अयोध्या: चिकित्सकों को ट्रामा कोर्स में मिला नई तकनीकों का ज्ञान
जटिल फ्रैक्चर व कूल्हे आदि के इलाज में नई विधियों से विशेषज्ञों ने कराया रूबरू
अयोध्या, अमृत विचार। अयोध्या में रविवार को देश के जाने-माने ऑर्थो सर्जन की क्लास चली। तकरीबन छह घंटे तक विशेषज्ञों ने चिकित्सकों को नई तकनीकों से रूबरू कराया। इसके साथ ही जटिल से जटिल फ्रैक्चर व कूल्हे आदि के इलाज में नई विधियों को भी साझा किया। छह सेशन के दौरान अलग-अलग विशेषज्ञों ने हड्डियों की बीमारी और इलाज के बारे में विधिवत जानकारी दी। मन में जिज्ञासाएं लिए चिकित्सकों ने खूब सवाल पूछे।
रविवार को देश भर के ऑर्थो सर्जन का रामनगरी में जमावड़ा लगा। मौका था 10वें यूपीओए ट्रामा कोर्स का। यूपी आर्थोपैडिक एसोसिएशन और अयोध्या आर्थोपेडिक क्लब की ओर से कोर्स का आयोजन किया गया था। सिविल लाइन्स स्थित एक होटल में आयोजित कार्यकम का शुभारंभ वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. डीडी तन्ना, डॉ. केडी त्रिपाठी, डॉ. पीयूश मिश्र, डॉ. संतोष सेन, डॉ. अनिल जायसवाल, डॉ. जीके पांडेय, डॉ. अतुल वर्मा, डॉ. एसएम द्विवेदी और डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर किया।

ट्रामा कोर्स में पूरे देश के आर्थोपैडिक चिकित्सक शामिल हुए। छह सेशन में चले ट्रामा कोर्स में पहला 10 से 11 बजे तक चला, जिसमें डॉ. मनीषी बंसल, डॉ. नदीम फारुखी, डॉ. विवेक त्रिखा और पीजीआई चंडीगढ़ से पहुंचे डॉ. रमेश सेन ने एसेटाबुलम फ्रैक्चर को टेकल करने की जानकारी दी। डॉ. रमेश ने पुराने टूटे जटिल एसेटाबुलम के नई विधि को चिकित्सकों के बीच साझा किया। दूसरे सेशन में डॉ. संतोष सिंह, डॉ. ज्ञानेश्वर, डॉ. मधुसूदन मिश्र ने कूल्हे की हड्डी का ऑपरेशन और उम्र के हिसाब से प्रयोग होने वाले संसाधनों और ऑपरेशन की प्राथमिकता जानकारी दी।
मुंबई के डॉ. राम चड्डा ने परेशान मरीजों के इलाज और उसको संतुष्ट करने के लिए राहत भरे इलाज की जानकारी दी। डॉ. केडी त्रिपाठी, डॉ. डीडी तन्ना, डॉ. अमित जायसवाल व डा. आरपी सिंह ने कूल्हे के इलाज में आज के समय प्रयोग हाेने वाली नई विधियों को बताया। डा. संजय धवन, डॉ. पीके समसेरी आदि ने हड्डियों की बीमारी और इलाज के बारे में विधिवत जानकारी दी। इस दौरान डॉ. अब्बुस सलाम, डॉ. अतुल कुमार वर्मा व अन्य मौजूद रहे।
200 से अधिक चिकित्सक पहुंचे
अयोध्या आर्थोपैडिक क्लब के सचिव डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि इस तरह के काेर्स चिकित्सकों के लिए बहुत आवश्यक हैं। कोर्स का मकसद था कि अधिक से अधिक जागरुकता बढ़े। देश भर के तकरीबन 200 से अधिक चिकित्सकों ने कोर्स में भाग लिया। कोर्स के समापन के बाद सभी संतुष्ट दिखे। इसके बाद चिकित्सक अयोध्या दर्शन के लिए भी निकले।
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