Banda: हाईकोर्ट के फैसले के बाद शिक्षकों पर कसने लगा बैंकों का शिकंजा, लोन रिकवरी को लेकर बैंकों ने बढ़ाया दबाव
बांदा, अमृत विचार। कहते हैं कि जब किसी पर आफत के बादल मंडराते हैं, तो चारों तरफ से मुश्किलें बढ़ने लगती हैं। ऐसा ही कुछ हो रहा है 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में फंसे शिक्षकों पर। जहां एक ओर उच्च न्यायालय ने शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सूची को निरस्त करने और तीन माह में नई सूची जारी करने का आदेश सुनाया है, वहीं अब नौकरी पर लटकती तलवार को देखकर स्थानीय बैंकों ने भी अपने लोन रिकवरी को लेकर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
बताते चलें कि बीती 16 अगस्त को उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती मामले में फैसला सुनाते हुए सूची को निरस्त कर दिया था और तीन माह के अंदर नई सूची जारी करने की हिदायत दी थी। जहां एक ओर राज्य सरकार शिक्षक भर्ती मामले को लेकर तमाम कानूनी पहलुओं पर विचार करते हुए अपनी रणनीति तैयार कर रही है, वहीं स्थानीय स्तर पर बैंकों ने अब भर्ती मामले में घिरे शिक्षकों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
विगत दिनों जिला सहकारी बैंक के सचिव मुख्य कार्यपालक अधिकारी जगदीश चंद्रा ने बांदा-चित्रकूट के सभी शाखा प्रबंधकों को स्पष्ट आदेश जारी किया है कि भर्ती मामले से संबंधित सहायक अध्यापकों को स्वीकृत किसी भी प्रकार के ऋण की शत प्रतिशत वसूली सुनिश्चित कराई जाए और शिक्षकों की भर्ती को लेकर स्थिति स्पष्ट न होने तक किसी भी तरह का ऋण, परसनल लोन या ओडी लिमिट आदि का भुगतान न किया जाए।
बैंक के सचिव का आदेश जारी होते ही दोनों जिलों के शाखा प्रबंधक हरकत में आ गए हैं और ऋणी सहायक अध्यापकों की सूची तैयार करने में जुट गए हैं। साथ ही बैंक कर्मचारियों ने ऋण वसूली को लेकर शिक्षकों की सूची तैयार करके रिकवरी का दबाव बनाना भी शुरू कर दिया है। बताते हैं कि ऐसा ही एक पत्र एक अन्य बैंक के उच्चाधिकारियों ने भी जारी किया है।
सियासी दबाव में वापस लेना पड़ा रिकवरी का फरमान
बांदा डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सचिव जगदीश चंद्रा ने जैसे ही ऋणी शिक्षकों पर शिकंजा कसने के लिए लोन रिकवरी व नए लोन पर रोक लगाने का फरमान जारी किया। मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी ने इसे मुद्दा बना दिया और पार्टी के एक्स हैंडल पर इसे लेकर विरोध दर्ज करना शुरू कर दिया।
उधर, टीचर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी के चेयरमैन जयकिशोर दीक्षित ने भी मामले को जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बताया है। कहा कि सरकार अभी पूरे मामले के कानूनी पहलुओं पर विचार कर रही है और प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद जो निर्णय होगा, उसके मुताबकि कार्य किया जाएगा। श्री दीक्षित ने बताया कि फिलहाल बैंक की ओर ऋणी शिक्षकों की सूची मांगी गई है, उसे तैयार किया जा रहा।
उन्होंने शिक्षकों को भरोसा दिलाया है टीचर्स सोसाइटी शिक्षकों के साथ है, किसी को हड़बड़ाने की जरूरत नहीं है। हालांकि बढ़ते सियासी दबाव के बाद मंगलवार को बैंक के सचिव श्री चंद्रा ने सभापति के निर्देश का हवाला देते हुए आनन फानन में अपने आदेश को निरस्त कर दिया है। मंगलवार को जारी पत्र में कहा गया है कि शिक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में बैंक ने ऋण की धनराशि की सुरक्षा की दृष्टि से सूची आदि तैयार करने का निर्देश दिए गए थे। लेकिन बैंक के सभापति पंकज अग्रवाल ने पत्र का संज्ञान लेते हुए निर्देश की समीक्षा करने और अग्रिम आदेशों तक किसी भी कार्रवाई को निरस्त रखने का निर्देश दिया है।
