराध की गंभीरता स्वत: स्पष्ट हो जाती है। कोर्ट ने पीड़ित के दुख को समझते हुए और अपराध की जघन्यता को ध्यान में रखकर आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया।
उक्त आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने आईपीसी की धारा 377 और पोक्सो अधिनियम के तहत पुलिस स्टेशन आदमपुर, अमरोहा में दर्ज मामले में मंदिर के पुजारी आरोपी जमना गिरी की जमानत याचिका को खारिज करते हुए पारित किया है। मामले के अनुसार इसी साल की 9 फरवरी में पीड़ित लड़का एक मेले में गया था और उसके वापस न लौटने पर उसके चाचा ने उसकी तलाश शुरू की तो एक स्थान पर लड़के को रोता हुआ पाया। चाचा की पूछने पर बच्चे ने बताया कि एक पुजारी ने उसे मंदिर में ले जाकर उसके साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाए।
इसके बाद आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और वह 10 फरवरी 2024 से जेल में निरुद्ध है। हालांकि आरोपी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि गांव की दुश्मनी के कारण उसे झूठा फंसाया गया है। शिकायतकर्ता (बच्चों का चाचा) आरोपी को मंदिर से हटाना चाहता था, जिसके कारण उसने झूठी प्राथमिकी दर्ज कराई। अधिवक्ता ने आगे कोर्ट को बताया कि मेडिकल रिपोर्ट से कथित अपराध का कोई संकेत नहीं मिलता हैं और जांच के दौरान पीड़ित के शरीर पर कोई बाहरी चोट भी नहीं पाई गई।
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