शाहजहांपुर : गलत विवेचना में फंसे इंस्पेक्टर बीएस वर्मा, कोर्ट ने FIR दर्ज कराने के दिए आदेश
वर्ष 2007 में महिला की हत्या के मामले में नामजद दो आरोपियों को विवेचना में कर दिया था बाहर
शाहजहांपुर, अमृत विचार। वर्ष 2007 में महिला की हत्या के मामले में नामजद आरोपियों के बजाय दूसरे नए व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने वाले विवेचक के खिलाफ कोर्ट ने विभागीय कार्रवाई के साथ ही रिपोर्ट दर्ज कर कड़ी कार्रवाई किए जाने के आदेश पुलिस महानिदेशक को दिए हैं। विवेचना के दौरान आरोपित किए गए अभियुक्तगणों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
चौक कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला अजीजगंज निवासी रीता गुप्ता को 28 जून 2007 की रात 10:30 बजे गर्रापुल पर शमशान भूमि के सामने बाइक सवार दो लोगों ने उस वक्त गोली मारकर घायल कर दिया था, जब वह दवा लेकर रिक्शा से घर लौट रहीं थीं। साथ में उनकी बेटियां नीलू ,शीलू व पूजा गुप्ता भी थीं। रीता गुप्ता ने एक जुलाई 2007 को कानपुर के प्राइवेट अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। इस मामले की रिपोर्ट नीलू गुप्ता ने दर्ज कराई थी, जिसमें जनपद कन्नौज के हरिनगर निवासी रम्मू उर्फ टम्मू उर्फ शशीभूषण गुप्ता व संजीव कुमार गुप्ता को नामजद कराया गया था। मामले की विवेचना चौक कोतवाली प्रभारी निरीक्षक बीएस वर्मा स्वयं कर रहे थे।
विवेचना के उपरांत विवेचक ने नामजद आरोपियों का नाम विवेचना के दौरान मुकदमे से हटाते हुए चौक कोतवाली के मोहल्ला अजीजगंज निवासी मोहम्मद अनीस अहमद और नवादा इंदेपुर निवासी प्रमोद कुमार के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिए और आरोपियों के पास से 12 बोर तमंचा की बरामदगी भी दिखा दी। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या दशम के न्यायाधीश पंकज कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मुकदमे के विवेचक प्रभारी निरीक्षक बीएस वर्मा ने हत्या में नामित अभियुक्त संजीव कुमार गुप्ता व एक अन्य अभियुक्त रम्मू उर्फ टम्मू उर्फ शशीभूषण गुप्ता को विवेचना में निकाल दिया और दो व्यक्तियों प्रमोद कुमार व अनीस के खिलाफ यह कह कर आरोप पत्र दाखिल किया गया कि रीता गुप्ता की हत्या में यही दोनों लोग अभियुक्तगण हैं। यह समझ से परे है, कि विवेचक ने किस ब्रह्म ज्ञान के आधार पर यह ज्ञात कर लिया कि रीता गुप्ता की हत्या प्रमोद कुमार और अनीस ने की है। जबकि मुकदमा की वादिनी नीलू गुप्ता ने स्वयं अपनी एफआईआर में रम्मू उर्फ टम्मू उर्फ शशीभूषण गुप्ता व संजीव कुमार गुप्ता को नामजद कराया गया। बाद में उसने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा कि उसकी मां रीता गुप्ता के द्वारा मरने से पहले बताया गया कि उसे गोली संजीव कुमार गुप्ता ने नहीं बल्कि रम्मू उर्फ टम्मू उर्फ शशीभूषण गुप्ता ने मारी, जिससे कि जमीन संबंधी विवाद चल रहा था।
वादिनी ने प्रथम सूचना रिपोर्ट में मां रीता की गोली मार कर हत्या करने वालों में संजीव कुमार गुप्ता व एक अन्य के बारे में बताया। बयान में वादिनी ने अन्य का नाम रम्मू उर्फ टम्मू उर्फ शशीभूषण गुप्ता बताया। फिर विवेचक ने किस आधार पर दोनों अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल नहीं किए और प्रमोद व अनीस के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिए। इतना ही नहीं विवेचक ने अपने ज्ञान का परिचय देते हुए उनके पास से 12 बोर का तमंचा भी बरामद करा दिया। जबकि वादिनी और अन्य साक्षीगणों ने न्यायालय में उपस्थित होकर इस तथ्य को स्वीकार किया कि प्रमोद व अनीस के द्वारा कोई अपराध नहीं किया गया। समझ से परे है, कि नामित अभियुक्तों को छोड़कर पुलिस ने किस आधार पर नए व्यक्तियों कोअभियुक्त बना दिया। यदि ऐसे विवेचक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो यह पूरे पुलिस सिस्टम को बदनाम करेंगे। ऐसी स्थिति में पुलिस महानिदेशक को आदेशित किया जाता है कि विवेचक बीएस वर्मा के खिलाफ न सिर्फ विभागीय कार्रवाई की जाए बल्कि उनके द्वारा किए गए कृत्यो के परिप्रेक्ष्य में उनके खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए और कार्रवाई से न्यायालय को निर्णय की तिथि से दो माह के अंदर कृत कार्रवाई से अवगत कराया जाए।
कारागार में बंद प्रमोद को दिए रिहा करने के आदेश
अभियुक्त अनीस जमानत पर है, उसकी जमानतें निरस्त की जाती हैं और जमानतदारों को उनके दायित्वों से उन्मोचित किया जाता है। अभियुक्त प्रमोद जिला कारागार में निरूद्ध है, इसलिए जेल अधीक्षक को आदेशित किया जाता है कि यदि प्रमोद किसी अन्य मुकदमे में निरूद्ध न हो तो उसे अविलंब रिहा किया जाए।
