Kanpur: प्रदेश में पहली बार लोगों ने ली त्वचा दान करने की शपथ, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना समेत 75 लोग शपथ ग्रहण समारोह में हुए शामिल
कानपुर, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश में अभी स्किन बैंक नहीं है। पहली बार यह बैंक जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में स्थापित होना है। इस संबंध में युग दधीचि देहदान संस्था के अभियान प्रमुख मनोज सेंगर प्रयासरत हैं। उनकी पहल पर शनिवार को विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना समेत 75 लोगों ने त्वचा दान की शपथ ली।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के एलटी वन में शनिवार को युग दधीचि देहदान संस्थान के प्रमुख मनोज सेंगर व माधवी सेंगर ने शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, मंगलामुखी मन्नत मां ने सात मंगलामुखी बहनों समेत 75 लोगों ने त्वचा दान करने की शपथ ली। सतीश महाना ने कहा कि स्किन बैंक अभी दिल्ली के एम्स में है। जीएसवीएम में स्थापित होने वाला स्किन बैंक प्रदेश का पहला बैंक होगा। अभियान को सफल बनाने के लिए हर संभव मदद की जाएगी।
मनोज सेंगर ने बताया कि अभी तक जो भी अभियान संचालित किए जा रहे हैं, उनमे त्वचा दान का अभियान एक सपने जैसा था, जो अब पूरा होता दिख रहा है।
सभागार में 75 लोगों ने सिर्फ त्वचा दान की शपथ ही नहीं ली है, बल्कि स्किन बैंक की मुहिम को मजबूत करने का काम किया है। पूर्व सांसद कैप्टन जगतवीर सिंह द्रोण ने इस कार्य को नेक कार्य बताया। मंगलामुखी समाज की सशक्त भागीदार व नगर निगम की ब्रांड एंबेसडर मंगलामुखी मन्नत मां ने साथियों समेत त्वचादान के संकल्प पत्र भरे। शपथ लेने वाली महिलाओं में लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. प्रभा अवस्थी, असिस्टेंट कमिश्नर आयुषी दीक्षित शर्मा, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की पौत्री नन्दिता मिश्रा, इनर व्हील क्लब से छाया गुप्ता व गायत्री परिवार से कमलेश दीदी भीं शामिल हुईं।
एनाटमी प्रमुख डॉ.प्रमोद कुमार ने देहदान संकल्पकर्ताओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस दौरान प्राचार्य प्रो. संजय काला, पं. शेष नारायण त्रिवेदी, आयकर अधिकारी शरद प्रकाश अग्रवाल, सीमा अग्रवाल, मदन लाल भाटिया, शांतिभूषण यादव, प्रकाश धवन, रवि तिवारी, प्रेमलता तिवारी, सुमित मिश्रा, डॉ. अमित अवस्थी समेत आदि लोग रहे।
स्किन लगाने में ब्लड ग्रुप से कोई मतलब नहीं
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्लास्टिक सर्जन डॉ. प्रेमशंकर ने बताया कि प्रतिवर्ष 10 लाख से अधिक लोगों को बर्न इंजरी होती है, जिनमे ऐसे लोग शामिल होते हैं, जिनको स्किन की सख्त जरूरत होती है। एक व्यक्ति से किसी दूसरे व्यक्ति को स्किन लगाने में ब्लड ग्रुप से कोई मतलब नहीं होता है। 18 साल से अधिक उम्र के लोग स्किन दान कर सकते है। कैंसर, एचआईवी, एचसीवी, किसी भी प्रकार के इंफेक्शन, मलेरिया आदि बीमारी से ग्रस्त लोग अपनी त्वचा का दान नहीं कर सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति घर में ही रहकर स्किन लगवाना चाहता है तो उसके लिए टीम वैन से मौके पर जाकर कार्य भी करेगी।
पांच साल तक सुरक्षित रहती है स्किन
मनोज सेंगर ने बताया कि बैंक में दान की गई त्वचा तीन से पांच साल तक सुरक्षित रहती है। त्वचा दान नेत्रदान की तरह ही आसान है। त्वचा दान करने पर शरीर में कोई विकृति नहीं आती है। मृत्यु के छह घंटे के भीतर त्वचा दान हो सकता है। स्किन बैंक बनने से आग से जले, एसिड से जले, स्किन कैंसर, गंभीर चोट या घाव के मरीजों को राहत मिलेगी। डॉक्टर के मुताबिक जलने वाले मरीज संक्रमण के शिकार हो जाते हैं, यदि उनके घाव पर त्वचा प्रत्यारोपित हो जाए तो यह मरीज को जीवन दान जैसी होगी।
