ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं के फिक्स और मिनिमम चार्ज को समाप्त करने के लिए याचिका दायर
उपभोक्ता परिषद ने दायर की याचिका, कहा अगले तीन वर्षो तक इन चार्जो को किया जाए समाप्त लखनऊ। बिजली कंपनियों पर निकल रहे 19,535 करोड़ रुपये का लाभ उपभोक्ताओं को देने के लिए राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद (Electricity Consumers Council) ने नियामक आयोग में याचिका दायर की है। इस दायर याचिका में परिषद की ओर …
उपभोक्ता परिषद ने दायर की याचिका, कहा अगले तीन वर्षो तक इन चार्जो को किया जाए समाप्त
लखनऊ। बिजली कंपनियों पर निकल रहे 19,535 करोड़ रुपये का लाभ उपभोक्ताओं को देने के लिए राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद (Electricity Consumers Council) ने नियामक आयोग में याचिका दायर की है। इस दायर याचिका में परिषद की ओर से मांग की गई है कि बिजली कंपनियों पर एक साथ भार न पड़े अगले तीन वर्षों में 19,535 करोड़ रुपये का लाभ उपभोक्ताओं को दिया जाए। याचिका दायर करने के बाद उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने बताया कि हमने याचिका में कहा कि अगले तीन वर्षों में प्रदेश के घरेलू ग्रामीण शहरी विद्युत उपभोक्ताओं के फिक्स चार्ज को पूर्णतया समाप्त करने के साथ ही वाणिज्यक विद्युत उपभोक्ताओं के मिनिमम चार्ज को भी समाप्त किया जाए। इसके साथ ही अगले तीन वर्षों तक फिक्स डिमांड चार्ज में 10 प्रतिशत की कटौती करने और किसानों की मौजूदा दरें जो वर्तमान में 170 रुपये प्रति हार्स पावर है उसे 150 रुपये प्रति हार्स पावर करने की मांग याचिका में की गई है। दायर याचिका में कहा गया कि ग्रामीण अनमीटर्ड घरेलू उपभोक्ताओं की मौजूदा दर 500 रुपये प्रति किलोवाट प्रति माह में 30 प्रतिशत की कटौती करते हुए, निर्धारित किया जाए। इसके अलावा 19,535 करोड़ रुपये का लाभ उपभोक्ताओं को देने के लिए अगले तीन सालों तक सभी श्रेणी के विद्युत उपभोक्ताओं को अगले तीन वर्षों तक सात फीसद रेग्यूलेटरी लाभांवित किया जाए। यानि कि हर महीन उनके बिलों में सात फीसद की कमी हो।
बता दें कि उपभोक्ता परिषद द्वारा अपने पुनर्विचार याचिका में यह मुददा उठाया गया कि चॅूंकि उदय व ट्रूअप के मद में पूर्व में उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर 13,337 रुपये करोड़ निकला था। उस पर वर्ष 2018-19 से अब तक कैरिंग कास्ट 12 प्रतिशत के अनुसार लगभग 5400 करोड ब्याज बना। वर्ष 2020-21 में भी उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर लगभग 800 करोड निकला है। इस तरह उसे विद्युत उपभोक्ताओं का 19,535 रुपये करोड़ पर लाभ मिलना उनका संवैधानिक हक है। इस पूरी रकम का लाभ एक साथ उपभोक्ताओं को देने से प्रदेश के बिजली कम्पनियों की आर्थिक स्थति खराब हो सकती है इसलिये उपभोक्ता परिषद चाहता है कि इसका लाभ अगले तीन वर्षों में उपभोक्ताओं को मिले। जिस पर उपभोक्ता परिषद द्वारा पूरा अध्ययन किया गया है।
अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि उपभोक्त परिषद द्वारा विद्युत नियामक आयोग में जो पुनर्विचार याचिका दाखिल की गयी है उसमें कोरोना काल में देश के जिन राज्यों उत्तराखंड, हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब, बिहार जहां पर दरों में कमी हुयी थी उसका मसौदा भी पेश किया गया है। और यह भी आंकड़ा पेश किया गया है कि पिछले आठ वर्षों में घरेलू ग्रामीण शहरी किसानों की बिजली दरों में उ.प्र. में किस प्रकार से बढोत्तरी की गयी, जिसका खामियाजा आज भी उपभोक्ता भुगत रहा है। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि वाणिज्यक विद्युत उपभोक्ता छोटे दुकानदार कोरोना काल में काफी तबाह हुए हैं इसलिये अब उनके द्वारा लिये गये संयोजित भार पर प्रत्येक माह उनके मीटर में आये वास्ततिक भार पर ही फिक्स डिमांड चार्ज की वसूली की जाये। जिससे उनको सही मायने में राहत मिल सके। जहां तक सवाल है प्रदेश के घरेलू शहरी विद्युत उपभोक्ताओं का तो पिछले आठ वर्षों में उनकी अधिकतम स्लैब वाली दरों में 84 प्रतिशत की वृद्धि ग्रामीण मीटर्ड घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में अधिकतक 500 प्रतिशत की वृद्धि ग्रामीण अनमीटर्ड घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में 300 प्रतिशत की वृद्धि व किसानों की अनमीटर्ड दरों में लगभग 126 प्रतिशत की वृद्धि हुयी है। इसलिये उनकी दरों में कमी किया जाना बहुत ही जरूरी है।
