बरेली: डाकिया डाक नहीं सैंपल लाया…

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अमृत विचार, बरेली। केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 तक क्षय रोग (टीबी) को पूरी तरह से खत्म करने का लक्ष्य रखा है। इसी क्रम में टीबी मरीजों के सैंपल की जल्द से जल्द बेहतर जांच कराने के लिए राज्य क्षय रोग विभाग और भारतीय डाक विभाग में करार हुआ था। इसके तहत प्रदेश के सभी …

अमृत विचार, बरेली। केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 तक क्षय रोग (टीबी) को पूरी तरह से खत्म करने का लक्ष्य रखा है। इसी क्रम में टीबी मरीजों के सैंपल की जल्द से जल्द बेहतर जांच कराने के लिए राज्य क्षय रोग विभाग और भारतीय डाक विभाग में करार हुआ था। इसके तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों में टीबी मरीजों का सैंपल लैब तक पहुंचाने का काम डाकिये कर रहे हैं। इससे पहले ये सैंपल कोरियर से भेजे जाते थे जिससे अधिक समय लगता था। पायलट प्रोजेक्ट के तहत लखनऊ समेत प्रदेश के पांच जिलों में पहले चरण में यह कार्यक्रम नौ महीने पहले चलाया गया था। उसमें सफलता मिलने के बाद विभाग ने अब बड़ा कदम उठाया है। इस योजना के तहत पिछले छह महीने में डाकिए 2400 से अधिक सैंपल ला चुके हैं।

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एसके गर्ग ने बताया कि टीबी मरीजों के मामले में सबसे बड़ी चुनौती जल्द से जल्द जांच कराने की होती है क्योंकि एक टीबी मरीज अनजाने में न जाने कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है। इसी को देखते हुए डाक विभाग से करार किया गया है। वह प्रदेश के करीब 2300 अधिकृत टीबी जांच केन्द्रों से 24 घंटे में 142 सीबीनाट मशीन सेंटर तक सैंपल पहुंचाने का काम कर रहे हैं। साथ ही 142 सीबीनाट मशीन सेंटर से प्रदेश के छह जिलों (लखनऊ, आगरा, अलीगढ़, बरेली, मेरठ व वाराणसी) में स्थित ड्रग कल्चर टेस्ट सेंटर तक 48 घंटे में सैम्पल पहुंचाए जा रहे हैं।

2019 में प्रदेश में करीब 4.86 लाख मरीजों को चिह्नित कर इलाज शुरू किया गया जोकि वर्ष 2018 के मुकाबले करीब 19 फीसद अधिक है। ऐसे मरीजों की खोज के लिए समय-समय पर पूरे प्रदेश में एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) अभियान चलाये गए जिनको यह पता ही नहीं होता कि वे टीबी से ग्रसित हैं। इन अभियानों के जरिये हर बार औसतन करीब 7000 टीबी रोगी खोजे गए जिनका जल्द से जल्द इलाज शुरू किया गया। सभी टीबी मरीजों के बेहतर खानपान के लिए इलाज के दौरान प्रतिमाह 500 रुपये देने की व्यवस्था की गयी है। इसके तहत करीब 112 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। टीबी मरीजों के एचआईवी ग्रसित होने की अधिक सम्भावना होती है। इसे देखते हुए वर्ष 2019 में करीब 77 फीसद मरीजों की एचआईवी जांच कराई गयी जोकि पिछले साल के मुकाबले करीब 11 प्रतिशत अधिक हैं।

लॉकडाउन में शुरू नहीं हो सकी योजना
जिला क्षय रोग अधिकारी डा. एसके गर्ग ने बताया कि यह करार मार्च में हुआ था लेकिन लॉकडाउन की वजह से योजना परवान नहीं चढ़ सकी। जून महीने में इस करार के तहत डाकियों ने अपना कार्य शुरू किया। इसके तहत एक महीने में डाकिए सैंपल के करीब 200 बॉक्स ला रहे है। उन्होंने बताया कि एक बॉक्स में दो, तीन या चार सैंपल हो सकते हैं। अगर एक बॉक्स में दो सैंपलों का आंकड़ा माना जाए तो अभी तक डाकिए 2400 से अधिक सैंपल ला चुके हैं। केंद्र सरकार के 2025 तक क्षय रोग को खत्म करने के लिए यह योजना काफी फायदेमंद साबित हो रही है। कोरोना की वजह से जरूर उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं आ पाया लेकिन इस योजना का काफी लाभ मिला है।

अभियान

  • वर्ष 2019 में प्रदेश में करीब 4.86 लाख मरीज चिह्नित, वर्ष 2018 के मुकाबले 19 फीसद अधिक
  • फरवरी 2019 के मुकाबले इस साल सीबीनाट मशीन से करीब 22 हजार अधिक सैंपल की जांच
  • टीबी मरीजों के बेहतर खानपान के लिए पोषण योजना के तहत करीब 112 करोड़ रुपये का भुगतान
  • करीब 77 प्रतिशत टीबी मरीजों की हुई एचआईवी जांच जो पिछले साल के मुकाबले 11 फीसद अधिक
  • 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2019 तक बरेली जिले में सरकारी और निजी अस्पताल में 16380 टीबी के मरीज मिले थे।

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