कल का मैनचेस्टर अब डिफेंस का बड़ा सेक्टर: विमान, ड्रोन, हथियार और गोला-बारूद की रक्षा परियोजनाओं से बदल रही Kanpur की तस्वीर

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित डिफेंस कॉरिडोर कानपुर को रक्षा विनिर्माण और एयरोस्पेस क्षेत्र में नई ऊंचाइयों ती तरफ ले जाने की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहा है। कारिडोर में 4000 करोड़ रुपये अकेले अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजी निवेश कर रहा है। इसमें 1500 करोड़ से सेना, अर्धसैनिक बलों और पुलिस के लिए छोटे, मध्यम और बड़े कैलिबर के गोला-बारूद की एकीकृत उत्पादन इकाई में काम शुरू हो चुका है। 2500 करोड़ प्रणोदक विनिर्माण पर निवेश की तैयारी है। 

प्रणोदक (प्रपोलंट) का इस्तेमाल अंतरिक्ष यान को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकालने, राकेट को वायुमंडल के ऊपर गति प्रदान करने तथा मिसाइल को लक्ष्य तक पहुंचाने में किया जाता है। 5000 करोड़ रुपये जेनसर एयरोस्पेस एंड आईटी कंपनी ने कॉरिडोर में निवेश करने का प्रस्ताव दिया है, जबकि अनंत टेक्नोलॉजीज ने सेटेलाइट बनाने के लिए 2,000 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। 150 करोड़ रुपये

डेल्टा कॉम्बैट सिस्टम द्वारा छोटे हथियार और गोला-बारूद निर्माण पर खर्च करेगी। इसके अलावा लोहिया एयरोस्पेस सिस्टम्स ने 370 करोड़ रुपये के निवेश से एयरोस्पेस कम्पोजिट सुविधा बनाने की योजना बनाई है, जबकि नेशनल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी रिसर्च एंड एनालिसिस (नेत्रा) तोपखाने के गोले बनाने के लिए 360 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।

ड्रोन का बन सकता है हब

फ्रांसीसी कंपनी सीआईएलएएस 500 करोड़ रुपये से रक्षा डोन निर्माण में इस्तेमाल होने वाली लेजर तकनीक के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की संभावना तलाश रही है। एमएसके बिजनेस सॉल्यूशंस रडार और एवियोनिक्स के निर्माण के लिए रूसी ओईएम के साथ एक संयुक्त उद्यम में 120 करोड़ रुपये का निवेश करने का दम भर चुकी है, तो राफे एमफिबर 100 करोड़ के निवेश के साथ एक गतिशील ड्रोन हब स्थापित करने के प्रस्ताव को जमीन पर उतारने में लगी है।

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