मुरादाबाद: जमानत मिली पर जेल से रिहा नहीं हो सके इंडोनेशिया के जमाती

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Edited By Amrit Vichar
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मुरादाबाद,अमृत विचार। दिल्ली में हुए कार्यक्रम में शामिल होने इंडोनेशिया से आए आठ जमातियों को जमानत मिलने के बाद भी जेल से रिहाई नहीं हो सके है। रिहाई का परवाना जेल पहुंचने से पहले हाईकोर्ट के एक आदेश ने उनकी परेशानी बढ़ा दी। यही वजह रही कि करीब सवा तीन माह पहले जमानत मिलने के …

मुरादाबाद,अमृत विचार। दिल्ली में हुए कार्यक्रम में शामिल होने इंडोनेशिया से आए आठ जमातियों को जमानत मिलने के बाद भी जेल से रिहाई नहीं हो सके है। रिहाई का परवाना जेल पहुंचने से पहले हाईकोर्ट के एक आदेश ने उनकी परेशानी बढ़ा दी। यही वजह रही कि करीब सवा तीन माह पहले जमानत मिलने के बाद जमातियों के वतन लौटने की राह नहीं खुल सकी है। कोर्ट के आदेश के बाद उनका केस बरेली सीजेएम कोर्ट स्थानांतरित हो गया है। अब फिर उनकी जमानत पर वीसी के जरिए सुनवाई हो रही है।

कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए 22 मार्च के बाद लगे जनता कर्फ्यू के बाद लाकडाउन घोषित कर दिया गया था। शुरुआत में जिले में केवल एक की कोरोना संक्रमित निकला लेकिन दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम के बाद जब जमाती मुरादाबाद पहुंचे तो पूरा मंडल कोरोना की चपेट में आ गया। जमातियों के संपर्क में आने वाले अधिकतर लोग कोरोना संक्रमित निकले। इसके बाद पुलिस-प्रशासन ने काफी सख्ती कर दी थी। जमातियों के साथ ही उनके संपर्क में आए लोगों को क्वारंटाइन कर दिया गया था।

अप्रैल में एक मस्जिद में मिले थे इंडोनेशिया के आठ जमाती
दिल्ली में हुए कार्यक्रम में देश के अलावा विदेशों में रहने वाले जमातियों ने शिरकत की थी। पुलिस ने अपनी कार्रवाई शुरू की तो जमातियों ने बचने के लिए मस्जिदों का अपना ठिकाना बना लिया। अप्रैल के पहले सप्ताह में सूचना मिलने पर ठाकुरद्वारा पुलिस ने एक मस्जिद में छापा मारा तो वहां पर आठ जमाती मिले। पूछने पर मालूम हुआ कि सभी इंडोनेशिया से आए हैं। इसके बाद सभी को क्वारंटाइन कर दिया गया। बाद में उनके खिलाफ आपदा अधिनियम व महामारी एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया। पुलिस ने सभी के पासपोर्ट भी जब्त कर लिए।

50-50 हजार के निजी मुचलके पर मिली थी सशर्त जमानत
इंडोनेशिया के जमातियों के जेल जाने के बाद उन्होंने अपनी जमानत कराने का प्रयास शुरू कर दिया। जमातियों के अधिवक्ता फसी उल्लाह ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया। हालांकि कोरोना के कारण कोर्ट बंद रहने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। नौ जुलाई को कोर्ट में जमातियों की अर्जी पर सुनवाई हुई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलील और इंडोनेशिया दूतावास के अधिकारियों की गारंटी पर सभी को 50-50 हजार के निजी मुचलके पर सशर्त जमानत दे दी गई थी। साथ ही कोर्ट ने कहा कि दूतावास की यह जिम्मेदारी होगी कि सुनवाई के दौरान जमातियों को कोर्ट में पेश किया जाए।

हाईकोटे के आदेश से लगा रिहाई पर अड़ंगा
बताते हैं कि कोर्ट में रिहाई का परवाना पहुंचने से पहले हाईकोर्ट के एक आदेश ने अड़ंगा लगा दिया। यही वजह रही कि जमानत मिलने के करीब सवा तीन माह बाद भी वह रिहा नहीं हो सके हैं। जमातियों के अधिवक्ता फसी उल्लाह के अनुसार हाईकोर्ट ने जमातियों की अर्जी पर सुनवाई के लिए पूरे प्रदेश को छह जोन में बांट दिया था। एक जोन में बरेली व मुरादाबाद मंडल के जिलों को शामिल किया गया था। इस आदेश के बाद यह केस बरेली स्थित सीजेएम कोर्ट हस्तांनतिरत कर दिया गया है। जहां से एक बार फिर वीसी के जरिए उनकी अर्जी पर सुनवाई हो रही है। बरेली सीजेएम कोर्ट के फैसले के बाद उनकी जमानत पर संशय खत्म होगा।

मुरादाबाद जिला कारागार जेल अधीक्षक उमेश कुमार सिंह ने बताया कि इंडोनेशिया के जमातियों को जमानत मिलने की बात मालूम पड़ी थी लेकिन रिहाई का परवाना न आने के कारण वह अभी जेल में ही हैं। वीसी के जरिए उनकी अर्जी पर सुनवाई हो रही है। वहीं सुनवाई के कारण आठों जमातियों को बरेली सेंट्रल जेल शिफ्ट करने के प्रयास चल रहे हैं।

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